केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| माननीय पीठ | मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तेजस कारिया |
| मुख्य कानूनी प्रश्न | क्या कार्यकारी दिशानिर्देशों द्वारा HMA के तहत विवाह पंजीकरण में भारतीय नागरिकता की शर्त जोड़ी जा सकती है? |
| संबद्ध कानून | हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (धारा 5, 7, 8); दिल्ली (विवाह का अनिवार्य पंजीकरण) आदेश, 2014 |
| वर्तमान स्थिति | दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा (Order Reserved)। |
Registered Marriage: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण संवैधानिक और विधिक प्रश्न पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है: क्या दिल्ली सरकार के प्रशासनिक/कार्यकारी आदेश (Executive Order) के जरिए किसी विदेशी नागरिक (जो स्वीडिश हिंदू है और OCI कार्डधारक है) को हिंदू विवाह अधिनियम, 1895 के तहत विवाह पंजीकरण से वंचित किया जा सकता है?
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने स्वीडन की 29 वर्षीय ओसीआई कार्डधारक महिला द्वारा दायर याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा।
क्या है पूरा विवाद? (The Legal Challenge)
- मामले की पृष्ठभूमि: याचिकाकर्ता स्वीडिश नागरिक और ओसीआई (OCI) कार्डधारक महिला ने एक अन्य स्वीडिश नागरिक से दिल्ली में हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह किया (उसका पति भी हिंदू धर्म अपना चुका है)। हालांकि, जब उन्होंने शादी का पंजीकरण कराने का प्रयास किया, तो दिल्ली सरकार के नियमों के कारण पंजीकरण खारिज हो गया।
- दिल्ली सरकार के नियम: दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के दिशानिर्देशों और दिल्ली (विवाह का अनिवार्य पंजीकरण) आदेश, 2014 के अनुसार, हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) के तहत विवाह पंजीकृत कराने के लिए कम से कम एक पक्ष (पति या पत्नी) का भारतीय नागरिक होना और संबंधित अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
- याचिकाकर्ता का तर्क (Advocate Shasha Jain):
- मूल अधिनियम से परे (Ultra Vires): याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 में ऐसी कोई शर्त नहीं है कि कम से कम एक व्यक्ति भारतीय नागरिक होना चाहिए। HMA केवल पक्षकारों के ‘धर्म’ (हिंदू होना) पर लागू होता है, न कि उनकी ‘राष्ट्रीयता’ (Citizenship) पर।
- कार्यकारी आदेश की सीमा: जब कोई विवाह HMA की धारा 5 (शर्तें) और धारा 7 (रीति-रिवाज/सप्तपदी) को पूरा करता है, तो धारा 8 के तहत पंजीकरण का अधिकार मिलता है। राज्य सरकार कार्यकारी दिशानिर्देशों (Executive Guidelines) के जरिए मूल कानून में ऐसी अतिरिक्त शर्तें नहीं जोड़ सकती।
- तकनीकी बाधा और आधार (Aadhaar) अनिवार्यता:
- याचिका में एक व्यावहारिक समस्या भी उठाई गई: दिल्ली सरकार का ऑनलाइन मैरिज रजिस्ट्रेशन पोर्टल केवल आधार कार्ड (Aadhaar) प्रमाणीकरण के जरिए लॉगिन की अनुमति देता है। विदेशी नागरिक होने के कारण याचिकाकर्ता के पास आधार नहीं है, जिससे वे ऑनलाइन प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर हो गए हैं।
- एसडीएम (SDM) के समक्ष अभ्यावेदन देने के बावजूद अधिकारियों ने कोई वैकल्पिक तंत्र (जैसे मैन्युअल/DEO लॉगिन) प्रदान नहीं किया।
सुनवाई के दौरान मुख्य दलीलें
- स्पेशल मैरिज एक्ट (SMA) का विकल्प: प्रतिवादी पक्ष ने कहा कि विदेशी नागरिक विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act, 1954) के तहत पंजीकरण करा सकते हैं, जिसमें राष्ट्रीयता की कोई बाधा नहीं है।
- याचिकाकर्ता का जवाब: SMA के तहत पंजीकरण के लिए दोनों पक्षों को भारत में 60 दिनों तक रुकना अनिवार्य होता है, जो विदेशी पर्यटकों/नागरिकों के लिए व्यावहारिक नहीं है और इससे वे बिना किसी कानूनी उपाय के (“Remediless”) रह जाते हैं।
- अदालत की मौखिक टिप्पणी: सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि “सभी मौलिक अधिकार विदेशी नागरिकों को उपलब्ध नहीं होते हैं।”

