केस मैट्रिक्स: Allahabad HC Order on Lawyer-Police Nexus & IB Inquiry
| पहलू | विवरण |
| संबंधित अदालत | इलाहाबाद उच्च न्यायालय (लखनऊ पीठ) |
| माननीय पीठ | जस्टिस राजन रॉय एवं जस्टिस मंजीव शुक्ला |
| जांच एजेंसी | इंटेलिजेंस ब्यूरो (Intelligence Bureau – IB) |
| आरोपी वकील | सौरभ कुमार वर्मा, हर्षित पांडे, यश पांडे और अभय प्रताप वर्मा |
| मुख्य बिंदु | 1. IB गुप्त जांच करेगी। 2. 10 साल का ITR और संपत्ति ब्योरा तलब। 3. जिला कोर्ट में प्रवेश प्रतिबंधित। 4. वकील-पुलिस-भूमाफिया सांठगांठ पर नकेल। |
Lawyer-Police Nexus: लखनऊ जिला अदालत परिसर में मुकदमों की सुनवाई के दौरान वकीलों द्वारा गुंडागर्दी करने, साथी वकीलों (जिनमें दो महिला वकील शामिल हैं) को परेशान करने और मुवक्किल की पिटाई करने के गंभीर मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय (लखनऊ पीठ) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
अदालत ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को चारों आरोपी वकीलों की गतिविधियों और आपराधिक इतिहास की गुप्त जांच (Discreet Inquiry) करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक चारों वकीलों के जिला अदालत परिसर में प्रवेश करने पर रोक लगा दी है।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट का कड़ा रुख: “कड़े शब्दों का समय अब बीत चुका है, क्योंकि इनका कोई वांछित प्रभाव नहीं पड़ा है। अब पुलिस और उन सभी हितधारकों के लिए कार्रवाई का समय है जो इस स्थिति को सुधार सकते हैं। वकील-पुलिस और अन्य शक्तिशाली लोगों के बीच के इस सांठगांठ को कैसे तोड़ा जाए और न्यायिक कार्यवाही में विश्वास कैसे बहाल किया जाए—यह हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल और कठिन कार्य है।”
मामला क्या था?: कोर्ट परिसर में मारपीट, अवैध हिरासत और बंदूक से फंसाने की कोशिश
यह मामला लखनऊ जिला अदालत का है, जहां एक संपत्ति विवाद से जुड़े दीवानी मुकदमे (Civil Suit) में पैरवी कर रहे मुवक्किल मोहम्मद शाकिर और उनकी पैरवी कर रही महिला वकीलों (अभिप्सा मोहंती और कोमल अग्रवाल) तथा अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव को आरोपी वकीलों ने कोर्ट में उपस्थित होने से रोका।
मुख्य आरोप
- गुंडागर्दी और पिटाई: सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ के जूनियर उपाध्यक्ष सौरभ कुमार वर्मा और उनके सहयोगियों (हर्षित पांडे, यश पांडे और अभय प्रताप वर्मा) ने मुवक्किल की जमकर पिटाई की।
- अवैध हिरासत: पिटाई के बाद मुवक्किल को बार एसोसिएशन के दफ्तर में अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया और बाद में वजीरगंज थाने ले जाया गया।
- झूठे केस में फंसाने की साजिश: आरोप था कि आरोपी वकील बंदूक लेकर आए थे और अपने साथी से मुवक्किल के हाथ में पिस्टल पकड़ाकर उसे झूठे केस में फंसाने की योजना बना रहे थे (हालांकि सीसीटीवी फुटेज और पुलिस रिपोर्ट में बंदूक चलाने के सबूत नहीं मिले हैं)।
इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा जारी 5 मुख्य निर्देश
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) जांच
कोर्ट ने भारत सरकार के लखनऊ स्थित आईबी कार्यालय (जिसके प्रमुख संयुक्त निदेशक/Joint Director रैंक के अधिकारी हैं) को चारों वकीलों के पूर्ववृत्त (Antecedents) और गतिविधियों की गोपनीय जांच कर सील बंद लिफाफे (Sealed Cover) में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया।
कोर्ट में प्रवेश पर रोक
आरोपी चारों अधिवक्ताओं—सौरभ कुमार वर्मा, हर्षित पांडे, यश पांडे और अभय प्रताप वर्मा—के लखनऊ जिला अदालत परिसर में प्रवेश पर अगले आदेश तक पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
10 साल के ITR और संपत्ति का ब्योरा
कोर्ट ने चारों वकीलों को निर्देश दिया है कि वे पिछले 10 वर्षों का अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR), अपने व अपने परिजनों के नाम मौजूद संपत्तियों का पूरा ब्योरा और उन सभी दीवानी मुकदमों की सूची जमा करें जिनमें वे पक्षकार या वकील हैं। (यह आदेश उन आरोपों के बाद आया जिनमें कहा गया था कि लखनऊ में वकीलों का एक गिरोह अवैध तरीकों और संपत्ति कब्जे (Property Grabbing) से करोड़ों कमा रहा है)।
आपराधिक इतिहास की रिपोर्ट
अदालत ने पाया कि मुख्य आरोपी सौरभ कुमार वर्मा पर पहले से विभिन्न थानों में 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस कमिश्नर को इन सभी लंबित मुकदमों की स्थिति और अन्य सहयोगियों की पहचान कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
निष्पक्ष पुलिस जांच
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस बिना किसी डर या दबाव के इस मामले की जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाए। जांच में किसी भी तरह की हीला-हवाली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

