Tuesday, October 27, 2026
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Provisional Enrollment: CoP और AIBE योग्यता के बिना वकालत करने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का BCI से क्यों उठाए सवाल, जानिए

Provisional Enrollment: प्रोविजनल एनरोलमेंट की 2 साल की अवधि समाप्त होने के बावजूद बिना सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (CoP) और ऑल इंडिया बार परीक्षा (AIBE) पास किए अदालत में पेश होने वाले वकीलों को लेकर BCI से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने पूछा है कि क्या कोई वकील केवल तब वकालत से प्रतिबंधित माना जाएगा जब BCI की नियमावली के तहत उसका नाम “गैर-अभ्यासकर्ता वकीलों” (Non-Practicing Advocates) की सूची में आधिकारिक रूप से प्रकाशित किया जाएगा?

मामला क्या था?: प्रोविजनल एनरोलमेंट खत्म होने के बाद कोर्ट में पेशी

मूल मामला: यह मामला एक जमानत याचिका (Yogendra v. State of UP) की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील का उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के साथ 2 साल का प्रोविजनल पंजीकरण समाप्त हो चुका था और उनके पास CoP नहीं था।

अदालत की अंतरिम राहत: हालांकि, जब वकील ने बताया कि उनके AIBE परीक्षा के परिणाम का इंतजार है, तो अदालत ने उन्हें उस मामले में पेश होने की अनुमति दे दी। लेकिन साथ ही कोर्ट ने इस कानूनी स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए।

BCI का रुख बनाम हाई कोर्ट का सवाल

BCI का पक्ष

BCI के वकील साईं गिरिधर ने कोर्ट को सूचित किया कि वर्ष 2017 के प्रस्ताव और All India Bar Examination Rules, 2010 के नियम 9 के तहत, 2009-10 शैक्षणिक सत्र के बाद पंजीकृत हुए लॉ स्नातकों का प्रोविजनल एनरोलमेंट 2 साल के भीतर AIBE पास न करने पर स्वतः (Automatically) समाप्त हो जाता है। CoP (Certificate of Practice) नंबर न होने की स्थिति में ऐसे व्यक्ति को किसी भी अदालत में वकालत करने का अधिकार नहीं रहता।

हाई कोर्ट का तकनीकी पेंच (Rule 5 vs Rule 20.4)

जस्टिस देशवाल ने BCI के नियमों के विरोधाभास को रेखांकित करते हुए कहा, BCI के Certificate and Place of Practice (Verification) Rules, 2015 के नियम 5 के अनुसार कानूनी प्रैक्टिस के लिए CoP होना अनिवार्य है। परंतु, इसी नियमावली के नियम 20.4 के तहत वकालत पर यह अयोग्यता (Disability) केवल तभी लागू होती है, जब ऐसे अधिवक्ताओं का नाम “Non-Practicing Advocates” की आधिकारिक सूची में प्रकाशित कर दिया गया हो।

अदालत का मुख्य सवाल: जब तक BCI या स्टेट बार काउंसिल किसी वकील का नाम ‘गैर-अभ्यासकर्ता’ की सूची में सार्वजनिक रूप से प्रकाशित नहीं करती, तब तक क्या प्रोविजनल अवधि बीतने के बाद भी वह अदालत में वकालत करने से पूरी तरह प्रतिबंधित माना जाएगा? BCI के वकील ने इस तकनीकी बिंदु पर निर्देश (Instructions) प्राप्त करने के लिए समय मांगा है। अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई 31 जुलाई 2026 को करेगी।

केस मैट्रिक्स: Yogendra v. State of UP & Ors.

विधिक बिंदुविवरण / अदालत का रुख
संबंधित अदालतइलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल
मुख्य कानूनी मुद्दाAIBE और CoP के बिना 2 साल बाद वकालत जारी रखने की वैधानिकता।
BCI का पक्ष2 साल में AIBE पास न करने पर प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है।
हाई कोर्ट की आपत्तिनियम 20.4 के तहत ‘Non-Practicing Advocates’ की सूची जारी हुए बिना क्या वकालत पर पूर्ण रोक संभव है?
अगली सुनवाई तिथि31 जुलाई
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