Hit-and-Run: केरल हाईकोर्ट ने कहा, हिट-एंड-रन दुर्घटनाओं में अक्सर अपराधियों और वाहनों के फरार हो जाने तथा समय पर पकड़े न जाने के कारण मामले अनसुलझे रह जाते हैं।
राज्य पुलिस प्रमुख (DGP) को निर्देश
हाईकोर्ट के जस्टिस जी. गिरीश की एकल पीठ ने पीड़ितों और मृतक के परिवारों द्वारा दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक निर्देश जारी किया। अदालत ने इस गंभीर समस्या पर कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य पुलिस प्रमुख (DGP) को निर्देश दिया है कि राज्य के प्रत्येक जिले में विशेष दस्तों (Special Squads) का गठन किया जाए, जो ऐसे मामलों में अपराधियों और वाहनों की तत्काल तलाश व गिरफ्तारी सुनिश्चित करेंगे।
हाई कोर्ट के प्रमुख निर्देश और तंत्र में सुधार
विशेष दस्तों का गठन और तकनीक का प्राथमिकता से उपयोग
- अदालत ने स्पष्ट किया कि हिट-एंड-रन मामलों की प्रभावी जांच के लिए संपूर्ण पुलिस बल और तकनीक का त्वरित तालमेल आवश्यक है।
- साइबर पुलिस को प्राथमिकता: केरल पुलिस की साइबर विंग को निर्देश दिया गया है कि वे इन विशेष जांच दस्तों से प्राप्त अनुरोधों और संचार को सर्वोच्च प्राथमिकता (Top Priority) दें।
- सार्वजनिक संपर्क विवरण: इन दस्तों के संपर्क नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि प्रत्यक्षदर्शी (Eye-witnesses) दुर्घटना की जानकारी तुरंत साझा कर सकें।
- अलर्ट सिस्टम: किसी भी पुलिसकर्मी को हिट-एंड-रन की सूचना मिलते ही वह तुरंत विशेष दस्ते को सतर्क करेगा और सहायता प्रदान करेगा।
मामलों की जांच ट्रांसफर
तिरुवनंतपुरम और एर्नाकुलम जिलों में हुई दुर्घटनाओं से संबंधित इन तीनों मामलों की जांच कोर्ट ने स्थानीय पुलिस से हटाकर जिला अपराध शाखा (District Crime Branch) को सौंप दी है, जिसका नेतृत्व डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DySP) रैंक से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा।
केंद्र सरकार को सलाह: मुआवजा योजना में तत्काल संशोधन की मांग
अदालत ने कहा कि जब अपराधी पकड़ा नहीं जाता, तो गंभीर रूप से घायल पीड़ितों या उनके परिवारों को कोई सार्थक मुआवजा नहीं मिल पाता। कोर्ट ने केंद्र सरकार की ‘Compensation to Victims of Hit and Run Motor Accidents Scheme, 2022’ की सुस्ती पर निराशा जताई।
केंद्र सरकार पर हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार अपनी नींद से जागे और ऐसे उचित कदम उठाए, जो उन सैकड़ों हिट-एंड-रन पीड़ितों को राहत दे सकें, जो बिना किसी गलती के केवल इसलिए मुआवजे से वंचित रह जाते हैं क्योंकि टक्कर मारने वाले वाहन का पता नहीं चल पाता।
विदेशी मॉडल और वैधानिक कोष का सुझाव
ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड का मॉडल: कोर्ट ने सुझाव दिया कि भारत को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे देशों के वैधानिक मॉडल का अध्ययन करना चाहिए, जहाँ अज्ञात या बिना बीमा वाले वाहनों से हुई दुर्घटनाओं के पीड़ितों को सरकारी प्राधिकरण द्वारा मुआवजा दिया जाता है।
समर्पित मुआवजा कोष (Dedicated Fund): ऐसे पीड़ितों के लिए एक समर्पित कोष बनाया जा सकता है, जिसे ट्रैफ़िक चालान, वाहन पंजीकरण शुल्क, परमिट फ़ीस या बीमा प्रीमियम के एक छोटे हिस्से से वित्तपोषित (Funded) किया जा सकता है।
केस मैट्रिक्स: Geetha v. State Police Chief of Kerala & Ors.
| विधिक/प्रक्रियात्मक पहलू | विवरण |
| संबंधित अदालत | केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस जी. गिरीश |
| मुख्य पक्षकार | गीता बनाम केरल राज्य पुलिस प्रमुख व अन्य |
| याचिकाकर्ताओं के वकील | एम.आर. सरीन, विवेक वेणुगोपाल, संतोष पीटर, पी.एन. अनूप, एम.एस. संदीप सुधाकरन, नदीम नज़र, निस्सी वी. राजेश |
| राज्य (अभियोजन) के वकील | लोक अभियोजक (Public Prosecutor) समीर एस. |
| अदालत का फैसला | हर जिले में स्पेशल स्क्वाड का गठन, साइबर पुलिस को प्राथमिकता, 3 मामलों की जांच DySP रैंक के अधिकारी को ट्रांसफर। |

