Sunday, August 9, 2026
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 Anarchy And Chaos In Education System: एक विश्वविद्यालय का दूसरे की डिग्री पर सवाल उठाना…ऐसे में तो अराजक स्थिति पैदा होगी, यह क्यों, पढ़ें

केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (अगस्त 2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति वृषाली जाधव एवं न्यायमूर्ति संदेश पाटिल (बॉम्बे हाई कोर्ट)
याचिकाकर्ताडॉ. संताजी शिंदे (Dr. Santaji Shinde)
संबंधित संस्थानशिवाजी यूनिवर्सिटी (कोल्हापुर, महाराष्ट्र) एवं JJTU (झुंझुनूं, राजस्थान)
संबंधित कानूनUGC Act, 1956 की धारा 22 (Right to Confer Degrees)
मुख्य विधिक सिद्धांतUGC द्वारा मान्यता प्राप्त एक विश्वविद्यालय किसी अन्य विश्वविद्यालय की वैधानिक डिग्री की समकक्षता पर सवाल नहीं उठा सकता।
अदालत का निर्णययूनिवर्सिटी का निर्णय रद्द; प्रोफेसर की नियुक्ति को 2016 से सभी वित्तीय लाभों के साथ तुरंत स्वीकृत करने का आदेश।

Anarchy And Chaos In Education System: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि एक विश्वविद्यालय को किसी अन्य मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की गई डिग्री की वैधता या तुल्यता (Equivalence) पर सवाल उठाने की अनुमति दी गई, तो इससे देश की संपूर्ण शिक्षा प्रणाली में “अराजकता और अराजक स्थिति” (Anarchy and Chaos) पैदा हो जाएगी।

न्यायमूर्ति वृषाली जाधव और न्यायमूर्ति संदेश पाटिल की खंडपीठ ने 7 अगस्त 2026 के अपने आदेश में कोल्हापुर के प्रसिद्ध शिवाजी विश्वविद्यालय (Shivaji University) के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें उसने राजस्थान के एक विश्वविद्यालय से पीएचडी (Ph.D.) करने वाले प्रोफेसर की नियुक्ति को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था।

हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

  • UGC अधिनियम की धारा 22 की व्याख्या:“डिग्री प्रदान करने के अधिकार को यूजीसी अधिनियम (UGC Act) की धारा 22 से समझा जा सकता है। हालांकि, किसी एक विश्वविद्यालय को दूसरे विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की गई डिग्री पर सवाल उठाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। किसी भी अन्य व्याख्या से यूजीसी अधिनियम की धारा 22 के साथ अन्याय होगा। इससे देश के शैक्षणिक ताने-बाने में अराजकता फैल जाएगी, जहाँ हर विश्वविद्यालय दूसरे विश्वविद्यालय द्वारा दी गई समान डिग्रियों पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करने लगेगा।”
  • समान डिग्रियों की समकक्षता: अदालत ने स्पष्ट किया कि जब दोनों विश्वविद्यालयों की डिग्रियां विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के मानकों के तहत वैध हैं, तो उन्हें समान और समकक्ष ही माना जाएगा।

मामला क्या था? (Case Background)

  1. प्रोफेसर की नियुक्ति और विवाद
    • सांगली स्थित ‘अन्नासाहेब डांगे कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग’ (जो शिवाजी यूनिवर्सिटी से संबद्ध है) ने वर्ष 2016 में डॉ. संताजी शिंदे (41) को कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किया था।
    • कॉलेज ने जब उनकी नियुक्ति के अनुमोदन (Approval) का प्रस्ताव शिवाजी यूनिवर्सिटी को भेजा, तो यूनिवर्सिटी ने उसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि डॉ. शिंदे की Ph.D. डिग्री राजस्थान के झुंझुनूं स्थित जगदीशप्रसाद झाबरमल टीबरेवाला यूनिवर्सिटी (JJTU) की है, जिसे शिवाजी यूनिवर्सिटी अपनी Ph.D. डिग्री के समकक्ष (Equivalent) नहीं मानती।
  2. यूनिवर्सिटी का तर्क व कोर्ट का रुख
    • शिवाजी यूनिवर्सिटी की डीन कमेटी ने अप्रैल 2019 में जेजेटीयू (JJTU) को पत्र लिखा था, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर यूनिवर्सिटी ने एक प्रस्ताव पारित कर उनकी डिग्री को असमरूप घोषित कर दिया।
    • हाई कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जेजेटीयू से जवाब न मिलना किसी अन्य विश्वविद्यालय की डिग्री पर सवाल उठाने का आधार नहीं हो सकता। न तो शिवाजी यूनिवर्सिटी और न ही उसके तहत किसी प्राधिकरण को किसी अन्य मान्यता प्राप्त संस्थान की डिग्री पर सवाल उठाने का कोई अधिकार है।

हाई कोर्ट का अंतिम आदेश

  1. नियुक्ति को तत्काल मंजूरी देने का निर्देश: बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिवाजी यूनिवर्सिटी की एकेडमिक काउंसिल के उस प्रस्ताव को पूरी तरह से रद्द कर दिया और यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया कि वह डॉ. संताजी शिंदे की कंप्यूटर साइंस प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति को तुरंत मंजूरी दे।
  2. पिछली तारीख से सभी वित्तीय लाभ (Back Benefits): कोर्ट ने आदेश दिया कि चूंकि यह मामला अदालत में लंबित था, इसलिए अनुमोदन मिलने के साथ ही डॉ. शिंदे उनकी मूल नियुक्ति तिथि (2016) से ही अपने सभी वेतन, बकाये (Arrears) और अन्य प्रोत्साहन लाभों के हकदार होंगे।

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