Tuesday, September 29, 2026
HomeScam NoseSanjiv Chaturvedi: उत्तराखंड कैडर के व्हिसलब्लोअर IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़े...

Sanjiv Chaturvedi: उत्तराखंड कैडर के व्हिसलब्लोअर IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़े मामलों में सुनवाई से हटने का अनूठा रिकॉर्ड; अब तक 17 न्यायिक अधिकारी खुद को कर चुके हैं अलग

नई दिल्ली: भारतीय प्रशासनिक सेवा न्यायशास्त्र, व्हिसलब्लोअर संरक्षण और न्यायिक नैतिकता (Judicial Ethics) के तहत न्यायाधीशों द्वारा मुकदमों की सुनवाई से स्वयं को अलग करने (Judicial Recusal) के इतिहास में एक अत्यंत दुर्लभ और अभूतपूर्व स्थिति सामने आई है।

ताजा घटनाक्रम में 21 सितंबर 2026 को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), प्रधान पीठ नई दिल्ली के न्यायिक सदस्य राजवीर सिंह वर्मा (Rajveer Singh Verma) ने आईएफएस अधिकारियों के मूल्यांकन रिपोर्ट चैनल (Appraisal Report Channel / APAR) से संबंधित उत्तराखंड सरकार के नवंबर 2021 के एक आदेश को चुनौती देने वाली चतुर्वेदी की याचिका की सुनवाई से खुद को रीक्यूज कर लिया। रमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता एवं उत्तराखंड कैडर के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी (Sanjiv Chaturvedi) से जुड़े विभिन्न मुकदमों से अब तक 17 न्यायिक अधिकारी—जिनमें सर्वोच्च न्यायालय के 2 न्यायाधीश, उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 4 न्यायाधीश, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के 9 न्यायिक/प्रशासनिक सदस्य (पूर्व चेयरमैन सहित) और जिला न्यायपालिका के 2 न्यायाधीश शामिल हैं—विभिन्न अवसरों पर स्वयं को सुनवाई से अलग कर चुके हैं।

अधिकरण ने अपने आदेश में दर्ज किया:

“कुछ समय तक मामले की सुनवाई करने के पश्चात, माननीय श्री राजवीर सिंह वर्मा, सदस्य (न्यायिक), स्वयं को इस मामले की सुनवाई से अलग (Recuse) करते हैं। रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह मामले को उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करे और तदनुसार सूचित करे।”

विभिन्न न्यायिक स्तरों पर हुए 17 रीक्यूजल्स का विधिक वर्गीकरण

न्यायिक मंचरीक्यूज करने वाले जजों/अधिकारियों की संख्याप्रमुख न्यायिक व्यक्तित्व एवं वर्ष
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court)2 न्यायाधीश• न्यायमूर्ति रंजन गोगोई (नवंबर 2013)
• न्यायमूर्ति यू.यू. ललित (अगस्त 2016)
उत्तराखंड उच्च न्यायालय4 न्यायाधीश• न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल (मई 2023)
• न्यायमूर्ति मनोज तिवारी (फरवरी 2024)
• न्यायमूर्ति आलोक वर्मा (सितंबर 2025)
• न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी (अक्टूबर 2025)
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT)9 सदस्य/न्यायाधीश• पूर्व चेयरमैन न्यायमूर्ति एल. नरसिम्हा रेड्डी (जनवरी 2021)
• सदस्य राजीव जोशी (जनवरी 2025)
• हरविंदर ओबेरॉय एवं बी. आनंद की संयुक्त पीठ (फरवरी 2025)
• राजवीर सिंह वर्मा (21 सितंबर 2026) सहित 9 सदस्य
जिला न्यायपालिका (District Courts)2 न्यायिक अधिकारी• हरियाणा व अन्य से संबंधित पूर्ववर्ती मुकदमों में 2 जिला जज

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य एवं प्रमुख मामलों का कालक्रम

संजीव चतुर्वेदी द्वारा हरियाणा वन सेवा में तैनाती के दौरान उजागर किए गए घोटालों, एम्स (AIIMS) नई दिल्ली में मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) के रूप में किए गए भ्रष्टाचार-रोधी अभियानों और उसके बाद प्रतिनियुक्ति व सेवा उत्पीड़न को लेकर दायर याचिकाओं में रीक्यूजल का यह सिलसिला 2013 से अनवरत चला आ रहा है:

