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मामले की पृष्ठभूमि: क्या है नई इंटर्नशिप नीति और विवाद?
- संशोधित नीति की शर्त:केरल हाईकोर्ट की नई इंटर्नशिप नीति के अनुसार, केवल वही छात्र उच्च न्यायालय में इंटर्नशिप कर सकते हैं जो अपने लॉ कोर्स के अंतिम दो वर्षों (Last Two Years) में पढ़ाई कर रहे हों।
- पास देने से इंकार:याचिकाकर्ता ऑस्टिन सनी ने 16 सितंबर 2026 को अपने अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं दी थीं और वह परीक्षा परिणाम व 6 सप्लीमेंट्री परीक्षाओं का इंतजार कर रहा था। उसने एक प्रसिद्ध लॉ फर्म (‘नीनन एंड मैथ्यू एडवोकेट्स’) में इंटर्नशिप शुरू की, लेकिन जब वह कोर्ट पास के लिए अधिकारियों के पास गया तो उसे यह कहकर मना कर दिया गया कि केवल वर्तमान में पढ़ाई कर रहे अंतिम वर्ष के छात्र ही पास के पात्र हैं। कॉलेज का प्रमाण पत्र देने के बाद भी उसे लिखित कारण दिए बिना पास देने से मना कर दिया गया।
- संवैधानिक अधिकारों का हवाला:छात्र ने नीति को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी और तर्क दिया कि परिणाम या एडवोकेट के रूप में नामांकन (Enrolment) का इंतजार कर रहे छात्रों को बाहर रखना व्यावहारिक कानूनी प्रशिक्षण के उद्देश्य को विफल करता है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 19 (व्यापार/पेशा करने का अधिकार) और 21 (जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन है।
अदालत के मुख्य निर्देश और आगामी रुख
1. छात्र को सशर्त अंतरिम राहत:
अदालत ने निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता छात्र यह पुष्टि करने वाला एक लिखित आश्वासन पत्र पेश करता है कि वह किसी अधिवक्ता के तहत इंटर्नशिप कर रहा है, तो हाईकोर्ट प्रशासन उसे नियमों का पालन कराने के अधीन अस्थायी प्रवेश पास (Temporary Entry Pass) जारी करेगा।
2. बार एसोसिएशन को पक्षकार बनाने का आदेश:
अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह ‘हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन’ (High Court Advocates’ Association) को इस याचिका में अतिरिक्त प्रतिवादी (Additional Respondent) के रूप में शामिल करे ताकि वकीलों का पक्ष भी सुना जा सके।
कोच्चि: भारत का संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता एवं मनमानेपन पर रोक), अनुच्छेद 19(1)(g) (विधिक पेशे की व्यावहारिक शिक्षा व प्रशिक्षण की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (व्यावसायिक अवसर एवं गरिमा), उच्च न्यायालयों द्वारा अपने परिसरों में सुरक्षा व अनुशासन बनाए रखने हेतु तैयार की जाने वाली संशोधित इंटर्नशिप नीति (Revised Internship Policy), बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा निर्धारित व्यावहारिक प्रशिक्षण (Practical Legal Training) के मानक, तथा विधि परीक्षा उत्तीर्ण कर नामांकन की प्रतीक्षा कर रहे छात्रों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अधीन कोर्ट रूम में उपस्थित होने के अधिकार पर केरल हाईकोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।
केरल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पी.वी. कुन्हीकृष्णन (Justice PV Kunhikrishnan) की एकल पीठ ने ‘भारत माता स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज’ (अलुवा) के विधि छात्र ऑस्टिन सनी (Austin Sunny) द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय प्रशासन को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय परिसर में प्रवेश और अदालती कार्यवाही देखने के लिए अस्थायी प्रवेश पास (Temporary Entry Pass) जारी करे।
