कोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ?
- समय सीमा बढ़ाने की मांग: व्यक्तिगत रूप से पेश हुईं याचिकाकर्ता मुगिल अंबू वसंथा ने तर्क दिया कि अधिसूचना के तुरंत बाद आवेदन की अंतिम तिथि समाप्त हो रही थी, जिससे योग्य ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को पर्याप्त समय नहीं मिला।
- अदालत का फैसला: पीठ ने कहा कि यह सुनवाई NLSIU द्वारा दायर एक अपील याचिका पर हो रही है, जिसमें मूल याचिकाकर्ता (मुगिल अंबू वसंथा) के लिए पहले से ही 1 सीट आरक्षित रखने का अंतरिम आदेश जारी है और उनका आवेदन भी KSLU द्वारा स्वीकार कर लिया गया है।
- नई रिट की आवश्यकता: अदालत ने स्पष्ट किया कि आवेदन की तारीख बढ़ाने या व्यापक नीतिगत बदलाव जैसी अतिरिक्त राहतों के लिए याचिकाकर्ता को अलग से उचित कानूनी कार्यवाही (नई याचिका) दायर करनी होगी।
बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने उच्च विधिक शिक्षण संस्थानों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए समावेशी नीतियों, सकारात्मक भेदभाव (Affirmative Action), संविधान के अनुच्छेद 14, 15 एवं 21 के तहत समानता के अधिकार, तथा सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक नालसा (NALSA) निर्णय के अनुपालन से जुड़े मामले में एक महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है।
न्यायमूर्ति अनु शिवरामन और न्यायमूर्ति टी.पी. विवेकानन्द की खंडपीठ नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु द्वारा एकल पीठ के दिसंबर 2024 के उस आदेश के खिलाफ दायर रिट अपील (Writ Appeal) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एनएलएसआईयू को ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के लिए आरक्षण व वित्तीय सहायता नीतियां बनाने और अंतरिम रूप से 0.5% आरक्षण व शुल्क छूट देने का निर्देश दिया गया था। कर्नाटक राज्य विधि विश्वविद्यालय (Karnataka State Law University – KSLU) ने उच्च न्यायालय को सूचित किया है कि उसने अपने घटक और संबद्ध कॉलेजों में 3-वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रमों में ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के लिए 1% क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) लागू कर दिया है और प्रवेश हेतु न्यूनतम अर्हक अंकों की पात्रता सीमा को घटाकर 40% अंक कर दिया है।
उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत प्रमुख विधिक बिंदु एवं सरकारी आदेश
1. 15 सितंबर का विशेष सरकारी आदेश और KSLU की प्रवेश अधिसूचना
- KSLU की ओर से पेश वकील ने 16 सितंबर 2026 की नवीनतम प्रवेश अधिसूचना अदालत के रिकॉर्ड पर पेश की।
- विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि कर्नाटक सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 15 सितंबर 2026 को जारी विशेष सरकारी आदेश (Special Government Order) के अनुपालन में:
- 3-वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को 1% क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया गया है।
- सामान्य वर्ग की तुलना में पात्रता अंकों को घटाकर न्यूनतम 40% अंक निर्धारित किया गया है।
- अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) और KSLU के वकील ने प्रस्तुत किया कि कानून के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार यह आरक्षण क्षैतिज (Horizontal) रूप से ही लागू किया जा सकता है, ठीक उसी तरह जैसे कर्नाटक में सार्वजनिक रोजगार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को 1% क्षैतिज आरक्षण पहले से दिया जा रहा है।
2. आवेदन की समय सीमा और याचिकाकर्ता की चिंता
- व्यक्तिगत रूप से उपस्थित प्रतिवादी/याचिकाकर्ता मुगिल अन्बू वसंत (Mugil Anbu Vasantha) ने अदालत को अवगत कराया कि नई अधिसूचना के तहत आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि अगले ही दिन समाप्त हो रही थी, जिससे पात्र ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को नए आरक्षण प्रावधान का लाभ उठाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सकेगा।
- खंडपीठ ने रेखांकित किया कि चूंकि यह कार्यवाही NLSIU द्वारा दायर रिट अपील से उत्पन्न हुई है, जिसमें अदालत ने पहले ही मुगिल अन्बू वसंत के लिए एक सीट सुरक्षित रखने का अंतरिम निर्देश जारी किया हुआ है और KSLU द्वारा उनका आवेदन पहले ही स्वीकार किया जा चुका है, इसलिए इस विशिष्ट अपील में व्यापक नीतिगत निर्देशों का विस्तार नहीं किया जा सकता; अतिरिक्त राहतों के लिए उपयुक्त स्वतंत्र कार्यवाहियों का सहारा लेना होगा।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं न्यायिक घटनाक्रम
