Wednesday, November 4, 2026
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Waste Management: देवभूमि हिमाचल में ऐसी क्या बात हुई….नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को देना पड़ा कड़ा फैसला, खबर पढ़कर समझ पाएंगे

Waste Management: हिमाचल प्रदेश में कचरा प्रबंधन और सीवेज ट्रीटमेंट की दयनीय स्थिति पर तीव्र असंतोष व्यक्त करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है।

कचरा प्रबंधन में विफल सरकार को गिनाई खामियां

एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्यों (ए. सेंथिल वेल एवं अफरोज अहमद) की पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव द्वारा पेश की गई अनुपालन रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां पाईं और सरकार को दिशा-निर्देशों की एक लंबी फेहरिस्त सौंपते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हिमाचल प्रदेश का पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र केवल एक राज्य का विषय नहीं है, बल्कि यह देश के लिए वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट है। यहाँ की नदियाँ भारत के मैदानी इलाकों की जीवनरेखा हैं। ऐसे में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन (Solid & Liquid Waste Management) में कमियों को दूर करना सरकार के लिए महज कोई ‘प्रशासनिक लक्ष्य’ नहीं, बल्कि सर्वोच्च प्राथमिकता वाला ‘संवैधानिक अनिवार्य कर्तव्य’ (Constitutional Imperative) है।”

लिक्विड वेस्ट: 44.5% सीवेज बिना ट्रीटमेंट के पवित्र नदियों में

एनजीटी ने राज्य में तरल कचरा प्रबंधन (Liquid Waste Management) के आंकड़ों पर गहरी चिंता जताई।

उपचार में भारी अंतर: हिमाचल प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 159.117 मिलियन लीटर सीवेज (MLD) पैदा होता है, लेकिन इसमें से केवल 88.293 MLD सीवेज का ही ट्रीटमेंट (उपचार) किया जा पाता है।

नदियों का प्रदूषण: राज्य का लगभग 44.5 प्रतिशत सीवेज बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे प्राकृतिक जल स्रोतों, नदियों, खड्डों (Rivulets) और झीलों में बहाया जा रहा है, जिससे निचली घाटी के करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

शून्य सीवर कनेक्शन: ट्रिब्यूनल ने नोट किया कि राज्य के 30 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में घरों में सीवर कनेक्शन शून्य हैं, जिसके कारण घरेलू गंदगी सीधे खुले नालों से होती हुई जल निकायों को दूषित कर रही है।

मानकों का उल्लंघन: राज्य में संचालित 20 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STPs) तय पर्यावरण मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, और कई एसटीपी बिना वैध वैधानिक सहमति (Statutory Consent) के ही चल रहे हैं।

सॉलिड वेस्ट: शिमला सहित पूरे राज्य में 295 कचरा ‘हॉटस्पॉट’

ठोस कचरा प्रबंधन के मोर्चे पर भी ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार की खिंचाई की।

कचरे के ढेर: राज्य भर में 295 वेस्ट हॉटस्पॉट की पहचान की गई है, जिनमें से अकेले शिमला नगर निगम में 28 हॉटस्पॉट मौजूद हैं। एनजीटी के अनुसार, यह स्थिति डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, सोर्स सेग्रिगेशन (कचरे को स्रोत पर अलग करना) और सार्वजनिक स्वच्छता प्रणाली की विफलता को दर्शाती है।

डेटा का अभाव: एनजीटी ने पाया कि मुख्य सचिव की रिपोर्ट में नदियों के पानी की गुणवत्ता का डेटा, एसटीपी से निकलने वाले कीचड़ (Sludge) के प्रबंधन का डेटा और उपचारित पानी के पुन: उपयोग (Reuse) की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी।

हिमाचल सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को NGT के कड़े निर्देश

इस पारिस्थितिक संकट से निपटने के लिए एनजीटी ने राज्य की विभिन्न एजेंसियों को स्पष्ट जिम्मेदारी सौंपी है।

स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (SPCB) के लिए: बिना वैध सहमति के चल रहे सभी एसटीपी की पहचान की जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाले संयंत्रों से बकाया पर्यावरण मुआवजा (Environmental Compensation) वसूला जाए। लगातार पर्यावरण नियमों को ताक पर रखने वाले अधिकारियों और ऑपरेटरों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा (Prosecution) शुरू किया जाए।

शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) और सरकार के लिए: अस्थायी डंपिंग साइटों को तुरंत समाप्त किया जाए और पुराने कचरे (Legacy Waste) का वैज्ञानिक निस्तारण हो। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक व्यापक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना (Rural Solid Waste Management Plan) तैयार की जाए। सभी निकायों के लिए समयबद्ध सीवर कनेक्टिविटी योजना बनाई जाए और उपचारित पानी के रियूज को बढ़ावा दिया जाए। कचरे को खुले में फेंकने और जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, साथ ही जनता के लिए शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal System) स्थापित की जाए।

विधिक फैक्ट शीट: एनजीटी बनाम हिमाचल प्रदेश कचरा प्रबंधन वाद (2026)

कानूनी और पर्यावरणीय श्रेणियांएनजीटी की विधिक स्थिति और वर्तमान आधिकारिक आंकड़े
संबंधित न्यायिक संस्थानेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), नई दिल्ली
पीठ के विधिक सदस्यजस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष), ए. सेंथिल वेल, अफरोज अहमद
राज्य में कुल वेस्ट हॉटस्पॉट295 (अकेले शिमला नगर निगम में 28 हॉटस्पॉट)
सीवेज उपचार की स्थिति159.117 MLD कुल सीवेज; 44.5% बिना उपचार के विसर्जित
स्थानीय निकायों की खामी30 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में शून्य घरेलू सीवर लिंक
अगली अदालती तारीखनई व्यापक प्रगति रिपोर्ट के साथ मामला 20 जनवरी 2027 को सूचीबद्ध

एनजीटी द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मुकदमा चलाने (Prosecution) की छूट देना यह साफ करता है कि अब ढीली कार्रवाई का समय निकल चुका है। राज्य सरकार को जनवरी 2027 में अगली सुनवाई से पहले इन सभी 295 हॉटस्पॉट्स और सीवेज लीकेज को दुरुस्त कर धरातल पर बदलाव दिखाना होगा।

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