Tuesday, September 29, 2026
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Teacher Recruitment Scam: 1998 के शिक्षक भर्ती ‘घोटाले’ में 8 लोगों की सजा रद्द; अदालत ने अभियोजन के दावों पर क्यों उठाए कड़े सवाल

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय न्यायाधीशन्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई (Justice Jai Kumar Pillai)
मामला1998 सांवरे जनपद पंचायत (इंदौर) शिक्षक कर्मी भर्ती
निचली अदालत का फैसला2010 में 8 आरोपियों को 2-2 साल की सजा व ₹10,000 जुर्माना
हाई कोर्ट का निर्णयदोषसिद्धि रद्द। सबूतों में कमियों, गवाहों के मुकरने और ठोस आपराधिक साक्ष्य न होने के कारण सभी अपीलें स्वीकार की गईं।

Teacher Recruitment Scam: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने वर्ष 1998 में इंदौर जिले की सांवरे जनपद पंचायत में हुई 207 शिक्षक भर्ती (शिक्षक कर्मी ग्रेड-III) के मामले में बड़ा निर्णय सुनाते हुए आठ आरोपियों की दोषसिद्धि (Conviction) को रद्द कर दिया है।

न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई (Justice Jai Kumar Pillai) की एकल पीठ ने 12 अगस्त 2010 को विशेष अदालत (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) द्वारा सुनाई गई 2 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा को खारिज कर दिया।

हाई कोर्ट की प्रमुख और कड़ी टिप्पणियां

  1. प्रशासनिक गलती और आपराधिक कृत्य में अंतर:“अभियोजन ने प्रशासनिक गलती (Administrative Fault) को आपराधिक कृत्य (Criminal Offence) के साथ गलत तरीके से मिला दिया है। यदि किसी पंचायत सदस्य ने अपने रिश्तेदार को नौकरी दिलाने के लिए पद का उपयोग किया है, तो उसे पंचायत अधिनियम के तहत पद से हटाया जा सकता है, लेकिन यह कार्रवाई अपने आप भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध नहीं बनाती। आपराधिक सजा के लिए बेईमानी का इरादा या रिश्वत लेना साबित होना अनिवार्य है, जिसके कोई सबूत नहीं मिले।”
  2. मुख्य शिकायतकर्ता और गवाहों का मुकरना (Hostile Witnesses)
    • अदालत ने पाया कि मामले के लगभग सभी प्रमुख शिकायतकर्ता और उम्मीदवार मुकदमे के दौरान मुकर गए।
    • उन्होंने स्पष्ट रूप से बयान दिया कि उन्होंने कोई शिकायत नहीं की थी और उनके हस्ताक्षर लोकायुक्त पुलिस के निर्देशों पर लिए गए थे। जब आधारभूत दस्तावेजों के निर्माता ही उनसे इनकार कर दें, तो मामला पूरी तरह संदिग्ध हो जाता है।
  3. असत्यापित फोटोकॉपी (Unverified Photocopies) पर सवाल
    • लोकायुक्त पुलिस ने रिश्तेदारों से संबंध साबित करने के लिए मतदाता सूची और परिवार रजिस्टर की केवल असत्यापित फोटोकॉपी पेश की थी।
    • तहसीलदार ने पूछताछ में स्वीकार किया कि मूल रिकॉर्ड न होने से वे इनका सत्यापन नहीं कर सके। कोर्ट ने माना कि बिना मूल रिकॉर्ड के केवल फोटोकॉपी पर सजा देना कानूनन गलत है।
  4. सामूहिक आपराधिक दायित्व (Vicarious Liability) का सिद्धांत लागू नहीं
    • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चयन समिति के अन्य सदस्यों द्वारा दिए गए अंकों के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) पर आपराधिक दायित्व नहीं थोपा जा सकता।

मामले का पृष्ठभूमि विवरण (Case Background)

  • भर्ती प्रक्रिया: सांवरे जनपद पंचायत में 1998 में 207 ‘शिक्षक कर्मी ग्रेड-III’ पदों के लिए भर्ती आयोजित की गई थी, जिसमें 2,539 आवेदनों में से 1,796 अभ्यर्थी साक्षात्कार में शामिल हुए थे।
  • लोकायुक्त की कार्रवाई: लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना (SPE) ने पक्षपात और भाई-भतीजावाद के आरोपों पर एफआईआर दर्ज की थी।
  • आरोप: चयन समिति के कुछ सदस्यों पर अपने रिश्तेदारों को अधिकतम अंक देने और अधिकारियों पर उनकी सहायता करने का आरोप लगाया गया था।

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