Saturday, October 31, 2026
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Domestic Complaints: घर में डोसा या रागी मुद्दे(व्यंजन) बनाना या शैम्पू बदलने के लिए कहना आपराधिक क्रूरता के दायरे में नहीं आता, पढ़िए यह केस

केस मैट्रिक्स: Karnataka HC Observations on Section 498A / 85 BNS (Domestic Complaints)

पहलूविवरण
संबंधित अदालतकर्नाटक उच्च न्यायालय (High Court of Karnataka)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस एम. नागप्रसन्ना (Justice M Nagaprasanna)
संबंधित कानूनIPC धारा 498A (अब BNS धारा 85) & तलाक कानून
मुख्य बिंदुखाना पकाने, भोजन के समय या शैम्पू जैसी घरेलू बातों को 498A के तहत ‘क्रूरता’ नहीं माना जा सकता।
वर्तमान स्थितिसुनवाई पूरी; हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा (Verdict Reserved)।

Domestic Complaints: वैवाहिक विवादों में धारा 498A (अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 BNS) के दुरुपयोग और घरेलू शिकायतों को आपराधिक मामला बनाने की प्रवृत्ति पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

जस्टिस एम. नागप्रसन्ना (Justice M Nagaprasanna) की एकल पीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित (Reserved Verdict) रख लिया है। एक महिला द्वारा अपनी सास और ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज कराई गई आपराधिक शिकायत पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मौखिक टिप्पणी की कि घर में डोसा या रागी मुद्दे बनाने के लिए कहना, या शैम्पू बदलने के लिए कहना आपराधिक क्रूरता के दायरे में नहीं आता।

मामला क्या था?: शिकायतकर्ता के आरोप और हाई कोर्ट की प्रतिक्रिया

पति और सास-ससुर द्वारा प्रताड़ित किए जाने के आरोपों को लेकर दर्ज एफआईआर को रद्द (Quash) कराने के लिए सास और अन्य रिश्तेदारों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। शिकायतकर्ता महिला (जो पेशे से खुद एक वकील है) ने व्यक्तिगत रूप से (Party-in-Person) कोर्ट में उपस्थित होकर याचिका का विरोध किया।

महिला द्वारा लगाए गए प्रमुख आरोप

  • भोजन और पाक-कला से जुड़े आरोप: सास द्वारा पति के लिए गरम डोसा और रागी मुद्दे (कर्नाटक का पारंपरिक व्यंजन) बनाने का दबाव बनाना, खुद के लिए पौष्टिक भोजन न मिलना और रोज दाल-चावल-सोप्पू खाने पर मजबूर किया जाना।
  • पति के बाद खाना खाने का नियम: पति के नाश्ता खत्म करने (सुबह 10 बजे तक) के बाद ही खाना खाने की शर्त लगाना।
  • बाल झड़ने और शैम्पू का आरोप: ससुराल वालों के बर्ताव के कारण मानसिक तनाव से बाल झड़ना (Hair Loss) और पति द्वारा ‘मीरा’ (Meera) की जगह ‘डव’ (Dove) शैम्पू इस्तेमाल करने पर मजबूर करना।
  • अन्य आरोप: वेतन पति को सौंपना, सास द्वारा पति को अलग सुलाना और चरित्र पर लांछन लगाना।

कर्नाटक हाई कोर्ट (जस्टिस एम. नागप्रसन्ना) की मुख्य टिप्पणियां

अदालत ने शिकायत में लिखी गई बातों को पढ़ने के बाद पूछा कि क्या इन घरेलू बातों को दहेज उत्पीड़न या धारा 498A के तहत अपराध माना जा सकता है।

कर्नाटक हाई कोर्ट का वक्तव्य: *”आपके बाल झड़ना, आपसे डोसा या रागी मुद्दा बनाने को कहना, पौष्टिक भोजन न देना—क्या यह 498A के तहत क्रूरता या दहेज की मांग पर उत्पीड़न होगा? सास का अपने बेटे के लिए रागी मुद्दा बनाने को कहना गलत है? बाल झड़ना 498A है?

पति ने मुझे अपना शैम्पू मीरा से बदलकर डव करने पर मजबूर किया’—यह क्या है? ये छोटी-मोटी बातें अपराध नहीं बन सकतीं। ये सभी आरोप तलाक की कार्यवाही (Divorce Proceedings) में उठाए जा सकते हैं, लेकिन इन्हें आपराधिक क्रूरता के स्तर तक नहीं उठाया जा सकता। पारिवारिक मुद्दों के हर छोटे-मोटे झगड़े अपराध का विषय नहीं बन सकते।

मामले में कानूनी पक्ष

  1. पति के खिलाफ केस वापस: पति के वकील मनीष राव ने स्पष्ट किया कि मुख्य आरोपी (पति) के खिलाफ कार्यवाही पहले ही वापस ली जा चुकी है। वर्तमान याचिका केवल सास, दो चाचा और एक मित्र के खिलाफ दर्ज केस को रद्द करने के लिए है।
  2. दावों में अंतर: पीठ ने माना कि अगर वास्तव में कोई गंभीर प्रताड़ना हुई है तो उसे अदालत के सामने रखा जाना चाहिए, न कि परिवार के सामान्य आपसी मनमुटाव या छोटी-मोटी आदतों को आपराधिक मामले के रूप में पेश किया जाना चाहिए।

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