PIL on Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के प्रबंधन, टीकाकरण और नसबंदी को लेकर स्वत: संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका (Suo Motu PIL) दर्ज की है।
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम (MCD) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को नोटिस जारी किया है।
मामला क्या है?: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और हाई कोर्ट की निगरानी
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: 19 मई के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया था कि वे अपने-अपने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आवारा कुत्तों के प्रबंधन, नसबंदी, टीकाकरण और सार्वजनिक स्थानों (स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि) से हटाने से जुड़े आदेशों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए स्वत: संज्ञान याचिकाएं दर्ज करें।
मुख्य सचिवों की जवाबदेही: सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों (Chief Secretaries) को अनुपालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है।
हाई कोर्ट में स्थिति रिपोर्ट: दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार और MCD को 31 जुलाई तक उठाए गए कदमों पर एक व्यापक रिपोर्ट (Comprehensive Status Report) पेश करने का आदेश दिया है।
हाई कोर्ट की मौखिक टिप्पणियां: हाई कोर्ट परिसर में ही ढेरों कुत्ते हैं
सुनवाई के दौरान जब दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि अधिकारी इस दिशा में काम कर रहे हैं, तो पीठ ने शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी पर चिंता जताई।
अदालत की मुख्य अवलोकन: “बहुत सारे आवारा कुत्ते घूम रहे हैं… हर कोई काम तो कर रहा है, लेकिन हाई कोर्ट परिसर में भी कई कुत्ते पट्टे (Collar) पहने घूमते हैं। क्या वे ट्रेंड कुत्ते हैं? क्या हाई कोर्ट उनका मालिक है? S-ब्लॉक जाने पर कई कुत्ते मिलते हैं। क्या वे पालतू हैं? वे देसी कुत्ते हैं।
डॉग लवर्स और डॉग हेटर्स के बीच हमेशा विवाद रहता है। हमें दोनों के बीच एक संतुलन (Balance) बनाना होगा। आम आदमी वाकई बहुत परेशान है। रोजाना कुत्ता काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं, और बंदरों का आतंक तो इससे भी ज्यादा गंभीर है।
मुख्य दिशा-निर्देश जिन पर निगरानी रखी जाएगी
सार्वजनिक स्थानों से हटाना: शैक्षिक संस्थानों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों से आवारा कुत्तों को हटाना और नसबंदी/टीकाकरण के बाद उन्हें दोबारा उन्हीं परिसरों में न छोड़ना।
संस्थानों की बाड़बंदी (Fencing): सरकारी और निजी शैक्षणिक व स्वास्थ्य संस्थानों के आसपास बाड़ लगाना।
शेल्टर होम और नसबंदी: शहर में बनाए गए डॉग शेल्टर (Dog Shelters/Pounds) की संख्या और एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों का पालन।
अवमानना कार्रवाई की शक्ति: हाई कोर्ट के पास आदेशों का पालन न करने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना (Contempt Proceedings) शुरू करने का पूरा अधिकार है।
सुनवाई की अगली तारीख
अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को तय की गई है।
रिपोर्ट दाखिल करने की समयसीमा: MCD और दिल्ली सरकार को 31 जुलाई तक की अनुपालन रिपोर्ट अगली सुनवाई से एक दिन पहले अदालत में जमा करनी होगी।
केस मैट्रिक्स: Delhi HC Suo Motu PIL on Stray Dogs
| प्रक्रियात्मक और विधिक पहलू | विवरण / अदालत का फैसला |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| माननीय पीठ | जस्टिस दिनेश मेहता एवं जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता |
| प्रकृति | स्वत: संज्ञान जनहित याचिका (Suo Motu PIL) |
| प्रतिवादी पक्ष | केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, MCD एवं NHAI |
| प्रमुख मुद्दा | आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण, डॉग शेल्टर का निर्माण और आवारा पशुओं द्वारा काटे जाने की घटनाओं पर नियंत्रण। |
| अगली तारीख | 3 अगस्त (रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तिथि: 31 जुलाई) |

