मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता एवं न्यायमूर्ति शील नागू |
| याचिकाकर्ता | प्यारे ज़िया खान (अध्यक्ष, महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग) |
| मुख्य मुद्दा | क्या RTE एक्ट और TET के नियम मदरसा, वैदिक पाठशालाओं और अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू हो सकते हैं? |
| पुराना फैसला (2014) | 2014 में अल्पसंख्यक संस्थानों को RTE से छूट दी गई थी, जिसकी अब बड़ी पीठ द्वारा समीक्षा की जा रही है। |
Minority Education: सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) एक महत्वपूर्ण याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया है, जिसमें यह सवाल उठाया गया है कि क्या मुफ्त और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के प्रावधान अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों, जिनमें मदरसा (Madrasas), वैदिक पाठशालाएं (Vedic Pathshalas) और धार्मिक शिक्षा देने वाले अन्य संस्थान शामिल हैं, पर लागू होने चाहिए या नहीं।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता (Justice Dipankar Datta) और न्यायमूर्ति शील नागू (Justice Sheel Nagu) की पीठ ने महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे ज़िया खान (Pyare Zia Khan) द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में RTE एक्ट और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की लागू करने की पेंडिंग मुख्य याचिका के साथ संबद्ध (Tag) कर दिया है।
सुनवाई के मुख्य बिंदु और महत्व
- 2014 के फैसले पर पुनर्विचार
- वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों (Minority Educational Institutions) को RTE अधिनियम के दायरे से बाहर (Exempted) रखा था।
- हालांकि, शीर्ष अदालत ने बाद में उस 2014 के निर्णय की सटीकता पर सवाल उठाए थे और इस मुद्दे को किसी बड़ी पीठ (Larger Bench) के समक्ष विचार के लिए भेजने की सिफारिश की थी।
- धार्मिक शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों की जांच
- नई याचिका में मुख्य रूप से यह समीक्षा करने की मांग की गई है कि क्या प्राथमिक रूप से धार्मिक शिक्षा देने वाले संस्थानों (जैसे मदरसा और वैदिक पाठशालाओं) को RTE अधिनियम के सुरक्षात्मक और मानकीकृत ढांचे से बाहर रखा जाना संवैधानिक रूप से उचित है।
- व्यापक प्रभाव (Wider Implications)
- यदि न्यायालय इस पर कोई नया निर्देश देता है, तो इसका अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के शैक्षणिक मानकों, बुनियादी ढांचे, शिक्षक योग्यता (TET) और सरकारी नियमन (Regulation) पर देशव्यापी प्रभाव पड़ेगा।

