Saturday, August 15, 2026
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Ayodhya Ram Mandir: 15 हजार सैलरी पर 65 लाख का घर, फार्महाउस और SUV! चंदा चोरी के आरोपी अनुकल्प मिश्रा की यहां बात हो रही है, पढ़िए

Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर चंदा चोरी मामले में गिरफ्तार 22 वर्षीय आरोपी अनुकल्प मिश्रा की अकूत संपत्ति अब यूपी पुलिस के रडार पर है।

पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या यह सब मंदिर के चंदे में की गई हेराफेरी की रकम से खड़ा किया गया है। महज 15,000 रुपये महीने की सैलरी पाने वाले इस युवक की आलीशान लाइफस्टाइल और संपत्तियों को देखकर जांचकर्ता भी हैरान हैं।

रडार पर आरोपी की ये आलीशान संपत्तियां

₹65 लाख का आलीशान घर: आरोपी ने पिछले साल ही अयोध्या के कौशलपुरी इलाके में एक घर खरीदा था, जिसकी मौजूदा कीमत करीब 65 लाख रुपये आंकी जा रही है।

नया नवेला फार्महाउस: अपने पैतृक गांव ‘बसावा’ के बाहरी इलाके में अनुकल्प ने एक नया फार्महाउस भी बनवाया है।

महिंद्रा स्कॉर्पियो (SUV) की बुकिंग: गिरफ्तारी से ठीक पहले आरोपी ने एक महंगी स्कॉर्पियो गाड़ी भी बुक की थी, जिसकी कागजी कार्रवाई पुलिस खंगाल रही है।

₹1 लाख से ज्यादा की बाइक: महज 15 हजार की नौकरी होने के बावजूद उसने हाल ही में एक लाख रुपये से अधिक कीमत की मोटरसाइकिल खरीदी थी।

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कैसे खुली पोल और अब आगे क्या?

रविवार को पुलिस ने जब अनुकल्प के घर पर छापेमारी की, तो वहां से संपत्ति से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद हुए, जिसके बाद इस वित्तीय जांच (Financial Probe) ने रफ्तार पकड़ी।

बैंक खातों और टैक्स रिटर्न की जांच: पुलिस अब आरोपी के बैंक रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी के कागजात, सेल डीड और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) की जांच कर रही है ताकि उसकी कमाई और खर्च के अंतर को समझा जा सके।

बाकी आरोपियों पर भी शिकंजा: पुलिस सिर्फ अनुकल्प ही नहीं, बल्कि इस मामले में गिरफ्तार अन्य सभी आरोपियों की चल-अचल संपत्ति और उनके पैसों के लेन-देन (Money Trail) की पूरी कुंडली खंगाल रही है। यह जांच अयोध्या के बाहर अन्य जिलों तक भी जाएगी, जहां के ये आरोपी रहने वाले हैं।

राम मंदिर चंदा चोरी मामले (Ram Temple Donation Theft Case) के मुख्य आरोपियों में से एक अनुकल्प मिश्रा के प्रोफाइल और उसकी संपत्तियों को लेकर जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस जांच, एसआईटी (SIT) रिपोर्ट और जमीनी पड़ताल से जो जानकारियां सामने आई हैं, उनका विवरण इस प्रकार है।

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अनुकल्प मिश्रा का प्रोफाइल (Profile)

उम्र और नौकरी: अनुकल्प मिश्रा की उम्र महज 22 वर्ष है। वह राम मंदिर में आने वाले कैश चढ़ावे/चंदे को गिनने और उसे मैनेज करने वाली एक आउटसोर्स टीम (Outsourced Team) का हिस्सा था।

मुख्य साजिशकर्ता (Key Conspirator): पुलिस और जांचकर्ताओं के अनुसार, अनुकल्प को इस पूरे चंदा चोरी घोटाले का एक मुख्य साजिशकर्ता (Mastermind) माना जा रहा है। उसने मंदिर के चंदा प्रबंधन सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

