Sunday, September 13, 2026
HomeLatest NewsCJP Protest: सामान्य दुकानदार जुनैद मलिक ने आंदोलनकारियों को फ्री में कराया...

CJP Protest: सामान्य दुकानदार जुनैद मलिक ने आंदोलनकारियों को फ्री में कराया भोजन…अब सॉलिसिटर जनरल-प्रशांत भूषण के बीच क्यूं चली बहस

केस मैट्रिक्स: Supreme Court Hearing on Junaid Malik Intervention Plea

पहलूविवरण
संबंधित अदालतसर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
माननीय पीठCJI सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्या बागची एवं जस्टिस वी. मोहना
याचिकाकर्ताजुनैद मलिक (सामाजिक कार्यकर्ता व लॉ ग्रेजुएट)
याचिकाकर्ता के वकीलवरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण
केंद्र/पुलिस का प्रतिनिधित्वसॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता
मुख्य आरोपअवैध हिरासत, आंख पर पट्टी बांधकर मसूरी के जंगल में छोड़ना, पारिवारिक उत्पीड़न
उल्लेखित संवैधानिक अधिकारअनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन

CJP Protest: जंतर-मंतर पर फ्री भोजन-पानी देनेवाले सामान्य दुकानदार जुनैद मलिक की याचिका पर सॉलिसिटर जनरल-वरिष्ठ एडवोकेट प्रशांत भूषण के बीच जमकर बहस चली।

सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने जुनैद मलिक की तरफ से दायर की याचिका

दरअसल नीट-यूजी (NEET-UG 2026) पेपर लीक के खिलाफ चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के दौरान की व्यवस्था करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और लॉ ग्रेजुएट जुनैद मलिक की पुलिस प्रताड़ना, अवैध हिरासत और अपहरण के आरोपों वाली याचिका को लेकर सीनीयिर एडवोकेट प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने आए हैं। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता के कड़े विरोध के बावजूद मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस हस्तक्षेप याचिका (Intervention Application) को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में बहस: प्रशांत भूषण बनाम सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता

जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने याचिका का उल्लेख (Mentioning) किया, तो केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने इसका जोरदार खंडन किया।

  • एडवोकेट प्रशांत भूषण: “मैं जुनैद मलिक की ओर से पेश हो रहा हूं, जो प्रदर्शनकारियों को भोजन सप्लाई कर रहा था। पुलिस ने उसे उठाया, आंखों पर पट्टी बांधी, मसूरी ले गई और वहां हाईवे/जंगल के पास छोड़ दिया। उसके पूरे परिवार से पूछताछ की गई कि खाना सप्लाई करने का फंड कहां से आ रहा है। यह पुलिस की पूरी तरह से अवैध कार्रवाई है और इसकी जांच होनी चाहिए।”
  • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता: “मैं इस याचिका का कड़ा विरोध करता हूं… यह एक अलग मुद्दा है। वह कोई पीड़ित नहीं है।”
  • CJI सूर्यकांत का आदेश: “इन सभी मुद्दों पर एसआईटी (SIT) या गठित समिति के सामने विचार किया जा सकता है… याचिका को सूचीबद्ध किया जाएगा।”

याचिकाकर्ता जुनैद मलिक के गंभीर आरोप

जुनैद मलिक (37) जो 20 जून 2026 से लगातार 35 दिनों तक जंतर-मंतर पर छात्रों को भोजन और पानी बांट रहे थे, उन्होंने पुलिस द्वारा दी गई मानसिक व शारीरिक यातनाओं का ब्योरा याचिका में दिया है।

  1. आरएमएल अस्पताल के बाहर से अपहरण: 24 जुलाई 2026 की मध्यरात्रि को जब जुनैद और उनका दोस्त आरएमएल अस्पताल से लौट रहे थे, तो एक बिना नंबर वाली सफेद स्कॉर्पियो कार ने उनके ऑटो को रोका। 4-5 पुलिसकर्मियों ने जबरन उन्हें गाड़ी में डाला और आंखों पर पट्टी बांधकर अज्ञात स्थान पर ले गए।
  2. रात भर पूछताछ और धमकी: वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उनके मोबाइल जब्त कर लिए और रात भर उनसे इस बात को लेकर पूछताछ की कि जंतर-मंतर पर स्टॉल लगाने का पैसा कहां से आ रहा है। उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं।
  3. मसूरी के जंगलों में छोड़ा: 25 जुलाई की सुबह उन्हें आंखों पर पट्टी बांधकर 5-6 घंटे दूर देहरादून-मसूरी मार्ग पर एक सुनसान जंगल में (लगभग 16 किमी दूर) छोड़ दिया गया। पुलिसकर्मियों ने उन्हें पहाड़ों की तरफ मुंह करके खड़े होने को कहा और एक घंटे तक फोन बंद रखने की हिदायत देकर चले गए।
  4. परिवार का उत्पीड़न: 23 जुलाई को जुनैद के पिता को गाजियाबाद के मसूरी थाने में 6 घंटे तक बिठाकर रखा गया। डीएसपी (ग्रामीण), एएसपी और आईबी (IB) के अधिकारियों ने उनकी शादीशुदा बहन के ससुराल वालों से भी पूछताछ की।

सुप्रीम कोर्ट का मुख्य NEET मामले में अंतरिम आदेश

जुनैद मलिक की याचिका से पहले शीर्ष अदालत ने मुख्य NEET याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए निम्नलिखित अंतरिम निर्देश जारी किए।

  • बिना आपराधिक बैकग्राउंड वाले छात्रों पर कठोर कार्रवाई पर रोक: पुलिस को सख्त निर्देश दिए गए कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
  • हिरासत में लिए गए नाबालिगों की रिहाई: हिरासत में लिए गए सभी नाबालिगों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया गया।
  • डिजिटल साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखना: पुलिस बर्बरता से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड्स को संरक्षित करने का निर्देश दिया गया।
  • स्वतंत्र जांच (Independent Probe): कोर्ट ने प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और पुलिस की ज्यादतियों की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति/SIT बनाने का संकेत दिया।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
overcast clouds
30 ° C
30 °
30 °
79 %
3.6kmh
91 %
Sat
29 °
Sun
36 °
Mon
35 °
Tue
34 °
Wed
34 °

Recent Comments