Tuesday, September 29, 2026
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Ex-Army Man: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के लगातार संपर्क में था पूर्व सैनिक…सेना की गोपनीय जानकारी लीक करने के आरोपी को यहां केस से जानें

केस एवं विधिक सारांश (Overview Matrix)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (August 2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति मनीषा बत्रा (पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय)
जांच एजेंसीस्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC), अमृतसर
मुख्य कानूनी मुद्दादेश की सुरक्षा से जुड़े मामलों (Official Secrets Act / J espionage) में नियमित जमानत (Regular Bail) का अधिकार।
अदालत का अंतिम आदेशराष्ट्रीय सुरक्षा और गंभीर आरोपों के मद्देनजर नियमित जमानत याचिका खारिज।

Ex-Army Man: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab and Haryana High Court) ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के संपर्क में रहने और पैसे के बदले भारतीय सेना की आवाजाही व सामरिक सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां साझा करने के आरोपी पूर्व सैनिक को नियमित जमानत (Regular Bail) देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले को बेहद गंभीर और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताते हुए याचिका खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति मनीषा बत्रा की एकल पीठ ने 6 अगस्त 2026 के अपने आदेश में टिप्पणी की। कहा, जांच के दौरान यह पाया गया है कि याचिकाकर्ता फोन और सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों के लगातार संपर्क में था। उसके खिलाफ लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं… जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री की प्रकृति और इसमें शामिल व्यापक जनहित/राष्ट्रीय हित को देखते हुए, यह अदालत इस चरण में याचिकाकर्ता को नियमित जमानत का लाभ देने के लिए एक उपयुक्त मामला नहीं मानती है।

मामला क्या है? (Allegations & Investigation)

  1. आरोपी की पृष्ठभूमि
    • याचिकाकर्ता पूर्व सैनिक है जिसने भारतीय सेना में लगभग 17 वर्षों तक सेवा दी है। वर्तमान में वह डिफेंस सर्विस कोर (DSC) में तैनात था और बीकानेर एयरफोर्स स्टेशन (Air Force Station, Bikaner) पर पदस्थ था।
  2. खुफिया जानकारी और गिरफ्तारी
    • स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC), अमृतसर को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी अपने पुराने सैन्य संपर्कों का इस्तेमाल कर भारतीय सेना की गतिविधियों, युद्ध तैयारियों और फॉर्मेशन से जुड़ी गोपनीय जानकारियां जुटा रहा है।
    • आरोप है कि वह पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर्स को पैसे के बदले ये जानकारियां भेज रहा था। घटना वाले दिन उसे अमृतसर कैंटोनमेंट एरिया में बढ़ी हुई सैन्य गतिविधियों की जानकारी इकट्ठा करने का काम सौंपा गया था।
    • इसके बाद एफआईआर दर्ज की गई और 7 फरवरी 2026 को उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

🏛️ अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें

  • याचिकाकर्ता (पूर्व सैनिक के वकील) के तर्क
    • एडवोकेट कुलजीत सिंह बल ने तर्क दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और उसका 17 साल का सैन्य करियर बेदाग रहा है।
    • उन्हें किसी प्रतिबंधित या संवेदनशील सैन्य क्षेत्र से नहीं, बल्कि एक शादी समारोह से पकड़ा गया था।
    • एफआईआर में लगाए गए आरोप अस्पष्ट हैं और यह स्पष्ट नहीं करते कि कौन सी विशेष गोपनीय जानकारी भेजी गई। खातों में आए ₹3,000 का संबंध किसी पाकिस्तानी हैंडलर से नहीं, बल्कि उनके एक परिचित से है।
    • चूंकि जांच पूरी हो चुकी है, चालान पेश किया जा चुका है और हिरासत में पूछताछ की अब आवश्यकता नहीं है, इसलिए जमानत दी जानी चाहिए।
  • राज्य सरकार (सरकारी वकील) के तर्क
    • अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) साक्षी बक्षी ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि जांच के दौरान यह साबित हुआ है कि आरोपी लगातार पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों के संपर्क में था।
    • आरोपों की गंभीरता और देश की सुरक्षा, एकता तथा अखंडता पर इसके खतरे को देखते हुए नियमित जमानत का कोई आधार नहीं बनता।

⚖️ हाई कोर्ट का अंतिम निर्णय

हाई कोर्ट ने माना कि पूर्व सैनिक द्वारा सोशल मीडिया के जरिए विदेशी एजेंसियों के संपर्क में रहना और अपनी पूर्व सैन्य पहुंच का इस्तेमाल कर देश की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी भेजना एक अत्यंत गंभीर अपराध है।

अदालत ने नियमित जमानत याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियों का मामले के गुण-दोष (Merits of the case) पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और विचारण न्यायालय (Trial Court) स्वतंत्र रूप से मामले की सुनवाई आगे बढ़ाएगा।

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