Friday, July 10, 2026
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Delhi Police: 36 केस दिखाकर फंसाया, निकले सिर्फ 5…आप हो जाएंगे हैरान, दिल्ली पुलिस रिकॉर्ड में 17 फर्जी FIR दर्ज, जानिए यह अनोखा केस

Delhi Police: दिल्ली पुलिस द्वारा आरोपियों के आपराधिक इतिहास को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और रिकॉर्ड्स में गंभीर विसंगतियों को लेकर दिल्ली की साकेत कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

दिल्ली पुलिस के ‘स्टेट क्रिमिनल रिकॉर्ड्स ब्यूरो’ को दिए निर्देश

साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASG) सोनू अग्निहोत्री ने एक आरोपी को नियमित जमानत (Regular Bail) देते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर (Commissioner of Police) को निर्देश दिया है कि वे दिल्ली पुलिस के ‘स्टेट क्रिमिनल रिकॉर्ड्स ब्यूरो’ (SCRB) के डेटाबेस को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएं। दिल्ली पुलिस के आधिकारिक ‘क्रिमिनल इनवॉल्वमेंट रिकॉर्ड’ (आपराधिक संलिप्तता रिकॉर्ड) में किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसी 17 ई-एफआईआर (e-FIRs) दर्ज दिखा दी गईं, जिनमें न तो कभी उसकी गिरफ्तारी हुई और न ही चार्जशीट दाखिल की गई। बिना किसी कानूनी आधार के किसी नागरिक को इतने सारे मुकदमों में संलिप्त दिखा देना बेहद गंभीर और लापरवाही भरा रवैया है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर तुरंत हस्तक्षेप करें और इस गलत रिकॉर्ड को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाएं।

मामला क्या है?: ‘दादी बनने वाली हो’ बताने गए बेटे पर मां ने करा दी FIR

यह पूरा मामला किसी बड़े अपराध का नहीं, बल्कि महुआ और जायदाद के विवाद से जुड़े एक पारिवारिक झगड़े का नतीजा है।

घरेलू कलह: आरोपी अजय राठी (Ajay Rathi) का अपनी मां (शिकायतकर्ता) के साथ लंबे समय से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था।

घटना और आरोप: राठी के वकीलों ने अदालत को बताया कि अजय राठी अपनी पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के साथ अपनी मां के घर सिर्फ यह खुशखबरी देने गया था कि वह जल्द ही ‘दादी’ बनने वाली हैं। लेकिन वहां उनके बीच बहस हो गई, जिसके बाद मां ने बेटे के खिलाफ मैदान गढ़ी थाने में चोरी और अन्य आरोपों के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज करा दी।

बचाव पक्ष की दलील: वकीलों का आरोप था कि मां जिस घर में रह रही है, उस संपत्ति पर बेटा अपना हक न जता सके, इसलिए उस पर चोरी के झूठे आरोप लगाए गए। साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया कि अजय राठी का एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के साथ विवाद चल रहा था, जिसके चलते पुलिस ने दुश्मनी निकालने के लिए उसके क्रिमिनल रिकॉर्ड को फर्जी तरीके से बढ़ा दिया।

कोर्ट रूम ड्रामा: 36 मुकदमों की हवा कैसे निकली?

जब अजय राठी ने साकेत कोर्ट में नियमित जमानत के लिए अर्जी लगाई, तो सरकारी अभियोजक (Prosecution) ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। पुलिस के जांच अधिकारी (IO) ने कोर्ट के सामने आरोपी की जो ‘इनवॉल्वमेंट शीट’ (Involvement Sheet) पेश की, उसने सबको चौंका दिया।

पुलिस का दावा: पुलिस ने लिखित जवाब में दावा किया कि अजय राठी कोई सीधा-साधा इंसान नहीं है, बल्कि उसके खिलाफ पहले से 36 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

आरोपी का प्रतिवाद: राठी के वकीलों (मयंक शर्मा और विशाल यादव) ने इस लिस्ट को पूरी तरह फर्जी बताते हुए चुनौती दी और कहा कि उनका वास्तविक आपराधिक इतिहास इससे बहुत कम है।

कोर्ट का आदेश: दोनों पक्षों के दावों में भारी अंतर देखकर जज सोनू अग्निहोत्री ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह रिकॉर्ड का दोबारा सत्यापन (Verification) करे और एक ‘अपडेटेड इनवॉल्वमेंट रिपोर्ट’ कोर्ट में दाखिल करे।

सत्यापन में खुली पोल: 17 ई-एफआईआर पूरी तरह फर्जी निकलीं

जब पुलिस ने कोर्ट के डंडे के बाद अपने रिकॉर्ड्स को खंगाला, तो पुलिस की थ्योरी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। 7 जुलाई, 2026 को जारी अपने आदेश में कोर्ट ने पाया।

बिना गिरफ्तारी के दर्ज थे केस: महरौली थाने में साल 2017 में दर्ज कम से कम 17 ई-एफआईआर (e-FIRs) में अजय राठी का नाम बिना किसी गिरफ्तारी या आरोप पत्र के सीधे संलिप्त (Involved) दिखा दिया गया था।

सिर्फ 5 मामले ही निकले वास्तविक: अंतिम सत्यापन के बाद यह साफ हो गया कि राठी कुल मिलाकर केवल 5 मामलों में शामिल था (इस वर्तमान मामले को मिलाकर)।

3 केस पहले ही बंद: उन 5 मामलों में से भी 3 मामले अदालतों द्वारा पहले ही निपटाए (Disposed of) जा चुके थे। यानी वर्तमान में उस पर इस केस के अलावा कोई बड़ा सक्रिय इतिहास नहीं था। अदालत ने पुलिस की इस लापरवाही पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, जांच अधिकारी द्वारा दाखिल रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि दिल्ली पुलिस के SCRB रिकॉर्ड में आरोपी की झूठी संलिप्तता दिखाई गई थी। किसी भी एफआईआर में बिना गिरफ्तारी के यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी उसमें शामिल था। यह गलत रिकॉर्ड इस जमानत अर्जी के नतीजे को प्रभावित कर सकता था।”

कोर्ट का अंतिम फैसला और जमानत

अदालत ने यह भी नोट किया कि इस मामले में शामिल दो अन्य सह-आरोपियों को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है क्योंकि सीसीटीवी (CCTV) और होटल के रिकॉर्ड से साबित हुआ था कि वे अपराध के समय वहां मौजूद ही नहीं थे। दो अन्य सह-आरोपियों को भी नियमित जमानत मिल चुकी है। केस के इन तथ्यों, पारिवारिक विवाद की प्रकृति और पुलिस रिकॉर्ड की कलई खुलने के बाद, कोर्ट ने अजय राठी को नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया। मामले में राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक प्रवीन राहुल पेश हुए थे।

केस शीट: दिल्ली जिला न्यायालय निर्देश (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांसाकेत अदालत की विधिक स्थिति और निर्देश
संबंधित अदालतसाकेत कोर्ट ( Saket Courts), नई दिल्ली
माननीय न्यायाधीशअतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोनू अग्निहोत्री
मामले का शीर्षकराज्य बनाम अजय राठी (State v. Ajay Rathi)
संबंधित पुलिस स्टेशनमैदान गढ़ी (वर्तमान FIR) / महरौली (पुरानी e-FIRs)
पुलिस का दावा बनाम हकीकतदावा: 36 मामले
अदालत का अंतिम आदेशआरोपी को नियमित जमानत मंजूर; दिल्ली पुलिस कमिश्नर को SCRB रिकॉर्ड दुरुस्त करने के कड़े निर्देश।
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