Wednesday, September 30, 2026
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Deficiency in Service: गलत खाते में ट्रांसफर हुए ₹45,000, बैंक रकम रिकवर करने में विफल; बैंक को ₹65,000 चुकाने का दिया आदेश, पढ़िए केस

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
आयोगजिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, हरिद्वार
मूल राशि₹45,000 (गलत ट्रांसफर)
कुल हर्जाना/आदेश₹65,000 (₹45,000 रिफंड + ₹10,000 मुआवजा + ₹10,000 वाद व्यय)
मुख्य वजहतुरंत सूचना मिलने के बावजूद बैंक द्वारा गलत खाते से पैसे रिकवर न कर पाना।

Deficiency in Service: हरिद्वार जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission, Haridwar) ने एक निजी बैंक को सेवा में कोताही (Deficiency in Service) का दोषी ठहराते हुए पीड़ित ग्राहक को कुल ₹65,000 का भुगतान करने का आदेश दिया है।

यह मामला गलत खाते में ₹45,000 ट्रांसफर होने और तुरंत सूचना देने के बावजूद बैंक द्वारा राशि वापस न दिलवा पाने से जुड़ा है।

उपभोक्ता आयोग का आदेश और मुख्य बिंदु

अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता और सदस्य अमरेश रावत व रंजना गोयल की पीठ ने 21 जुलाई के अपने आदेश में बैंक को निर्देश दिया।

  1. मूल राशि का रिफंड: बैंक ग्राहक को गलत ट्रांसफर हुए ₹45,000 की पूरी रकम लौटाए।
  2. मानसिक प्रताड़ना का मुआवजा: ग्राहक को हुई मानसिक पीड़ा और परेशानी के लिए ₹10,000 का हर्जाना दे।
  3. मुकदमा खर्च (Litigation Cost): कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में ₹10,000 का भुगतान करे।

आयोग की टिप्पणी: “शिकायतकर्ता ने तुरंत बैंक को पर्याप्त जानकारी देकर सूचित कर दिया था कि राशि गलती से किसी अन्य व्यक्ति के खाते में चली गई है। बैंक ने 2 से 4 दिनों में रकम वापस कराने का आश्वासन दिया, लेकिन बार-बार संपर्क करने के बाद भी केवल खोखले आश्वासन ही दिए गए और राशि रिकवर नहीं की गई। यह बैंक की ओर से सेवा में स्पष्ट लापरवाही और कमी को दर्शाता है।”

मामले का विवरण (Case Details)

  • घटना: ग्राहक का सिविल लाइंस, रुड़की (Roorkee) स्थित बैंक शाखा में खाता था। 10 जनवरी 2019 को मोबाइल नेट बैंकिंग के जरिए अपने एक परिचित को पैसे भेजते समय गलती से ₹45,000 किसी अन्य व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर हो गए।
  • तुरंत शिकायत और आश्वासन: ग्राहक ने उसी दिन तुरंत बैंक को इसकी सूचना दी। बैंक ने आश्वासन दिया कि कुछ दिनों के भीतर उस व्यक्ति के खाते से राशि रिकवर कर ग्राहक के खाते में क्रेडिट कर दी जाएगी।
  • बैंक का ढुलमुल रवैया: बार-बार चक्कर काटने के बाद भी जब रकम वापस नहीं मिली और प्राप्तकर्ता व्यक्ति ने पैसे निकाल लिए, तो ग्राहक ने 19 मार्च 2019 को कानूनी नोटिस भेजा और बाद में उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
  • एकतरफा कार्रवाई (Ex-Parte Order): बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद बैंक आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ और अपना पक्ष नहीं रखा। इस वजह से आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और हलफनामे के आधार पर एकतरफा फैसला सुनाया।

उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण सबक (Key Takeaway)

यह फैसला यह स्पष्ट करता है कि यदि ग्राहक गलत खाते में पैसे ट्रांसफर होने की सूचना तुरंत बैंक को दे देता है, तो बैंक की जिम्मेदारी बनती है कि वह त्वरित कार्रवाई करे। केवल मौखिक आश्वासन देना और प्राप्तकर्ता को पैसे निकालने देना बैंक की गंभीर लापरवाही मानी जाएगी, जिसके लिए बैंक को हर्जाना भरना पड़ेगा।

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