Tuesday, August 4, 2026
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Adoption Law Verdict: रजिस्ट्रेशन से तय नहीं होता गोद लेने का समय…बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट की गोद लेने की कानूनी स्थिति

Adoption Law Verdict: मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने गोद लेने की प्रक्रिया (Adoption) और अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) के संबंध में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है।

कोर्ट ने साफ किया है कि गोद लेने का दस्तावेज (Adoption Deed) उसके निष्पादन (Execution) यानी जिस दिन वह बना, उसी दिन से प्रभावी माना जाता है, न कि उसके पंजीकरण (Registration) की तारीख से। यह मामला गोंदिया के एक युवक का है जिसे जिला परिषद (ZP) ने इस आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था कि उसके गोद लेने का दस्तावेज उसके पिता की मृत्यु के बाद रजिस्टर्ड हुआ था।

मुख्य कानूनी विवाद (The Core Dispute)

  • घटनाक्रम: याचिकाकर्ता के दत्तक पिता (Adoptive Father), जो एक जिला परिषद शिक्षक थे, की मृत्यु 8 जुलाई, 2015 को सेवा के दौरान हुई।
  • दस्तावेज: गोद लेने का डीड 24 अक्टूबर, 2003 को तैयार (Execute) हुआ था, लेकिन इसका औपचारिक पंजीकरण (Registration) पिता की मृत्यु के बाद 14 अक्टूबर, 2015 को कराया गया।
  • ZP का तर्क: अधिकारियों ने यह कहकर उसका नाम वेटिंग लिस्ट से हटा दिया कि पिता की मृत्यु के समय वह ‘कानूनी रूप से’ गोद लिया हुआ पुत्र नहीं था, क्योंकि रजिस्ट्रेशन बाद में हुआ।

हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (The Verdict)

  • जस्टिस मुकुलिका जवलकर और जस्टिस नंदेश देशपांडे की डिवीजन बेंच ने जिला परिषद के निर्णय को “कानूनी रूप से अस्थिर” (Legally Untenable) करार दिया।
  • रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA) के तहत गोद लेने के दस्तावेज का अनिवार्य पंजीकरण आवश्यक नहीं है। यह एक वैकल्पिक प्रक्रिया है।
  • प्रभावी तारीख: कानून के अनुसार, एक रजिस्टर्ड दस्तावेज उसी तारीख से प्रभावी माना जाता है जिस दिन वह निष्पादित (Execute) किया गया था। चूंकि डीड 2003 में बनी थी, इसलिए वह 2003 से ही प्रभावी है।
  • अधिकारों की सुरक्षा: पिता की मृत्यु के बाद रजिस्ट्रेशन होना उस गोद लेने की वैधता को कम या खत्म नहीं करता जो वर्षों पहले कानूनी रूप से हो चुका था।

वेटिंग लिस्ट और प्रशासनिक संतुष्टि

स्वीकृति का संकेत: याचिकाकर्ता का नाम 2016 से 2023 तक वेटिंग लिस्ट में शामिल था। कोर्ट ने कहा कि इतने वर्षों तक नाम लिस्ट में रखना इस बात का प्रमाण है कि अधिकारियों ने पहले उसकी पात्रता (Eligibility) को स्वीकार कर लिया था। अब अचानक उसे हटाना गलत है।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
याचिकाकर्तागोंदिया निवासी (दत्तक पुत्र)।
प्रतिवादीजिला परिषद (Zilla Parishad)।
कानूनी प्रावधानहिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA)।
कोर्ट का आदेशयुवक का नाम मूल स्थिति (Original Position) में वेटिंग लिस्ट में बहाल किया जाए।
महत्वपूर्ण संदेशगोद लेने की प्रक्रिया में ‘इरादा’ और ‘निष्पादन’ (Execution) सबसे महत्वपूर्ण हैं।

न्याय की बहाली

बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला उन हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत है जहाँ गोद लेने की प्रक्रिया तो पूरी हो जाती है लेकिन कानूनी औपचारिकताओं (जैसे रजिस्ट्रेशन) में देरी हो जाती है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘प्रक्रियात्मक देरी’ किसी के ‘मौलिक अधिकार’ (जैसे अनुकंपा नियुक्ति) को नहीं छीन सकती।

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