केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक श्रेणियां / बिंदु | केरल उच्च न्यायालय का विधिक निर्णय (2026) |
| मामले का नाम | एन. माधवन कुट्टी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य (N Madhavan Kutty v Union of India & ors) |
| संबंधित अदालत | केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस ज़ियाद रहमान ए.ए. |
| संबंधित कानून | सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और IT (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 |
| मुख्य विधिक प्रश्न | क्या कुछ पोस्ट्स के आपत्तिजनक होने पर प्राधिकारी पूरा सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक कर सकते हैं? |
| अदालत का विधिक स्टैंड | नहीं। केवल संबंधित आपत्तिजनक पोस्ट (URLs) को ही ब्लॉक किया जा सकता है, पूरे अकाउंट को बंद करना अधिकारों का अतिक्रमण है। |
| अंतिम आदेश | मेटा को वरिष्ठ पत्रकार का फेसबुक अकाउंट बहाल करने का निर्देश; पुलिस को केवल विशिष्ट URL भेजने की छूट। |
Meta Platforms: सोशल मीडिया खातों को ब्लॉक करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है।
जस्टिस ज़ियाद रहमान ए.ए. की पीठ ने वरिष्ठ पत्रकार एन. माधवन कुट्टी की याचिका पर सुनवाई करते हुए मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms) के शिकायत अधिकारी (Grievance Officer) को उनका फेसबुक अकाउंट तुरंत बहाल (Restore) करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ पोस्ट आपत्तिजनक पाए जाते हैं, तो भी प्राधिकारी (Authorities) पूरे अकाउंट को ब्लॉक करने का निर्देश नहीं दे सकते। इसके बजाय केवल उन विशिष्ट पोस्ट (URL) को हटाने या ब्लॉक करने का निर्देश दिया जा सकता है।
मामला क्या था? (Case Background)
- यह मामला केरल पुलिस के अनुरोध पर दिग्गज पत्रकार एन. माधवन कुट्टी के फेसबुक अकाउंट को भारत में प्रतिबंधित (Block) किए जाने से जुड़ा है।
- अकाउंट ब्लॉक होना: पत्रकार माधवन कुट्टी (जिनके लगभग 6,000 फॉलोअर्स हैं) का फेसबुक अकाउंट नवंबर 2025 से भारत में एक्सेस नहीं हो पा रहा था। मेटा ने उन्हें सूचित किया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों (केरल पुलिस) के कानूनी अनुरोध पर यह कार्रवाई की गई है।
- याचिकाकर्ता का तर्क: कुट्टी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर तर्क दिया कि उनका अकाउंट बिना किसी पूर्व नोटिस, बिना कारण बताए और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) तथा IT नियम 2021 के नियम 3(g) में दिए गए सुरक्षा उपायों का उल्लंघन करके ब्लॉक किया गया है।
- विशिष्ट स्थिति: याचिकाकर्ता के वकील (अधिवक्ता कालीश्वरम राज) ने अदालत को बताया कि अकाउंट केवल भारत में ब्लॉक था, जबकि विदेशों में यह चालू था।
हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: “शक्तियों का अतिलंघन”
केरल उच्च न्यायालय ने रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि पुलिस ने केवल कुछ पोस्ट्स पर आपत्ति होने के बावजूद पूरे अकाउंट को ही ब्लॉक करवा दिया था।
जस्टिस ज़ियाद रहमान ए.ए. ने अपने आदेश में कहा, यदि कोई आपत्तिजनक सामग्री राज्य की सुरक्षा को प्रभावित करती है या जनहित के खिलाफ है, तो ऐसी सामग्री को ब्लॉक करने का निर्देश जारी करने से कोई नहीं रोकता। हालांकि, केवल कुछ सामग्री (Posts) के संबंध में पूरा अकाउंट ही ब्लॉक कर दिया गया। इसलिए, प्रथम दृष्टया मेरा मानना है कि उत्तरदाताओं (प्राधिकारियों) ने अपनी शक्तियों का अतिक्रमण किया है।
उच्च न्यायालय के मुख्य निर्देश (Court Directives)
- अकाउंट तुरंत बहाल करने का आदेश: कोर्ट ने मेटा को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के फेसबुक अकाउंट को तुरंत पुनः संचालित (Restore) किया जाए।
- विशिष्ट URL ब्लॉक करने का प्रावधान: पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे मेटा को केवल उन विशिष्ट पोस्टों के URL और विवरण प्रदान करें जो कथित तौर पर आपत्तिजनक हैं, ताकि केवल उन्हें ही हटाया या अक्षम (Disable) किया जा सके।
- भविष्य के लिए स्पष्टीकरण: यदि पुलिस भविष्य में भी किसी पोस्ट को आपत्तिजनक पाती है, तो वे मेटा को संबंधित URL भेज सकते हैं और कानून के अनुसार केवल उन पोस्ट को ब्लॉक किया जा सकता है, न कि पूरे अकाउंट को।
- अंतिम तिथि: कोर्ट ने इस आदेश की सूचना केरल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को देने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 तय की।