अदालत ने यह अंतरिम राहत संबंधित वरिष्ठ अधिवक्ता के उस लिखित आश्वासन के अधीन दी है जिसमें यह पुष्टि की जाएगी कि छात्र उनके अधीन इंटर्नशिप कर रहा है। हालांकि, न्यायालय ने नई इंटर्नशिप नीति की समग्र वैधता और यह बड़ा सवाल कि ‘क्या यह नीति उन छात्रों पर भी लागू होगी जो इसकी पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते’, भविष्य की अंतिम सुनवाई के लिए खुला रखा है। अदालत ने केरल हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (KHCAA) को मामले में पक्षकार बनाने का भी निर्देश दिया है।
उच्च न्यायालय के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं अंतरिम निर्देश
1. ‘व्यापक संवैधानिक प्रश्न पर बाद में होगा विचार; छात्र को तुरंत मिले अस्थायी पास’
न्यायमूर्ति पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने प्रशासनिक प्रतिबंधों के बीच छात्र के विधिक प्रशिक्षण को बाधित होने से बचाने के लिए अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा: “दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, मेरा विचार है कि जहाँ तक केवल वर्तमान याचिकाकर्ता का संबंध है, एक अंतरिम आदेश पारित किया जा सकता है। यह व्यापक मुद्दा कि क्या यह इंटर्नशिप नीति उन छात्रों पर भी लागू होती है जो इसके पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं, बाद में तय किया जा सकता है (The larger issue can be decided later)।”
2. अधिवक्ता का लिखित आश्वासन और अस्थायी प्रवेश की शर्तें:
- अदालत ने उच्च न्यायालय प्रशासन (Administrative Side) को स्पष्ट निर्देश दिया कि:
- याचिकाकर्ता छात्र को अदालत कक्ष में कार्यवाही देखने हेतु अस्थायी प्रवेश पास जारी किया जाए;
- यह पास संबंधित अधिवक्ता से प्राप्त इस लिखित आश्वासन के अधीन होगा कि छात्र वास्तविक रूप से उनके चैंबर/फर्म में इंटर्नशिप कर रहा है; तथा
- छात्र को उच्च न्यायालय परिसर की सामान्य अनुशासन नियमावली का पालन करना होगा।
3. बार एसोसिएशन को पक्षकार बनाने का निर्देश:
- चूंकि यह मुद्दा केवल एक छात्र तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च न्यायालय में वकालत करने वाले सभी वकीलों और उनके प्रशिक्षुओं (Interns) के अधिकारों को प्रभावित करता है, इसलिए अदालत ने निर्देश दिया कि केरल हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (KHCAA) को मामले में एक अतिरिक्त प्रतिवादी के रूप में शामिल किया जाए।
- उच्च न्यायालय प्रशासन और संबंधित प्रतिवादियों को जवाबी हलफनामा (Counter Affidavit) दाखिल करने का समय दिया गया है।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम
| चरण / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे |
|---|---|
| याचिकाकर्ता | ऑस्टिन सनी (Austin Sunny) — छात्र, भारत माता स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज, अलुवा (केरल)। |
| प्रतिवादी पक्ष | 1. केरल उच्च न्यायालय (प्रशासनिक शाखा / Administrative Side)। 2. रजिस्ट्रार जनरल एवं प्रोटोकॉल अधिकारी。 3. केरल हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (अदालती निर्देश पर जोड़ा गया पक्षकार)। |
| विवादित विनियामक नीति | केरल उच्च न्यायालय की संशोधित इंटर्नशिप नीति (Revised Internship Policy) — जिसके तहत केवल विधि पाठ्यक्रमों के अंतिम दो वर्षों में नियमित रूप से अध्ययनरत छात्रों को ही उच्च न्यायालय में इंटर्नशिप की अनुमति दी गई है। |
