केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (2026) |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला (दिल्ली उच्च न्यायालय) |
| पक्षकार | याचिकाकर्ता (अधिवक्ता विनीत रोहिल्ला) बनाम पेटेंट महानियंत्रक (केंद्र सरकार के स्थायी वकील) |
| संबंधित कानून | Patents Act, 1970 – Section 3(m) [मानसिक कार्य/स्कीम], Section 3(k) [कंप्यूटर प्रोग्राम/सॉफ्टवेयर], Section 2(1)(j) & 2(1)(ja) |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | मानसिक कार्य (Mental Act) से जुड़ी अपत्तियों का मूल्यांकन पेटेंट के संपूर्ण दावे के आधार पर होगा; इसे नवीनता (Novelty) या ऑब्वियसनेस (Obviousness) से भ्रमित नहीं किया जाएगा। |
| अदालत का निर्णय | 7-स्तरीय दिशानिर्देश जारी, पेटेंट कार्यालय को 6 सप्ताह में कदम उठाने का आदेश। |
Patents Act: दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटेंट अधिनियम, 1970 (Patents Act, 1970) की धारा 3(m) के तहत दावों (Claims) की जांच के लिए महत्वपूर्ण 7-स्तरीय दिशानिर्देश (7-Step Guidelines) निर्धारित किए हैं।
न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला की एकल पीठ ने पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक (Controller General of Patents, Designs and Trademarks) के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील को बंद करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसके तहत “Method and Arrangement for optimising the Operational Times and Cell Change Performance of Mobile Terminals” नामक पेटेंट आवेदन को धारा 3(k) और 3(m) के तहत खारिज कर दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया है कि धारा 3(m) के तहत कोई दावा बाहर (Excluded) होता है या नहीं, इसका मूल्यांकन करते समय ‘नवीनता’ (Novelty) और ‘आवष्कारिक चरण’ (Inventive Step) की शर्तों को आपस में नहीं मिलाया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
- धारा 3(m) की जांच का स्वतंत्र दायरा:“धारा 3(m) की जांच केवल इस बात पर केंद्रित है कि दावा किस अधिकार (Monopoly) का एकाधिकार चाहता है; यह धारा 2(1)(j) या 2(1)(ja) की नवीनता और आवष्कारिक चरण की आवश्यकताओं से स्वतंत्र है और इसे उनके साथ भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए। कोई दावा केवल इसलिए धारा 3 के तहत बाहर नहीं होता क्योंकि दावा किया गया आविष्कार एक स्पष्ट या मामूली प्रगति प्रतीत होता है।”
- ‘मियर’ (Mere) शब्द का महत्व: पीठ ने नोट किया कि 2002 के संशोधन द्वारा शामिल धारा 3(m) के तहत ‘मियर’ (केवल/मात्र) शब्द का उपयोग पहली तीन अपवाद श्रेणियों (स्कीम, नियम, या मानसिक कार्य की विधि) को नियंत्रित करता है। इसका तात्पर्य यह है कि अपवाद केवल उन दावों तक सीमित है जो पूरी तरह से और केवल मानसिक कार्य (Solely a Mental Act) से संबंधित हैं और उससे अधिक कुछ नहीं।
- दावे को टुकड़ों में न बांटें: अदालत ने निर्देश दिया कि धारा 3(m) लागू करते समय पेटेंट दावे को उसके अलग-अलग टुकड़ों/घटकों में विभाजित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि संपूर्ण दावे (Claim as a Whole) को एक साथ देखा जाना चाहिए।
धारा 3(m) के परीक्षण हेतु 7-स्तरीय दिशानिर्देश (7-Step Guidelines)
दिल्ली हाई कोर्ट ने पेटेंट कार्यालय और परीक्षकों के लिए निम्नलिखित दिशानिर्देश जारी किए।
- प्रासंगिकता का निर्माण: प्रत्येक दावे की व्याख्या पेटेंट विनिर्देशन (Specification) के प्रकाश में उस क्षेत्र के कुशल व्यक्ति (Person Skilled in the Art) के दृष्टिकोण से की जानी चाहिए।
- उत्पाद दावों पर लागू न होना: कोई दावा जो सार रूप में वास्तविक ‘उत्पाद दावा’ (Product Claim) है—जैसे कि अपनी भौतिक विशेषताओं द्वारा परिभाषित उपकरण या डिवाइस—वह ‘स्कीम, नियम या तरीका’ नहीं है और उस पर धारा 3(m) की आपत्ति नहीं लगाई जा सकती।
- प्रक्रिया दावों (Process Claims) का सार: प्रक्रिया दावे के लिए, यह पहचानें कि संपूर्ण दावा किस एकाधिकार (Monopoly) को कवर करता है।
- शुद्ध मानसिक एकाधिकार का परीक्षण: यह जांचें कि क्या वह एकाधिकार मानसिक कार्य के अलावा कुछ और नहीं है।
- टोकन/नाममात्र के भौतिक चरणों का प्रभाव नहीं: यदि दावे का मुख्य सार केवल मानसिक कार्य ही है, तो प्रदर्शन (Displaying), प्रस्तुतीकरण (Presenting) या प्रिंटिंग जैसे नाममात्र/टोकन भौतिक चरण उसे धारा 3(m) के अपवाद से बाहर नहीं ले जाएंगे।
- नवीनता और आवष्कारिक चरण से पृथकता: धारा 3(m) की जांच को धारा 2(1)(j) के तहत नवीनता और धारा 2(1)(ja) के तहत आवष्कारिक चरण के साथ मिलाकर/भ्रमित करके नहीं देखा जाएगा।
- कंप्यूटर प्रोग्राम से संचालन (धारा 3(k) बनाम 3(m)): जहां दावे में यह कहा गया है कि विधि किसी कंप्यूटर या कंप्यूटर प्रोग्राम द्वारा निष्पादित की जाती है, वहां केवल इस आधार पर धारा 3(m) आकर्षित नहीं होगी; ऐसे दावे की अलग से धारा 3(k) के तहत जांच की जाएगी।
⚖️ हाई कोर्ट का निर्देश
अदालत ने निर्देश दिया कि इन दिशानिर्देशों को आदेश की प्रति प्राप्त होने के 6 सप्ताह के भीतर उचित कार्रवाई और कार्यान्वयन के लिए पेटेंट और डिजाइन महानियंत्रक, दिल्ली के समक्ष रखा जाए। दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देने के बाद हाई कोर्ट ने अपील को अंतिम रूप से बंद कर दिया।

