केस मैट्रिक्स: SC Intervention on CJP Protest Violence & Police Protection
| पहलू | विवरण |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| माननीय पीठ | मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ |
| याचिकाकर्ता | घायल पुलिस अधिकारियों (ACP कैलाश सिंह बिष्ट व अन्य) के परिवारजन |
| मुख्य कानूनी तर्क | शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हिंसा या ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों पर हमले की इजाजत नहीं देता। |
| मांगी गई राहत | हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई, पुलिसकर्मियों को Art 14 & 21 के तहत सुरक्षा, और पैन-इंडिया SOPs। |
CJP Protest Violence: दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध प्रदर्शन और ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा में घायल हुए चार पुलिसकर्मियों के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका (Intervention Application) दायर की है।
यह याचिका एओआर वेंकट राघवामसी डी (Venkata Raghuvamsy D) के माध्यम से दायर की गई है। याचिकाकर्ता एसीपी कैलाश सिंह बिष्ट, एएसआई संदीप, कांस्टेबल धीरज और एएसआई हेमेंदर राठी के परिवारजन हैं। याचिका में पुलिस बल पर हमला करने वालों की जवाबदेही तय करने और ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांगें
- जवाबदेही तय हो: विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों पर पथराव, कांच की बोतलें और नुकीली टाइलें फेंककर हमला करने वालों और हिंसा भड़काने वालों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- अनुच्छेद 14 और 21 के तहत सुरक्षा: न्यायालय से यह घोषित करने का अनुरोध किया गया है कि ऑन-ड्यूटी पुलिस और कानून प्रवर्तन कर्मियों को भी संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत समान सुरक्षा का अधिकार है।
- सुरक्षा दिशानिर्देश: केंद्र सरकार को कर्तव्य पालन के दौरान वर्दीधारी महिला व पुरुष कर्मियों पर होने वाले हमलों से बचाने के लिए पूरे देश के लिए सुरक्षा दिशानिर्देश (Guidelines) तैयार करने का निर्देश दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट (CJI सूर्यकांत) का रुख: विरोध का अधिकार है, पर हिंसा या अत्यधिक बल प्रयोग स्वीकार्य नहीं
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने छात्रों पर कथित पुलिस बर्बरता और पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणी की। सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य टिप्पणी: “संविधान के तहत शांतिपूर्ण और वैध विरोध का अधिकार पूरी तरह से संरक्षित है। जब तक विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण है, तब केवल आंदोलन होने के आधार पर लाठीचार्ज या अत्यधिक बल प्रयोग नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र में आत्म-अनुशासन (Self-Discipline) अनिवार्य है। यदि पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग किया गया है या किसी उपद्रवी तत्व ने हिंसा की है, तो दोनों पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। प्रदर्शनों से निपटने के लिए एक अखिल भारतीय प्रोटोकॉल/दिशानिर्देश (Uniform Protocol) की आवश्यकता है।”
CJP प्रदर्शन की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
- प्रदर्शन का कारण: नीट (NEET) पेपर लीक और परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) पिछले 36 दिनों से आंदोलन कर रही थी।
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था।
- समझौता व आंदोलन की समाप्ति: केंद्र सरकार द्वारा अन्य प्रमुख मांगों (मृत छात्रों के परिजनों को मुआवजा, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर की वापसी) को स्वीकार करने के बाद CJP ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की।