- एकल पीठ का आदेश (16 दिसंबर 2024):
- ट्रांसजेंडर उम्मीदवार मुगिल अन्बू वसंत ने NLSIU बेंगलुरु की प्रवेश नीति को इस आधार पर चुनौती दी थी कि वह हाशिए पर मौजूद ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए समान अवसर सुनिश्चित नहीं करती।
- उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए माना था कि एनएलएसआईयू की मौजूदा प्रवेश और वित्तीय सहायता नीतियां समानता की संवैधानिक गारंटी पर खरी नहीं उतरतीं।
- अदालत ने संस्थान को आगामी शैक्षणिक सत्र से पूर्व ट्रांसजेंडर आरक्षण और वित्तीय सहायता नीति बनाने का निर्देश दिया था और अंतरिम राहत के रूप में 0.5% आरक्षण व पूर्ण शुल्क माफी (Fee Waiver) देने का आदेश दिया था।
- NLSIU की अपील और राज्य की भूमिका (2025–2026):
- एनएलएसआईयू ने इस आदेश को खंडपीठ के समक्ष अपील में चुनौती दी।
- नवंबर 2025 में खंडपीठ ने कर्नाटक के अतिरिक्त महाधिवक्ता की सहायता मांगी और KSLU को मामले में एक आवश्यक पक्षकार के रूप में पक्षकार बनाया।
- जुलाई 2026 में राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को आरक्षण देने के संबंध में एक विस्तृत सर्वेक्षण और डेटा संग्रह पूरा कर लिया है, जिसके आधार पर शिक्षा में भी रोजगार की तर्ज पर 1% आरक्षण लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
उच्च न्यायालय की वर्तमान स्थिति
- पीठ ने दर्ज किया कि सरकारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रवेश अधिसूचना में आरक्षण का समावेश अदालत के भावी आदेशों और इस संबंध में बनने वाले अंतिम दिशा-निर्देशों के अधीन रहेगा।
- प्रथम प्रतिवादी (मुगिल अन्बू वसंत) की सीट सुरक्षित रखने का अंतरिम संरक्षण बरकरार रखते हुए खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 तय की है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) बनाम मुगिल अन्बू वसंत एवं अन्य (सहपठित: कर्नाटक स्टेट लॉ यूनिवर्सिटी व अन्य) [रिट अपील – कर्नाटक उच्च न्यायालय]
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता (NLSIU) की ओर से: विश्वविद्यालय के वरिष्ठ स्थायी वकील
- प्रथम प्रतिवादी: मुगिल अन्बू वसंत (व्यक्तिगत रूप से उपस्थित)
- कर्नाटक राज्य की ओर से: अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG)
- कर्नाटक स्टेट लॉ यूनिवर्सिटी (KSLU) की ओर से: स्थायी विश्वविद्यालय वकील
- प्रासंगिक कानून एवं विनियम:
- ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 (Transgender Persons Protection of Rights Act, 2019)
- कर्नाटक राज्य विधि विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009
- नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया एक्ट, 1986
- कर्नाटक सिविल सेवा (सामान्य भर्ती) (संशोधन) नियम, 2021 (रोजगार में 1% ट्रांसजेंडर क्षैतिज आरक्षण)
- प्रासंगिक संवैधानिक प्रावधान: भारत का संविधान – अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समानता), अनुच्छेद 15(1) व 15(4) (शैक्षणिक उन्नति हेतु विशेष प्रावधान), अनुच्छेद 19(1)(g) एवं अनुच्छेद 21
- संबद्ध ऐतिहासिक न्यायिक नजीरें:
- नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) बनाम भारत संघ (2014, सुप्रीम कोर्ट) — ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को तीसरे लिंग (Third Gender) के रूप में मान्यता; उन्हें शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक नियुक्तियों में पिछड़े वर्गों की भांति आरक्षण और सकारात्मक संरक्षण पाने का संवैधानिक अधिकार है।’
- इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ (1992, सुप्रीम कोर्ट 9-जज संविधान पीठ) — ‘सामाजिक व शैक्षणिक पिछड़ेपन के निवारण हेतु ऊर्ध्वाधर (Vertical) और क्षैतिज (Horizontal) आरक्षण का वर्गीकरण ढांचा।’
- पीठ: न्यायमूर्ति अनु शिवरामन और न्यायमूर्ति टी.पी. विवेकानन्द (कर्नाटक उच्च न्यायालय)
- अगली सुनवाई: 29 सितंबर 2026
Law Students’ Reservation:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) |
| पीठ (Judges) | न्यायमूर्ति अनु शिवरामन और न्यायमूर्ति टी.पी. विवेकानंद |
| मूल याचिकाकर्ता | मुगिल अंबू वसंथा (Mugil Anbu Vasantha – ट्रांसजेंडर उम्मीदवार) |
| मुख्य संस्थान | नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) एवं KSLU |
| नया प्रावधान | ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के लिए 1% हॉरिजॉन्टल आरक्षण + 40% अंक पात्रता |

