Friday, October 16, 2026
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Court Decorom: अदालतें न्याय का मंदिर हैं, व्यक्तिगत ड्रामे या जजों पर दबाव बनाने का मंच नहीं…इन-पर्सन याचिकाओं के यहां बनाए कड़े नियम पढ़ें

Court Decorom: सुप्रीम कोर्ट के भीतर पिछले हफ्ते हुई एक अप्रिय घटना के बाद शीर्ष अदालत ने कोर्ट रूम की सुरक्षा और गरिमा बनाए रखने के लिए एक बेहद सख्त प्रशासनिक कदम उठाया है।

जो खुद आकर बहस करेंगे तो उनकी सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग व वीडियो रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता में हुई सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों की ‘फुल कोर्ट मीटिंग’ (Full Court Meeting) में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया। शीर्ष अदालत का मानना है कि अदालतें न्याय का मंदिर हैं, व्यक्तिगत ड्रामे या जजों पर दबाव बनाने का मंच नहीं। जो याचिकाकर्ता (Litigants-in-Person) खुद आकर अपनी बहस करने की जिद करेंगे, उनकी सुनवाई की न तो लाइव-स्ट्रीमिंग होगी और न ही कोई वीडियो रिकॉर्डिंग की अनुमति दी जाएगी। कोर्ट रूम के भीतर बदसलूकी और हुड़दंग को सोशल मीडिया या जनता के बीच प्रचारित होने (Amplify) की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जा सकती।

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मामला क्या है?: कोर्ट रूम नंबर 13 में कागजात फेंकना और हाथापाई

यह सख्त कदम 10 जुलाई 2026 को कोर्ट रूम नंबर 13 में हुए एक अभूतपूर्व हंगामे के बाद उठाया गया है।

घटना: एक याचिकाकर्ता (प्रबल प्रताप) ने खुद जजों के सामने बहस करने (Litigant-in-Person) के दौरान जजों को “न्यायिक सेवक” (Judicial Servants) कहा, गालियां दीं और कोर्ट रूम के भीतर सरकारी कागजात हवा में उछाल दिए। जब सुरक्षाकर्मियों ने उसे बाहर निकालने की कोशिश की, तो उसने और उसके साथ आए लॉ स्टूडेंट्स ने हाथापाई की।

विधिक कार्रवाई: जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने याचिकाकर्ता की मानसिक स्थिति को देखते हुए अवमानना (Contempt) की कार्यवाही तो नहीं की, लेकिन दिल्ली पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने और सुरक्षाकर्मियों पर हमले के आरोप में दो कानून के छात्रों सहित मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पुरानी नजीर: इससे पहले अक्टूबर 2025 में एक 71 वर्षीय वकील ने तत्कालीन सीजेआई भूषण आर. गवई पर जूता उछालने का प्रयास किया था, जिसके बाद से ही अदालत दंडात्मक कार्रवाई के बजाय निवारक तंत्र (Preventive Measures) बनाने पर जोर दे रही थी।

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नए नियम: ‘वर्चुअल मोड’ को प्राथमिकता, फिजिकल पर नो लाइव-स्ट्रीमिंग

सुप्रीम कोर्ट रूल्स, 2013 के तहत किए गए नए प्रशासनिक बदलावों के अनुसार

वर्चुअल सुनवाई को बढ़ावा:रजिस्ट्रार के समक्ष स्क्रूटनी के दौरान खुद बहस करने वाले वादियों को पहली प्राथमिकता के तौर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Virtual Mode) के जरिए पेश होने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

फिजिकल उपस्थिति पर कड़ा बैन:यदि कोई वादी कोर्ट रूम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की जिद करता है, तो उस मामले की सुनवाई की लाइव-स्ट्रीमिंग (Live-Streaming) और वीडियो रिकॉर्डिंग पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।

मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए ‘महा-अभियान’ (Pendency Drive)

फुल कोर्ट मीटिंग में केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सालों से पेंडिंग मुकदमों (Judicial Arrears) को खत्म करने के लिए भी एक बहुत बड़ा विधिक खाका तैयार किया गया है।

9,177 मामलों का एक साथ निपटारा: कोर्ट ने लगभग 100 ऐसे ‘बंच मैटर्स’ (Bunch Matters – एक जैसे विधिक मुद्दों वाले मामले) की पहचान की है, जो अंतिम सुनवाई के लिए तैयार हैं। इन 100 समूहों के निपटारे से एक झटके में 9,177 लंबित मुकदमे बंद हो जाएंगे।

स्पेशल रोस्टर और समर्पित बेंच: सीजेआई सूर्यकांत ने एक विशेष रोस्टर प्रणाली लागू की है जिसके तहत चार समर्पित डिवीजन बेंच (Dedicated Benches) का गठन किया गया है। ये बेंच हर हफ्ते मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को केवल सबसे पुराने सिविल और क्रिमिनल मामलों की ही सुनवाई करेंगी।

समय सीमा और कॉज लिस्ट का सरलीकरण: अब वकीलों को अपनी मौखिक दलीलों (Oral Submissions) के लिए पहले से ही एक टाइमलाइन देनी होगी ताकि कोर्ट का समय बर्बाद न हो। कॉज लिस्ट को सरल बनाने के लिए जजों की एक समिति भी गठित की जाएगी।

समाधान समारोह (Lok Adalat): सुप्रीम कोर्ट के सभी जज 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को होने वाले विशेष लोक अदालत (Samadhan Samaroh) में हिस्सा लेंगे, ताकि आपसी सहमति से मुकदमों को तेजी से सुलझाया जा सके।

विधिक केस शीट: सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक एवं सुरक्षा सुधार (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्चतम न्यायालय की नई विधिक व्यवस्था और नियम
प्रशासनिक निकायसुप्रीम कोर्ट फुल कोर्ट (सभी माननीय न्यायाधीश शामिल)
मुख्य विधिक सुधारइन-पर्सन वादियों के फिजिकल उपस्थित होने पर लाइव-स्ट्रीमिंग/रिकॉर्डिंग बैन
लंबित मुकदमों का लक्ष्य100 बंच मामलों के जरिए 9,177 पेंडिंग केस खत्म करना
स्पेशल वर्किंग डेजसबसे पुराने मामलों के लिए मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को विशेष बेंच
आगामी विधिक लोक अदालत21, 22 और 23 अगस्त 2026 (समाधान समारोह)

‘नो लाइव-स्ट्रीमिंग’ का नियम वादियों को अदालत आने से नहीं रोकता, बल्कि उनके द्वारा की जाने वाली विधिक अराजकता के डिजिटल विस्तार को रोकता है। वहीं, 9,000 से अधिक मामलों को एक साथ बंच करके निपटाने का फैसला उन आम नागरिकों के लिए न्याय की एक नई किरण है जो पीढ़ियों से कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं।

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