केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (2026) |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी (इलाहाबाद उच्च न्यायालय) |
| पक्षकार/बंदी | संचित सेठ (बनाम एंटी इवेजन विभाग, सीजीएसटी गाजियाबाद) |
| संबंधित कानून | Health Security Se National Security Cess Act, 2025 (Section 18, 26), BNSS, 2023 (Section 35) एवं Constitution of India (Article 21 & 22) |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद ‘बैक-डेट’ या अगले दिन जारी गिरफ्तारी प्राधिकरण अवैध है; परिजनों को सूचना देना और कानूनी सहायता की जानकारी देना अनिवार्य संवैधानिक प्रक्रिया है। |
| अदालत का निर्णय | हेबियस कॉर्पस याचिका स्वीकार; गिरफ्तारी व रिमांड रद्द और बंदी की तत्काल रिहाई का आदेश। |
Authorisation For Arrest: इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्वास्थ्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर अधिनियम, 2025 (Health Security Se National Security Cess Act, 2025 – HSNS Cess Act) के तहत गिरफ्तार किए गए एक कारोबारी (संचित सेठ) की गिरफ्तारी, रिमांड और हिरासत को पूरी तरह से गैर-कानूनी मानते हुए रद्द कर दिया है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।अदालत ने पाया कि सीजीएसटी आयुक्त (Commissioner, CGST) द्वारा व्यक्ति को 22 मई 2026 की रात में हिरासत में लिए जाने के एक दिन बाद (23 मई 2026 को) लिखित गिरफ्तारी प्राधिकरण (Authorisation to Arrest) जारी किया गया था।
हाई कोर्ट की मुख्य व महत्वपूर्ण टिप्पणियां
- पहले गिरफ्तारी, बाद में अनुमति—कानूनन पूरी तरह अवैध:“गिरफ्तारी के समय आरोपी को पूर्ण विवरण के साथ गिरफ्तारी के आधार (Grounds of Arrest) बताए जाने चाहिए। गिरफ्तारी ज्ञापन (Arrest Memo) में सटीक समय, स्थान और कारण दर्ज होने चाहिए। यह स्वीकार्य नहीं है कि किसी व्यक्ति को 22 मई की रात को उठाकर हिरासत में ले लिया जाए और उसे गिरफ्तार करने का औपचारिक आदेश आयुक्त द्वारा अगले दिन 23 मई को जारी किया जाए।”
- संवैधानिक अधिकारों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन: अदालत ने दर्ज किया कि गिरफ्तारी मेमो में यह साबित नहीं हुआ कि बंदी के परिवार के किसी सदस्य या उसके द्वारा नामित व्यक्ति को गिरफ्तारी की सूचना दी गई थी। मेमो में दिए गए गवाह अनजान व्यक्ति थे और उसमें यह भी दर्ज नहीं था कि आरोपी को अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने का अधिकार दिया गया है।
- 5 साल तक की सजा वाले अपराधों में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश (BNSS Section 35 & Antil Ruling): अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि HSNS Cess Act के तहत अधिकतम सजा 5 वर्ष है, इसलिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35 और सुप्रीम कोर्ट के फैसले (सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई) के तहत बिना ठोस और लिखित कारणों के नियमित रूप से गिरफ्तारी नहीं की जा सकती।
- बिना ऑडिट/असेसमेंट के टैक्स चोरी का अनुमान: कोर्ट ने 17.88 करोड़ रुपये की राजस्व चोरी (Tax Evasion) के विभाग के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह आंकड़ा अधिनियम के अध्याय V के तहत किसी औपचारिक ऑडिट या असेसमेंट (Assessment) पर आधारित नहीं था।
मामला क्या था? (Case Background)
- जीएसटी एंटी-इवेजन की कार्रवाई और गिरफ्तारी
- संचित सेठ (जिसकी फर्म जीएसटी में पंजीकृत है) को 22 मई 2026 की रात जीएसटी आयुक्तालय की एंटी इवेजन टीम ने तंबाकू और पान मसाला के गुप्त निर्माण और कर चोरी के आरोपों में पकड़ा।
- विभाग का आरोप था कि आरोपी ने गैर-घोषित पैकिंग मशीनों का उपयोग करके 17.88 करोड़ रुपये से अधिक के उपकर/टैक्स की चोरी की है।
- विधिक प्रक्रियात्मक त्रुटियां (Procedural Flaws)
- तलाशी का आदेश 22 मई 2026 को जारी हुआ था, लेकिन गिरफ्तारी का अधिकार पत्र (Authorisation for Arrest) 23 मई 2026 को आयुक्त द्वारा जारी किया गया।
- गिरफ्तारी ज्ञापन में रिश्तेदार (प्रवीण सेठ) का नाम केवल कैपिटल अक्षरों में लिखा था, लेकिन उस पर उनके हस्ताक्षर नहीं थे।
- स्पेशल सीजेएम मेरठ और सेशन कोर्ट द्वारा जमानत अर्जी खारिज होने के बाद आरोपी के पक्ष में हाई कोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की गई।
- सुप्रीम कोर्ट के नजीर का हवाला
- याचिकाकर्ता के वकीलों ने मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले का हवाला दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से कम से कम 2 घंटे पहले गिरफ्तारी के लिखित कारण आरोपी को दिए जाने अनिवार्य हैं, अन्यथा गिरफ्तारी अवैध होगी।
⚖️ हाई कोर्ट का अंतिम फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माना कि जब कानून किसी काम को करने का एक विशिष्ट तरीका तय करता है, तो उसे उसी तरीके से किया जाना चाहिए। संस्थागत शक्तियों का मनमाना इस्तेमाल नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है।
- गिरफ्तारी व रिमांड रद्द: कोर्ट ने संचित सेठ की गिरफ्तारी, रिमांड आदेश और निरंतर हिरासत को कानून के विरुद्ध ठहराते हुए रद्द (Set Aside) कर दिया।
- तत्काल रिहाई के आदेश: उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता किसी अन्य मामले में वांछित न हो, तो उसे तुरंत रिहा (Released Forthwith) किया जाए।

