Tuesday, September 8, 2026
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New Tax Regime: नए टैक्स रिजीम में भत्तों पर छूट से इनकार असंवैधानिक…जानिए जज ने आयकर विभाग के मेमोरेंडम को क्यों दी चुनौती

New Tax Regime: इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक सेवारत न्यायाधीश की ओर से आयकर विभाग के एक कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) को चुनौती देने के बाद यह बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विधिक विवाद सामने आया है।

मकान भत्ता और सत्कार भत्ते को टैक्स छूट मिलने का मामला

हाईकोर्ट के जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरुपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने इस याचिका पर केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इसमें सवाल उठाया गया कि क्या नए आयकर शासन (New Tax Regime) को चुनने पर हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को उनके वैधानिक अधिनियम के तहत मिलने वाले सत्कार भत्ते (Sumptuary Allowance) और मकान किराया भत्ते (HRA) पर मिलने वाली टैक्स छूट को छीना जा सकता है? इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को तय की गई है।

मामला क्या है?: ₹9 लाख से अधिक का टैक्स रिफंड/छूट का दावा खारिज

यह याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश जस्टिस संदीप जैन द्वारा दाखिल की गई है।

विवादित आदेश (OM): याचिका में आयकर विभाग द्वारा सितंबर 2025 में जारी उस कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) को चुनौती दी गई है, जिसके तहत नया टैक्स रिजीम चुनने वाले न्यायाधीशों को उनके वैधानिक भत्तों पर टैक्स छूट देने से मना कर दिया गया था।

अधिकार का दावा: जस्टिस जैन ने अपने वेतन के हिस्से के रूप में प्राप्त ‘सत्कार भत्ते’ (Sumptuary Allowance) और ‘मकान किराया भत्ते’ (HRA) पर हाई कोर्ट जज (वेतन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1954 की धारा 22D के तहत मिलने वाली वैधानिक छूट का दावा किया था।

आयकर विभाग का इनकार: आयकर अधिकारियों ने नए टैक्स रिजीम का हवाला देते हुए जज के ₹9 लाख से अधिक के टैक्स छूट दावे को खारिज कर दिया था।

याचिकाकर्ता के विधिक तर्क: मूल अधिनियम के प्रावधानों को सर्कुलर से निरस्त नहीं किया जा सकता

याचिकाकर्ता न्यायाधीश की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता निपुण सिंह और अधिवक्ता नमन अग्रवाल ने अदालत के समक्ष निम्नलिखित मुख्य विधिक बिंदु रखे।

प्राथमिक रूप से मनमाना और अवैध (Arbitrary & Unlawful): याचिका में तर्क दिया गया है कि आयकर विभाग का यह ऑफिस मेमोरेंडम पूरी तरह से मनमाना, अन्यायपूर्ण और गैर-कानूनी है।

संसदीय अधिनियम का उल्लंघन: हाई कोर्ट जज अधिनियम, 1954 एक विशेष संसदीय अधिनियम (Special Parliamentary Act) है जो न्यायाधीशों की सेवा शर्तों और भत्तों को सुरक्षा प्रदान करता है। आयकर विभाग का एक प्रशासनिक ज्ञापन (OM) किसी वैधानिक अधिनियम (Statutory Act) द्वारा दिए गए अधिकारों और छूटों को रद्द नहीं कर सकता।

राहत की मांग: याचिका में सितंबर 2025 के उस विवादित ऑफिस मेमोरेंडम को रद्द करने (Quash) और याचिकाकर्ता को उनके भत्तों पर आयकर छूट का दावा करने की अनुमति देने का निर्देश मांगा गया है।

विधिक फैक्ट शीट: इलाहाबाद हाई कोर्ट बनाम केंद्र सरकार/CBDT (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और वर्तमान विवरण
संबंधित न्यायालयइलाहाबाद उच्च न्यायालय (Division Bench), प्रयागराज
सुनवाई करने वाली पीठजस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरुपमा चतुर्वेदी
याचिकाकर्ताजस्टिस संदीप जैन (मौजूदा जज, इलाहाबाद हाई कोर्ट)
प्रतिवादी पक्षकेंद्र सरकार (Union of India) एवं केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT)
याचिकाकर्ता के वकीलवरिष्ठ अधिवक्ता निपुण सिंह एवं अधिवक्ता नमन अग्रवाल
संबंधित मूल अधिनियमधारा 22D, हाई कोर्ट जज (वेतन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1954
अगली सुनवाई की तिथि28 जुलाई 2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट का आने वाला फैसला न केवल न्यायपालिका के सदस्यों के लिए, बल्कि विशेष अधिनियमों के तहत संरक्षित अन्य वैधानिक संस्थाओं के लिए भी नए टैक्स रिजीम में टैक्स छूट की स्थिति को स्पष्ट करेगा।

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