| छात्र की शैक्षणिक स्थिति | छात्र ने 16 सितंबर 2026 को एलएलबी (LL.B) के अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं पूरी की थीं; 6 सप्लीमेंट्री परीक्षाएं बाकी होने के कारण वह परिणामों और स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में औपचारिक नामांकन (Enrolment) की प्रतीक्षा कर रहा है। |
| प्रशासनिक इनकार | छात्र ने प्रसिद्ध लॉ फर्म ‘नीनन एंड मैथ्यू एडवोकेट्स’ में इंटर्नशिप शुरू की; किंतु जब उसने अदालती कार्यवाही देखने के लिए पास मांगा, तो प्रशासनिक अधिकारियों ने यह कहते हुए पास देने से मना कर दिया कि वह अब नियमित रूप से अध्ययनरत छात्र नहीं है। कॉलेज द्वारा छात्र होने का आधिकारिक प्रमाण पत्र देने के बावजूद कोई लिखित आदेश दिए बिना प्रवेश रोक दिया गया। |
| याचिकाकर्ता के मुख्य तर्क | 1. पाठ्यक्रम समाप्त होने और नामांकन के बीच का समय व्यावहारिक अदालती प्रक्रिया को सीखने का सबसे स्वर्णिम समय होता है। 2. ऐसे छात्रों को बाहर रखना इंटर्नशिप नीति के मूल उद्देश्य को समाप्त करता है। 3. यह प्रतिबंध मनमाना, अतार्किक और संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 का उल्लंघन है। |
| हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश | छात्र को तुरंत अस्थायी प्रवेश पास जारी करने का निर्देश; वरिष्ठ अधिवक्ता का लिखित पत्र अनिवार्य; नीति की वैधता पर विस्तृत सुनवाई बाद में। |
विधिक एवं संवैधानिक विश्लेषण: ‘व्यावहारिक विधिक शिक्षा और अदालती पहुंच का अधिकार’
- ‘अंतिम दो वर्ष’ की संकीर्ण व्याख्या की विधिक खामी:
- उच्च न्यायालयों में बढ़ती भीड़ और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए कई उच्च न्यायालयों ने ऐसी नीतियां बनाई हैं कि केवल विधि के वरिष्ठ छात्र ही इंटर्नशिप के लिए आएं।
- किंतु प्रशासनिक तंत्र ने इस नियम की इतनी यांत्रिक और संकीर्ण व्याख्या कर दी कि जो छात्र अपनी अंतिम परीक्षाएं दे चुके हैं और परीक्षा परिणाम या बार काउंसिल में लाइसेंस (Enrolment) मिलने का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें ‘गैर-छात्र’ मानकर अदालतों से बाहर कर दिया गया।
- विधिक दृष्टि से यह एक गंभीर विसंगति है; क्योंकि परीक्षा के बाद का 3 से 6 महीने का समय किसी भी भावी वकील के लिए किसी वरिष्ठ वकील के साथ कोर्ट में उपस्थित रहकर वकालत के गुर सीखने का सबसे उपयुक्त समय होता है।
- खुली अदालत (Open Court) और अनुच्छेद 19(1)(g):
- भारत के संविधान और प्रक्रियात्मक संहिताओं का बुनियादी सिद्धांत यह है कि न्याय प्रशासन ‘खुली अदालतों’ में होना चाहिए।
- सुरक्षा और अनुशासन के नाम पर किसी मान्यता प्राप्त वकील के अधीन कार्यरत प्रशिक्षु को केवल इसलिए अदालत कक्ष में जाने से रोकना कि उसका परीक्षा परिणाम अभी नहीं आया है, उसके पेशे की तैयारी करने के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(g)) और समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन है।
विधिक विवरण एवं उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता
- न्यायालय: केरल उच्च न्यायालय (मूल रिट क्षेत्राधिकार)
- केस संदर्भ: ऑस्टिन सनी बनाम केरल उच्च न्यायालय व अन्य [W.P.(C) No. … / 2026]
- पीठासीन न्यायाधीश: न्यायमूर्ति पी.वी. कुन्हीकृष्णन (एकल पीठ)
- आदेश की तिथि: 28 अक्टूबर 2026 (बुधवार)
- कार्यवाही का परिणाम: छात्र को अंतरिम राहत; अस्थायी प्रवेश पास जारी करने का निर्देश; नीति की व्यापक वैधता पर सुनवाई लंबित।
विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता (ऑस्टिन सनी) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष मैथ्यू (Senior Counsel Santhosh Mathew), जिन्हें अधिवक्ता शिंतो मैथ्यू अब्राहम, वीणा रवींद्रन, अनिल सेबेस्टियन पुलिकेल, लिआ रेचल नीनन, मैथ्यू नेविन थॉमस, कार्तिक राजगोपाल, कुरियन एंटनी मैथ्यू, अपर्णा एस., नोएल नीनन नीनन, अदीन नज़र, रोहन मैथ्यू और सायरा सुसान जोजो ने सहयोग दिया।
- केरल उच्च न्यायालय (प्रशासनिक शाखा) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता बी.जी. हरींद्रनाथ (Senior Counsel BG Harindranath) एवं स्थायी वकील एस. विष्णु (Standing Counsel S Vishnu)।
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यावसायिक स्वतंत्रता), अनुच्छेद 21 एवं अनुच्छेद 226
- अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) — धारा 24 (अधिवक्ताओं के रूप में नामांकन की शर्तें)
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) विधिक शिक्षा नियम, 2008 — अनुसूची III, नियम 25 (अनिवार्य इंटर्नशिप एवं अदालती उपस्थिति)
- केरल उच्च न्यायालय इंटर्नशिप नीति — पात्रता मानदंड एवं सुरक्षा पास जारी करने की शर्तें
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- विधि छात्रों के इंटर्नशिप अधिकारों और अदालती पहुंच का विधिक मानक: ‘उच्च न्यायालय की इंटर्नशिप नीति का उद्देश्य विधि छात्रों को व्यावहारिक अदालती प्रक्रियाओं से समृद्ध करना है, न कि प्रक्रियात्मक तकनीकी आधारों पर उनके प्रशिक्षण को रोकना; जो छात्र अपनी अंतिम परीक्षाएं दे चुके हैं और नामांकन की प्रतीक्षा में हैं, वे कानून के छात्र के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अधीन विधिक प्रशिक्षण पाने के पूर्णतः हकदार हैं; वरिष्ठ वकील के लिखित आश्वासन के आधार पर उन्हें अदालतों में प्रवेश और कार्यवाही देखने का अवसर दिया जाना न्यायोचित और संविधान सम्मत है।’
- वर्तमान स्थिति व विधिक प्रभाव: केरल हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद याचिकाकर्ता ऑस्टिन सनी को उच्च न्यायालय में प्रवेश का पास जारी कर दिया जाएगा; साथ ही, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन को पक्षकार बनाए जाने के बाद अब अदालत यह तय करेगी कि क्या परिणाम और नामांकन की प्रतीक्षा कर रहे सभी भावी वकीलों को सामान्य रूप से इस संशोधित नीति के तहत स्थायी छूट दी जानी चाहिए।
Lawyer Interns: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court), कोच्चि |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति पी.वी. कुन्हिकृष्णन (Justice PV Kunhikrishnan) |
| मामला/साइटेशन | ऑस्टिन सनी बनाम केरल उच्च न्यायालय व अन्य (Austin Sunny v High Court of Kerala & ors) |
| याचिकाकर्ता | ऑस्टिन सनी (भारत माता स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज का छात्र) | प्रतिनिधित्व: वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष मैथ्यू व अन्य |
| प्रतिवादी पक्ष | केरल उच्च न्यायालय प्रशासन | प्रतिनिधित्व: वरिष्ठ अधिवक्ता बी.जी. हरिंद्रनाथ और स्टैंडिंग काउंसिल एस. विष्णु |
| मूल विवाद | संशोधित नीति के तहत केवल अंतिम दो वर्षों के छात्रों को इंटर्नशिप पास की अनुमति; कोर्स पूरा कर चुके या परीक्षा परिणाम/नामांकन का इंतजार कर रहे छात्रों को पास देने से इंकार। |
| अदालत का फैसला | अंतरिम पास जारी करने का निर्देश: वकीलों का लिखित आश्वासन जमा करने पर छात्र को एंट्री पास देने का आदेश। मुख्य सवाल पर काउंटर एफिडेविट मांगा। |