  1. सर्वोच्च न्यायालय में शुरुआती रीक्यूजल्स (2013 एवं 2016)
    • नवंबर 2013: तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट जज न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने चतुर्वेदी द्वारा अपने उत्पीड़न और हरियाणा में कथित भ्रष्टाचार के मामलों की सीबीआई (CBI) जांच की मांग वाली याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
    • अगस्त 2016: तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट जज न्यायमूर्ति यू.यू. ललित ने भी इस मामले की सुनवाई से खुद को रीक्यूज किया।
  2. कैट चेयरमैन का रीक्यूजल (जनवरी 2021)
    • कैट के तत्कालीन चेयरमैन न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एल. नरसिम्हा रेड्डी ने सिविल सेवकों के पैनल चयन (Empanelment Process) और निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की संयुक्त सचिव पदों पर सीधी भर्ती (Lateral Entry) के खिलाफ चतुर्वेदी की याचिका से खुद को अलग किया था।
  3. उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अवमानना व सेवा रिकॉर्ड के मामले (2023 से 2025):
    • मई 2023: न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने एम्स सीवीओ कार्यकाल की जांच से जुड़े दस्तावेजों के मामले से खुद को अलग किया।
    • फरवरी 2024: न्यायमूर्ति मनोज तिवारी ने कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति संबंधी गोपनीय दस्तावेज तलब करने की याचिका से रीक्यूज किया।
    • सितंबर-अक्टूबर 2025: उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आलोक वर्मा और न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी ने कैट सदस्यों और रजिस्ट्री के खिलाफ हाईकोर्ट के स्थगन आदेश की कथित अवमानना (Contempt Petition) मामले से खुद को अलग कर लिया था।
  4. कैट दिल्ली एवं नैनीताल पीठ में हालिया रीक्यूजल्स (2025-2026)
    • जनवरी 2025: सदस्य राजीव जोशी ने लोकपाल और प्रतिनियुक्ति मामले से रीक्यूज किया।
    • फरवरी 2025: हरविंदर ओबेरॉय और बी. आनंद की खंडपीठ ने वार्षिक कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) की ग्रेडिंग घटाने के मामले से खुद को अलग किया।
    • 21 सितंबर 2026: सदस्य राजवीर सिंह वर्मा ने 2021 के अपीलीय चैनल शासनादेश के खिलाफ याचिका से रीक्यूज किया।

Also Read; Commercial Dispute: जस्टिस उज्ज्वल भूयां की दो टूक…अदालतों के अस्थिर फैसले और वित्त मंत्रालय की नीतियां मध्यस्थता के लिए बड़ा झटका

विधिक एवं सांविधिक विश्लेषण: ‘न्यायिक रीक्यूजल’ का सिद्धांत और इसका प्रभाव

न्यायिक रीक्यूजल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 और प्राकृतिक न्याय के मूलभूत नियमों पर आधारित एक स्थापित विधिक व्यवस्था है:

