Monday, August 31, 2026
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DPDP Act: डिजी यात्रा के लिए आधार अनिवार्य नहीं होना चाहिए…डेटा की गोपनीयता को लेकर दायर जनहित याचिका को जरूर सभी को पढ़ना चाहिए

DPDP Act: विमानन क्षेत्र में यात्रियों की डिजिटल गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को लेकर केरल हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण विधिक रुख अपनाया है।

‘डिजी यात्रा’ (Digi Yatra) प्लेटफॉर्म पूरी तरह स्वैच्छिक होना चाहिए

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और जस्टिस श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि डिजी यात्रा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए पहचान के तौर पर केवल आधार मांगने की जिद संवैधानिक रूप से गलत है। अदालत ने कहा, हवाई अड्डों पर यात्रियों के निर्बाध और संपर्क रहित (Contactless) आवागमन के लिए शुरू किया गया ‘डिजी यात्रा’ (Digi Yatra) प्लेटफॉर्म पूरी तरह स्वैच्छिक होना चाहिए। यदि किसी नागरिक के पास अपनी पहचान साबित करने के लिए कोई अन्य वैध दस्तावेज (जैसे पासपोर्ट, वोटर आईडी आदि) मौजूद है, तो सरकार उसे इस ऐप पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए अपने आधार (Aadhaar) विवरण साझा करने के लिए कानूनी रूप से मजबूर नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक पुट्टास्वामी फैसले के आलोक में यह अनिवार्यता प्रथम दृष्टया सही नहीं है।

मामला क्या है?: डेटा सुरक्षा और ‘पुट्टास्वामी’ फैसले का उल्लंघन

यह मामला प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता सी.आर. नीलकंदन द्वारा दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है।

डेटा गोपनीयता पर चिंता: याचिका में आरोप लगाया गया है कि डिजी यात्रा प्लेटफॉर्म के जरिए हवाई अड्डों पर यात्रियों का अत्यंत संवेदनशील व्यक्तिगत और बायोमेट्रिक डेटा (जैसे पासपोर्ट विवरण, आधार-लिंक्ड जानकारी, यात्रा का इतिहास और मोबाइल नंबर) एकत्र किया जा रहा है।

DPDP एक्ट का उल्लंघन: याचिकाकर्ता का तर्क है कि देश में ‘डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023’ (DPDP Act) लागू होने के बावजूद, डिजी यात्रा द्वारा एकत्र किए जा रहे डेटा के भंडारण (Storage), प्रोसेसिंग और उसे निजी संस्थाओं के साथ साझा करने को लेकर कोई पारदर्शी और सुरक्षित ढांचा तैयार नहीं किया गया है।

पुट्टास्वामी जजमेंट का हवाला: याचिका में सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (निजता का अधिकार) मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि हवाई अड्डों पर इस तरह का बड़े पैमाने पर डेटा संग्रह वैधानिकता, आवश्यकता और आनुपातिकता (Legality, Necessity, and Proportionality) के संवैधानिक मानकों को पूरा नहीं करता।

मुख्य न्यायाधीश की मौखिक टिप्पणी: “आप इसके लिए दबाव नहीं डाल सकते”

सुनवाई के दौरान जब केंद्र सरकार और भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ए.आर.एल. सुंदरेशन ने दलील दी कि डिजी यात्रा का उपयोग पूरी तरह स्वैच्छिक (Voluntary) है, तो खंडपीठ ने इस पर कड़ी टिप्पणी की।

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन ने मौखिक रूप से कहा, “पुट्टास्वामी फैसले के कानून के अनुसार, डिजी यात्रा पर पंजीकरण के लिए इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता। आप इसके लिए नागरिकों पर दबाव नहीं डाल सकते। यदि किसी यात्री के पास अपनी पहचान स्थापित करने के लिए कोई अन्य पहचान प्रमाण (Alternative ID Proof) है, तो आधार विवरण मांगना बिल्कुल भी आवश्यक नहीं होना चाहिए।”

याचिकाकर्ता की बीमारी, पर कोर्ट ने जारी रखी सुनवाई

दिलचस्प बात यह रही कि याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि उनके मुवक्किल स्वास्थ्य कारणों से इस पीआईएल को वापस लेना चाहते हैं। लेकिन हाई कोर्ट की बेंच ने याचिका वापस लेने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि चूंकि यह मामला व्यापक जनहित (Public Interest) और देश के करोड़ों हवाई यात्रियों की डेटा सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए अदालत इस विधिक बिंदु की जांच जारी रखेगी।

विधिक केस शीट: केरल हाई कोर्ट डिजी यात्रा डेटा सुरक्षा समीक्षा (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और वर्तमान निर्देश
संबंधित अदालतकेरल उच्च न्यायालय (High Court of Kerala)
माननीय न्यायाधीशमुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और जस्टिस श्याम कुमार वी.एम.
याचिकाकर्तासी.आर. नीलकंदन (सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता)
प्रतिवादीभारत संघ, भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) एवं अन्य
प्रासंगिक कानूनडिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (DPDP Act)
अदालत का अंतरिम निर्देशडिजी यात्रा फाउंडेशन को दो हफ्ते में जवाब देना होगा कि क्या पंजीकरण के लिए अन्य पहचान पत्र पर्याप्त होंगे।

क्या है डिजी यात्रा और अगला कदम?

डिजी यात्रा हवाई अड्डों पर यात्रियों के त्वरित और कागजरहित प्रवेश के लिए फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) पर आधारित एक बायोमेट्रिक प्रणाली है। इसे ‘डिजी यात्रा फाउंडेशन’ द्वारा संचालित किया जाता है, जो AAI और निजी हवाई अड्डा ऑपरेटरों की एक संयुक्त गैर-लाभकारी संस्था है।

हाई कोर्ट ने अब मामले की सुनवाई को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है और डिजी यात्रा फाउंडेशन के वकील को अदालत के सामने यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्या कोई नागरिक आधार के अलावा किसी अन्य सरकारी पहचान पत्र (Alternative Government ID) का उपयोग करके इस पोर्टल तक पहुंच प्राप्त कर सकता है या नहीं।

इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से दलीलें पेश की गईं, जबकि केंद्र सरकार का पक्ष ए.एस.जी. ए.आर.एल. सुंदरेशन ने रखा।

जब हमारे पास पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे मजबूत सरकारी पहचान पत्र मौजूद हैं, तो ऐप पर लॉगिन करने के लिए एक विशिष्ट डेटाबेस की अनिवार्यता क्यों? दो हफ्ते बाद डिजी यात्रा फाउंडेशन का जवाब यह तय करेगा कि देश में डिजिटल सेवाओं का विस्तार लोकतांत्रिक तरीके से होगा या जबरन तकनीकी दबाव के जरिए।

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