District Child Protection Unit: कर्नाटक के हुब्बल्ली में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत एक ऐसा चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है।
एक ही परिवार की दो नाबालिग बच्चियों के साथ हुए यौन उत्पीड़न
एक ही परिवार की दो नाबालिग बच्चियों के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामलों की जांच के दौरान पता चला है कि एक 15 वर्षीय लड़की जिसने पिछले साल ही एक बच्चे को जन्म दिया था, वह एक बार फिर गर्भवती पाई गई है। इस घटना ने सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हुब्बल्ली-धारवाड़ पुलिस आयुक्तालय के ओल्ड हुब्बल्ली थाना क्षेत्र में यह मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस पूरे नेक्सस और बच्चियों के परिवारों की भूमिका की गहन जांच शुरू कर दी है।
घटनाक्रम: एक ही साल में दो बार यौन उत्पीड़न और नवजात का रहस्य
धारवाड़ जिला बाल संरक्षण इकाई (District Child Protection Unit) के एक अधिकारी की शिकायत के बाद यह पूरा मामला उजागर हुआ।
पहला अपराध (2025): शिकायत के अनुसार, आरोपी ने वर्ष 2025 में इस 15 वर्षीय लड़की को रेलवे स्टेशन के पास एक सुनसान जगह पर ले जाकर जबरन उसका यौन उत्पीड़न किया था। इस घटना के बाद वह गर्भवती हो गई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया।
नवजात शिशु का रहस्य: शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लड़की के माता-पिता ने जन्म के बाद उस नवजात शिशु को किसी अज्ञात व्यक्ति को सौंप दिया। हालांकि, परिवार का दावा है कि बच्चा बीमार है और कारवार में रिश्तेदारों के पास उसका इलाज चल रहा है। पुलिस इस दावे की सत्यता की जांच कर रही है।
दूसरा अपराध (मई 2026): आरोप है कि इसी साल मई में उसी आरोपी ने पीड़िता का दोबारा यौन उत्पीड़न किया, जिसके कारण वह एक साल के भीतर दूसरी बार गर्भवती हो गई।
एक ही परिवार की दो मासूम बच्चियां शिकार: कमिश्नर का बयान
हुब्बल्ली-धारवाड़ के पुलिस कमिश्नर एन. शशी कुमार ने मीडिया को संबोधित करते हुए मामले की जटिलताओं को स्पष्ट किया।
पारिवारिक संबंध: कमिश्नर ने बताया कि यह मामला तब प्रकाश में आया जब पुलिस हाल ही में दर्ज एक अन्य पॉक्सो (POCSO) मामले की जांच कर रही थी, जिसमें एक साढ़े 14 वर्षीय लड़की पीड़िता थी।
रिश्ते का खुलासा: जांच में सामने आया कि दोनों पीड़ित बच्चियां आपस में ममेरी-चचेरी बहनें हैं (दो सगी बहनों की बेटियां हैं)। कमिश्नर ने कहा, यह पूरी तरह से पॉक्सो का स्पष्ट मामला है और सारा घटनाक्रम एक ही परिवार के भीतर का है।
बच्चियों की स्थिति: दोनों बच्चियों को फिलहाल चिकित्सीय देखरेख (Medical Observation) में रखा गया है और वे खतरे से बाहर हैं। अत्यधिक मानसिक आघात के कारण वे अभी कोई भी बयान देने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए पुलिस उन्हें स्वास्थ्य के मोर्चे पर उबरने का समय दे रही है।
पुलिस की विधिक कार्रवाई और आगामी जांच के बिंदु
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने एक व्यापक और विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
परिजनों को नोटिस: पुलिस ने दोनों बच्चियों के परिवार के सदस्यों को आधिकारिक नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इतनी बड़ी वारदातें परिवार की नाक के नीचे कैसे होती रहीं।
शिशु की तलाश: कारवार में इलाज करा रहे पहले बच्चे की स्थिति की पुष्टि के लिए एक पुलिस टीम विधिक सत्यापन कर रही है ताकि बच्चा चोरी या अवैध रूप से बच्चा गोद देने (Illegal Adoption) के कोण की भी जांच की जा सके।
आरोपी की तलाश: पुलिस आरोपी के खिलाफ सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।
विधिक फैक्ट शीट: हुब्बल्ली नाबालिग द्वितीय गर्भावस्था पॉक्सो वाद (2026)
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | पुलिस जांच की विधिक स्थिति और आधिकारिक विवरण |
| संबंधित क्षेत्राधिकार | ओल्ड हुब्बल्ली थाना, हुब्बल्ली-धारवाड़ पुलिस कमिश्नरेट |
| मुख्य विधिक प्राधिकारी | एन. शशी कुमार (पुलिस कमिश्नर, हुब्बल्ली-धारवाड़) |
| लागू कानूनी अधिनियम | यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम |
| पीड़ितों का विवरण | एक 15 वर्षीय नाबालिग (दोबारा गर्भवती) और उसकी साढ़े 14 वर्षीय बहन |
| अपराध का कालक्रम | प्रथम प्रताड़ना: 2025 (शिशु जन्म) | द्वितीय प्रताड़ना: मई 2026 |
| जांच का मुख्य दायरा | बार-बार यौन उत्पीड़न, परिजनों की भूमिका और पहले बच्चे की कस्टडी का विधिक सत्यापन |
पुलिस कमिश्नर द्वारा ‘व्यापक जांच’ की बात कहना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस मामले में केवल आरोपी ही नहीं, बल्कि अपराध को छिपाने या बच्चे को संदिग्ध रूप से गायब करने के मामले में परिवार की विधिक जवाबदेही भी तय होनी अनिवार्य है।

