Pavement Dwellers: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, फुटपाथ या पटरियों पर सो रहे बेघर लोगों को यदि कोई तेज रफ्तार वाहन कुचल देता है, तो पीड़ितों को दुर्घटना के लिए जिम्मेदार (Contributory Negligence) नहीं ठहराया जा सकता।
हाईकोर्ट के जस्टिस अनीश दयाल की पीठ ने स्पष्ट किया कि फुटपाथ पैदल यात्रियों और फुटपाथ उपयोगकर्ताओं के लिए होते हैं, न कि गाड़ियों के चलाने के लिए। अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के उस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें फुटपाथ पर सो रहे पीड़ितों को 50% जिम्मेदार मानकर उनका मुआवजा आधा कर दिया गया था।
मामला क्या था?: मादीपुर मेट्रो स्टेशन के पास 2015 का हादसा
घटना: साल 2015 में मादीपुर मेट्रो स्टेशन के नीचे फुटपाथ पर सो रहे बेघर मजदूरों/मजदूरी करने वाले लोगों पर एक तेज रफ्तार ट्रक चढ़ गया था। इस दर्दनाक हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।
MACT का 2017 का आदेश: मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि फुटपाथ सोने के लिए नहीं होते हैं, इसलिए पीड़ितों ने भी दुर्घटना को आमंत्रित किया। MACT ने पीड़ितों को 50% “योगदायी लापरवाही” (Contributory Negligence) का दोषी माना और मुआवजा आधा कर दिया।
हाई कोर्ट में अपील: पीड़ितों और मृतकों के परिजनों ने MACT के इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में चार अलग-अलग अपीलें दाखिल की थीं।
दिल्ली हाई कोर्ट की मुख्य विधिक टिप्पणियां
“ट्रक चालक को फुटपाथ पर गाड़ी चलाने का अधिकार किसने दिया?”
हाई कोर्ट ने MACT के तर्क पर हैरानी जताते हुए कहा कि अधिकरण को यह सवाल पूछना चाहिए था कि क्या ड्राइवर के पास पैदल चालकों के लिए आरक्षित जगह पर ट्रक चलाने का कोई अधिकार था।
जस्टिस अनीश दयाल की मुख्य टिप्पणी: “इस देश की यह कड़वी सच्चाई है कि कई लोग बेघर हैं, रात भर काम करते हैं या निर्माण स्थलों पर तैनात मजदूर हैं और उनके पास सोने की कोई जगह नहीं होती। ऐसे लोगों के लिए ये फुटपाथ ही विश्राम करने की अपेक्षाकृत सुरक्षित जगह बन जाते हैं। वे यह उम्मीद नहीं करते कि कोई वाहन फुटपाथ पर चढ़कर उन्हें कुचल देगा। मजबूरी में फुटपाथ पर सोने के इस जोखिम को ‘योगदायी लापरवाही’ में तब्दील नहीं किया जा सकता।”
फुटपाथ का कानूनी उद्देश्य
कोर्ट ने कहा कि फुटपाथ का एकमात्र उद्देश्य पैदल चलने वालों को वाहनों के खतरे से सुरक्षित रास्ता देना है। कानून फुटपाथों का किसी भी अन्य उद्देश्य (चाहे अनधिकृत अतिक्रमण हो, वाहन पार्किंग हो, या उन पर गाड़ी चलाना हो) के लिए इस्तेमाल की इजाजत नहीं देता। पूरी जिम्मेदारी उस ड्राइवर की है जिसने पैदल चलने वालों के लिए आरक्षित स्थान में वाहन घुसा दिया।
हाई कोर्ट का अंतिम आदेश
- 50% कटौती का फैसला रद्द: हाई कोर्ट ने MACT के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें पीड़ितों का 50% मुआवजा काटा गया था।
- पूरा और बढ़ा हुआ मुआवजा: कोर्ट ने पीड़ितों और मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे की राशि बढ़ा दी।
- बीमा कंपनी को निर्देश: इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया गया कि वह बढ़ी हुई राशि (ब्याज सहित) 6 सप्ताह के भीतर MACT के पास जमा कराए।
केस मैट्रिक्स: Delhi HC on Contributory Negligence of Pavement Dwellers
| प्रक्रियात्मक और विधिक पहलू | विवरण / अदालत का फैसला |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस अनीश दयाल (Justice Anish Dayal) |
| केस का नाम | दिगंबर कुमार बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड व अन्य |
| मुख्य कानूनी प्रश्न | क्या फुटपाथ पर सो रहे व्यक्ति को वाहन से कुचले जाने पर 50% योगदायी लापरवाही (Contributory Negligence) का दोषी माना जा सकता है? |
| अदालत का निर्णय | नहीं; पूरी गलती गाड़ी चलाने वाले की है। मुआवजे में की गई 50% की कटौती रद्द। |

