Monday, August 31, 2026
HomeHigh CourtWomen Privacy: मुंबई पुलिस एक महिला के बेडरूम में रात को घुस...

Women Privacy: मुंबई पुलिस एक महिला के बेडरूम में रात को घुस गई…जानिए निजता के गंभीर उल्लंघन पर कानून का हंटर कैसे चला, सभी पढ़ें

Women Privacy: नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पुलिसिया मनमानी के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर खंडपीठ) ने एक बेहद कड़ा और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है।

महाराष्ट्र सरकार को पीड़ित महिला को ₹10,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया

हाईकोर्ट के जस्टिस उर्मिला जोशी फाल्के और जस्टिस निवेदिता पी. मेहता की खंडपीठ ने महाराष्ट्र सरकार को पीड़ित महिला को ₹10,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्य सरकार चाहे तो यह जुर्माना राशि दोषी पुलिस अधिकारियों की जेब/सैलरी से सीधे वसूल (Recover) कर सकती है। अदालत ने कहा, जांच के नाम पर कोई भी पुलिस अधिकारी किसी नागरिक के संवैधानिक अधिकारों को अपने जूतों तले रौंद नहीं सकता। किसी महिला के बेडरूम में उसकी मर्जी के बिना, बिना महिला पुलिसकर्मी के और बिना किसी कानूनी वारंट के आधी रात को घुसना, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त उसकी निजता (Privacy) और गरिमा (Dignity) का एक बेहद गंभीर और अक्षम्य उल्लंघन है। जांच का उद्देश्य किसी भी अवैध तलाशी या जब्ती को जायज नहीं ठहरा सकता।

मामला क्या है?: आधी रात का खौफ और बिना महिला पुलिस के बेडरूम में एंट्री

यह मामला महाराष्ट्र के सिल्लेवाड़ा इलाके का है, जहां पुलिसिया धौंस का एक बेहद परेशान करने वाला रूप सामने आया।

आधी रात की छापेमारी: याचिकाकर्ता खुशबू और उनके पति इदरीश खान ने हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिट पिटीशन दायर कर पुलिस प्रताड़ना से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 25 जनवरी, 2026 की रात करीब 11:30 बजे खापा पुलिस स्टेशन के कुछ पुलिसकर्मी एक सड़क दुर्घटना (Motor Vehicle Accident) की जांच के सिलसिले में उनके घर में घुस आए।

न वारंट, न महिला पुलिस: याचिकाकर्ता के पति का नाम मूल एफआईआर में आरोपी के तौर पर दर्ज भी नहीं था, इसके बावजूद पुलिस बिना किसी सर्च वारंट के घर में घुस गई। सबसे गंभीर बात यह थी कि पुलिस टीम के साथ कोई भी महिला पुलिस कांस्टेबल (Lady Police Constable) मौजूद नहीं थी।

बेडरूम में पूछताछ और फोन की जब्ती: पुलिसकर्मी सीधे महिला (खुशबू) के बेडरूम में दाखिल हो गए, वहां उनसे जबरन पूछताछ की और उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया। इस जब्ती के लिए पुलिस ने न तो कोई कानूनी कागजात (Seizure Memo) बनाया और न ही किसी स्वतंत्र गवाह को बुलाया।

हाई कोर्ट की विधिक व्याख्या: नए कानून (BNSS) की धज्जियां उड़ाने पर कोर्ट सख्त

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुलिस की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया कि यह सब एक जारी जांच (Ongoing Investigation) का हिस्सा था। कोर्ट ने पुलिस केस डायरी का अध्ययन करने के बाद पाया कि पुलिस ने नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के अनिवार्य सुरक्षा नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया था।

धारा 185 (BNSS) का घोर उल्लंघन (बिना वारंट तलाशी के नियम)

नए कानून के तहत अगर पुलिस बिना वारंट किसी के घर की तलाशी लेती है, तो उसे तलाशी से पहले अपने विश्वास के कारणों को लिखित में दर्ज करना होता है। साथ ही, पूरी तलाशी प्रक्रिया की ऑडियो-वीडियो (मोबाइल/कैमरा) रिकॉर्डिंग अनिवार्य है और 48 घंटे के भीतर इसकी रिपोर्ट मजिस्ट्रेट को भेजनी होती है। पुलिस ने इनमें से एक भी नियम का पालन नहीं किया।

धारा 105 (BNSS) का उल्लंघन (जब्ती की प्रक्रिया)

महिला का मोबाइल फोन छीनते समय पुलिस ने कोई ‘जब्ती पंचनामा’ (Seizure Panchnama) नहीं बनाया, न ही स्वतंत्र पंच गवाहों को बुलाया और न ही महिला को कोई रसीद दी, जो कि नए कानून के तहत अनिवार्य है।

निजता का अधिकार जीवन का अभिन्न अंग है

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक पुट्टस्वामी फैसले का संदर्भ लेते हुए खंडपीठ ने कहा, निजता का अधिकार (Right to Privacy) अब संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक अविभाज्य हिस्सा है। हालांकि पैसों का यह मुआवजा पीड़ित महिला की निजता और गरिमा को पहुंचे नुकसान की पूरी भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन यह उनके संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए ‘एक मरहम’ (Solace) का काम करेगा और पुलिस के लिए एक कड़ा सबक होगा कि खोजी शक्तियों का इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर ही करना होगा, मनमाने ढंग से नहीं।

केस शीट: बॉम्बे हाई कोर्ट पुलिस ज्यादती एवं निजता समीक्षा (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और निर्णय
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय (नागपुर खंडपीठ)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस उर्मिला जोशी फाल्के और जस्टिस निवेदिता पी. मेहता
याचिकाकर्ता (Petitioners)खुशबू और उनके पति इदरीश खान
उल्लंघन किए गए कानूनBNSS, 2023 की धारा 105 व 185; संविधान का अनुच्छेद 21
अदालत का अंतिम निर्णयपुलिसिया कार्रवाई अवैध घोषित; मोबाइल तुरंत लौटाने और ₹10,000 जुर्माना भरने का आदेश।

समय सीमा और ब्याज की चेतावनी

हाई कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग को बेहद गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिया है कि पुलिस महिला का जब्त किया गया मोबाइल फोन तुरंत वापस करे। राज्य सरकार दो महीने के भीतर पीड़ित महिला को ₹10,000 का मुआवजा अदा करे। यदि सरकार दो महीने के भीतर यह भुगतान करने में विफल रहती है, तो इस राशि पर 8% प्रति वर्ष की दर से ब्याज देना होगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
moderate rain
29 ° C
29 °
29 °
89 %
3.6kmh
100 %
Mon
29 °
Tue
32 °
Wed
26 °
Thu
28 °
Fri
31 °

Recent Comments