नेटवर्क: अनुकल्प ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए अपने सगे साले (Brother-in-law) लवकुश मिश्रा को भी इसी कैश-काउंटिंग टीम में शामिल करवा दिया था। पुलिस का मानना है कि रिश्तेदारों को शामिल करने के पीछे मकसद एक सुरक्षित नेटवर्क बनाना था ताकि चोरी पकड़ी न जा सके। लवकुश के घर से पुलिस ने करीब ₹10 लाख कैश भी बरामद किया है (कुछ शुरुआती रिपोर्टों में ₹1 लाख की रिकवरी भी बताई गई थी)।

अकूत संपत्ति और आलीशान लाइफस्टाइल (Assets Under Scanner)

सिर्फ 15 हजार रुपये महीने कमाने वाले अनुकल्प की लाइफस्टाइल और संपत्तियों में पिछले कुछ वर्षों में अचानक भारी उछाल आया, जो अब जांच के घेरे में हैं।

अयोध्या में आलीशान मकान: अनुकल्प ने अयोध्या की सबसे वीआईपी कॉलोनियों में से एक ‘कौशलपुरी कॉलोनी’ में एक घर खरीदा था। पुलिस और सरकारी सूत्रों के अनुसार इसकी मौजूदा कीमत ₹65 लाख के करीब आंकी जा रही है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में इसे ₹40 से ₹50 लाख मूल्य का बताया गया है। पड़ोसियों के मुताबिक, परिवार पहले किराए पर रहता था लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति तेजी से बदली।

पैतृक गांव में फार्महाउस: अयोध्या जिले में स्थित अपने पैतृक गांव ‘बसावा’ के बाहरी इलाके में अनुकल्प ने हाल ही में एक नया फार्महाउस बनवाया है। गांव में उसका पैतृक घर भी आसपास के बाकी मकानों की तुलना में काफी भव्य और आलीशान है।

भव्य धार्मिक आयोजन: इस साल अप्रैल (30 अप्रैल 2026) को अनुकल्प ने अपने गांव में एक बेहद खर्चीला 7 दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में राम मंदिर स्थापना से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी और कई स्थानीय जन-प्रतिनिधि (वीआईपी) शामिल हुए थे। पुलिस इस आयोजन में हुए खर्च के स्रोत की भी जांच कर रही है।

पढ़ाई और शुरुआती जीवन

मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि: अनुकल्प मिश्रा का परिवार मूल रूप से अयोध्या जिले के बसावा गांव का रहने वाला है। वह एक बेहद साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखता था।

सैलरी वाली नौकरी: अपनी पढ़ाई पूरी करने या तकनीकी रूप से सक्षम होने के बाद, अनुकल्प को अयोध्या में एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए नौकरी मिली। उसे राम मंदिर में आने वाले कैश चढ़ावे और चंदे को गिनने व उसे मैनेज करने वाली डिजिटल/कैश-काउंटिंग टीम में शामिल किया गया था, जहाँ उसकी मासिक सैलरी महज ₹15,000 थी।

परिवार और उनका पक्ष

आर्थिक स्थिति में अचानक बदलाव: अनुकल्प के पड़ोसियों और रिश्तेदारों के अनुसार, पहले यह परिवार किराए के मकान में रहता था। लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट की आउटसोर्सिंग टीम में शामिल होने के बाद, पिछले कुछ वर्षों में परिवार की आर्थिक स्थिति में अचानक संदेहास्पद रूप से बहुत बड़ा और हैरान करने वाला उछाल आया।

चाची के गंभीर आरोप: अनुकल्प की चाची (नेहा मिश्रा) ने पुलिस और मीडिया के सामने खुलकर बयान दिया कि राम मंदिर से जुड़ने के बाद अनुकल्प और उसके परिवार के पास अचानक अकूत संपत्ति और पैसा आने लगा था।

बहन का बचाव: दूसरी तरफ, अनुकल्प की बहन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उसका दावा है कि उसके भाई को इस मामले में “फंसाया जा रहा है” और जो मकान पुलिस के रडार पर है, वह दो साल पहले पूरी तरह वैध तरीके से खरीदा गया था। उसने अपनी चाची के आरोपों को पारिवारिक और संपत्ति विवाद के कारण पैदा हुई रंजिश बताया है।

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