  • प्राकृतिक न्याय का पहला स्तंभ — ‘नेमो जुडेक्स इन कॉसा सुआ’ (Nemo Judex In Causa Sua):
    • कोई भी व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता। यदि किसी न्यायाधीश का किसी पक्षकार, मामले के विषय, अथवा संबंधित प्रशासनिक संस्था से पूर्व संबंध या व्यक्तिगत असहजता हो, तो निष्पक्ष न्याय की रक्षा हेतु रीक्यूजल आवश्यक माना जाता है।
  • पूर्वाग्रह की वास्तविक आशंका (Real Apprehension of Bias):
    • सर्वोच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ (NJAC केस – 2016) में स्पष्ट किया था कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि जनता की नजर में होते हुए दिखना भी चाहिए। यदि किसी न्यायाधीश को लगता है कि निष्पक्षता पर लेशमात्र भी संदेह उठ सकता है, तो वह स्वेच्छा से पीछे हट सकता है।
  • कारण न दर्ज करने की न्यायिक परिपाटी:
    • उल्लेखनीय है कि अधिकांश मामलों में न्यायाधीश रीक्यूज करते समय विस्तृत कारण दर्ज नहीं करते (जैसा कि सदस्य राजवीर सिंह वर्मा के आदेश में हुआ)। Legend Officers
    • हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि एक ही याचिकाकर्ता के संदर्भ में 17 न्यायिक अधिकारियों का लगातार हटना वादकारी के त्वरित न्याय पाने के संवैधानिक अधिकार (Right to Speedy Adjudication) के समक्ष एक बड़ी प्रक्रियात्मक चुनौती खड़ी करता है, क्योंकि प्रत्येक रीक्यूजल के बाद नई पीठ गठित होने में महीनों का विलंब होता है।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: संजीव चतुर्वेदी (आईएफएस) बनाम उत्तराखंड राज्य सरकार व अन्य [मूल आवेदन – केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), प्रधान पीठ नई दिल्ली] Legend Officers
  • याचिका का विषय: उत्तराखंड सरकार द्वारा 2021 में जारी आईएफएस अधिकारियों की मूल्यांकन रिपोर्ट चैनल (APAR Channel) संबंधी शासनादेश की वैधानिकता को चुनौती।
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान
    • प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम, 1985 (Administrative Tribunals Act, 1985) की धारा 19 एवं धारा 25 (अध्यक्ष द्वारा मामलों को एक पीठ से दूसरी पीठ में स्थानांतरित करने की शक्ति)
    • अखिल भारतीय सेवा (गोपनीय रिपोर्ट) नियमावली / AIS (PAR) Rules, 2007
    • भारत का संविधान – अनुच्छेद 14 एवं 21 (निष्पक्ष विचारण एवं त्वरित न्याय का अधिकार)
    • प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Principles of Natural Justice – Bias Test)
  • संबद्ध ऐतिहासिक न्यायिक नजीरें:
    • सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ (NJAC Recusal – 2016, 5-जज संविधान पीठ) — ‘न्यायाधीश का रीक्यूजल न्यायिक निष्पक्षता को बनाए रखने का स्वेच्छाचारी विवेक है, परंतु बिना किसी ठोस पूर्वाग्रह या विधिक टकराव के केवल दबाव के कारण मामलों से हटना न्यायिक शपथ के विपरीत है।’
    • रणजीत ठाकुर बनाम भारत संघ (1987, सुप्रीम कोर्ट) — ‘पूर्वाग्रह का परीक्षण इस बात पर निर्भर करता है कि आम जनता और वादकारी के मन में उस पीठ के समक्ष निष्पक्ष सुनवाई को लेकर कोई उचित और तर्कसंगत आशंका मौजूद है या नहीं।’
  • अधिकरण की पीठ: राजवीर सिंह वर्मा, सदस्य (न्यायिक), कैट प्रधान पीठ, नई दिल्ली
  • अंतिम निर्देश: सदस्य (J) द्वारा सुनवाई से स्वयं को अलग करने के बाद पत्रावली कैट अध्यक्ष/रजिस्ट्री को प्रेषित; मामले को अन्य उपयुक्त पीठ के समक्ष नए सिरे से सूचीबद्ध करने का आदेश।

रिक्यूज़ल (Recusal) का घटनाक्रम: 2013 से 2026 तक

उच्चतम न्यायालय से शुरुआत:Year 2013 & 2016.

नवंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन जज जस्टिस रंजन गोगोई ने सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका से खुद को अलग किया। इसके बाद अगस्त 2016 में जस्टिस यू.यू. ललित ने भी यही कदम उठाया।

CAT व हाईकोर्ट के मामलों में सिलसिलेवार हटना:Year 2021 – 2025.

जनवरी 2021 में CAT चेयरमैन एल. नरसिम्हा रेड्डी और बाद में 2024-2025 के दौरान उत्तराखंड हाईकोर्ट के कई जजों ने अवमानना व केंद्रीय प्रतिनियुक्ति याचिकाओं से खुद को अलग कर लिया।

17वां रिक्यूज़ल (CAT दिल्ली):21 September 2026.

CAT जज राजवीर सिंह वर्मा ने APAR चैनल से जुड़ी याचिका पर कुछ देर सुनवाई करने के बाद खुद को मामले से अलग करने का आदेश दिया।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
broken clouds
32.3 ° C
32.3 °
32.3 °
61 %
2.8kmh
70 %
Tue
32 °
Wed
33 °
Thu
32 °
Fri
33 °
Sat
33 °

Recent Comments