Wednesday, October 28, 2026
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Third Child: तीसरे बच्चे के लिए केवल 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश…महिला कर्मचारी की 365 दिनों की छुट्टी वाली याचिका क्योें हुई खारिज, पढ़िए

Third Child: मद्रास हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के मातृत्व अवकाश और जनसंख्या नीति के तहत तय नियमों के बीच संतुलन को रेखांकित करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

महिला सरकारी कर्मचारी ने अपने तीसरे बच्चे को जन्म दिया

हाईकोर्ट के जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस आर. शक्तिवेल की खंडपीठ ने पूनमल्ली कोर्ट में तैनात एक महिला कर्मचारी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपने तीसरे बच्चे के लिए 365 दिनों की मैटरनिटी लीव को मंजूरी देने की मांग की थी। अदालत ने कहा, राज्य सरकार के Fundamental Rules और Supreme Court के दिशा-निर्देशों के तहत तय की गई सीमाओं से परे जाकर हाई कोर्ट किसी कर्मचारी को अतिरिक्त राहत नहीं दे सकता। सरकारी नियमों के मुताबिक, एक महिला सरकारी कर्मचारी अपने तीसरे बच्चे के जन्म के लिए केवल 12 सप्ताह (84 दिन) के सवैतनिक मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) की हकदार है, पूरे एक साल (365 दिन) की छुट्टी की नहीं।

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मामला क्या है?: तीसरे बच्चे पर ट्रेजरी (खजाने) ने रोका वेतन बिल

यह मामला अदालती प्रशासनिक मंजूरी और वित्तीय नियमों के बीच टकराव से जुड़ा है।

कर्मचारी की अर्जी: याचिकाकर्ता ‘दिव्या’ पूनमल्ली स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में ‘ऑफिस असिस्टेंट’ (कार्यालय सहायक) के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने 14 जून 2025 को अपने तीसरे बच्चे को जन्म दिया। इसके लिए उन्होंने 26 मई 2025 से 25 मई 2026 तक यानी पूरे 365 दिनों के मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था।

मंजूरी और ट्रेजरी की रोक: शुरुआत में न्यायिक मजिस्ट्रेट और प्रधान जिला जज ने प्रशासनिक स्तर पर इस छुट्टी को मंजूरी दे दी थी। लेकिन, जब इस अवधि के वेतन बिल (Salary Bills) को तिरुवल्लूर जिला ट्रेजरी (खजाने) के पास भेजा गया, तो ट्रेजरी अधिकारी ने तमिलनाडु सरकार के ‘फंडामेंटल रूल 101(A)’ का हवाला देते हुए बिल पास करने से साफ मना कर दिया। ट्रेजरी का तर्क था कि तीसरे बच्चे के लिए 365 दिनों की छुट्टी का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।

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हाई कोर्ट की विधिक व्याख्या: सुप्रीम कोर्ट का फैसला और जीओ (G.O.) बना आधार

महिला कर्मचारी ने हाई कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए दलील दी कि वह 365 दिनों की छुट्टी की हकदार है और ट्रेजरी द्वारा उठाए गए आक्षेप अवैध हैं। हालांकि, मद्रास हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इन दलीलों को अमान्य करते हुए हालिया कानूनी बदलावों को स्पष्ट किया।

‘उमा देवी बनाम तमिलनाडु सरकार’ मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख

अदालत ने नोट किया कि पहले तमिलनाडु के फंडामेंटल रूल्स में तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश देने का कोई प्रावधान ही नहीं था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस मानवीय मुद्दे पर विचार करते हुए तीसरे बच्चे के लिए भी मातृत्व अवकाश की अनुमति दी, परंतु साथ ही देश की जनसंख्या नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस लाभ को अधिकतम 12 सप्ताह (12 Weeks) तक सीमित कर दिया।

तमिलनाडु सरकार का नया शासनादेश (13 मार्च 2026)

सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश का पालन करते हुए तमिलनाडु सरकार ने 13 मार्च 2026 को एक शासनादेश (G.O.Ms.No.18) जारी किया, जिसके तहत फंडामेंटल रूल 101(A) में संशोधन करके एक नया परंतुक (Proviso) जोड़ा गया। इस नए नियम के तहत महिला सरकारी कर्मचारियों को तीसरे बच्चे के लिए केवल 12 सप्ताह की मैटरनिटी लीव देने का वैधानिक प्रावधान किया गया है।

खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा, सरकार द्वारा फंडामेंटल रूल 101(A) में किया गया संशोधन भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुपालन में जारी किया गया था। इसलिए, हाई कोर्ट से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि वह 13.03.2026 को जारी शासनादेश (G.O.) में निर्धारित नियमों और शर्तों से ऊपर या परे जाकर किसी राहत को मंजूरी दे। चूंकि मूल नियम में संशोधन किया जा चुका है, अतः महिला सरकारी कर्मचारी को तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश देने के मामले में इसी संशोधित नियम का पालन किया जाना अनिवार्य है।

अदालत का अंतिम निर्णय

मद्रास हाई कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता महिला कर्मचारी तीसरे बच्चे के लिए 365 दिनों के अवकाश की हकदार नहीं है और ट्रेजरी अधिकारी द्वारा वेतन बिलों पर लगाई गई आपत्ति पूरी तरह से कानून सम्मत थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और फंडामेंटल रूल्स में हुए नए संशोधन के बाद हाई कोर्ट के पुराने फैसलों को नजीर (Precedent) नहीं माना जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने महिला की याचिका को पूरी तरह से निपटा (Disposed) दिया।

केस शीट: मद्रास उच्च न्यायालय निर्णय (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और निष्कर्ष
संबंधित अदालतमद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस आर. शक्तिवेल (डिवीजन बेंच)
संबंधित मामला कानूनS. Divya Vs Others
संशोधित नियमतमिलनाडु सरकार फंडामेंटल रूल 101(A)
नया शासनादेश (G.O.)G.O.Ms.No.18 (दिनांक: 13.03.2026)
पहले दो बच्चों के लिए अवकाशनियमानुसार (तमिलनाडु में सामान्यतः 365 दिन)
तीसरे बच्चे के लिए स्वीकृत अवधिअधिकतम 12 सप्ताह (84 दिन)
अदालत का अंतिम निर्णययाचिका खारिज/निस्तारित; 365 दिनों की छुट्टी देने से इनकार।
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