केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (2026) |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार गुप्ता (दिल्ली उच्च न्यायालय) |
| संबंधित कानून/विभाग | Income Tax Act, 1961 — सर्च और सीज़र से जुड़ी रिफंड व रिलीज प्रक्रियाएँ |
| मुख्य मुद्दा | कोई टैक्स बकाया न होने के बावजूद 13 वर्षों तक जब्त आभूषण व अतिरिक्त राशि न लौटाना। |
| विभाग की प्रतिक्रिया | आभूषण रिलीज कर दिए गए हैं; ब्याज सहित रिफंड 4 सप्ताह में जारी कर दिया जाएगा। |
| अदालत का अंतरिम निर्देश | 13 साल की देरी का कारण बताते हुए व्यापक हलफनामा दाखिल करने का आदेश; अगली सुनवाई 22 सितंबर। |
Seized Jewellery By I-Tax: दिल्ली हाईकोर्ट ने आयकर विभाग (Income Tax Department) द्वारा एक करदाता के जब्त गहनों (Seized Jewellery) को लौटाने में हुई 13 साल की अत्यधिक देरी पर कड़ा रुख अपनाया है।
यह निर्देश न्यायमूर्ति दिनेश मेहता (Justice Dinesh Mehta) और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार गुप्ता (Justice Rajneesh Kumar Gupta) की पीठ ने याचिकाकर्ता की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। अदालत ने विभाग को एक “व्यापक हलफनामा” (Comprehensive Affidavit) दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि बिना किसी लंबित कर मांग (Tax Demand) के इतने लंबे समय तक जेवर क्यों रोके रखे गए।
हाई कोर्ट की मुख्य व महत्वपूर्ण टिप्पणियां
- अफसरशाही और लालफीताशाही पर तल्ख टिप्पणी:“वर्तमान युग में, जब कोई करदाताओं और एसेसी से ईमानदारी व सत्यनिष्ठा की उम्मीद करता है, तो अधिकारियों से कम से कम यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने कानूनी कर्तव्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करें।”
- “चौंकाने वाली स्थिति” (Shocking State of Affairs): इससे पहले के आदेश में अदालत ने विभाग के आचरण को “अहंकारी और लालफीताशाही” (High-handedness and red-tapism) वाला करार दिया था और कहा था कि जब करदाता पर कोई टैक्स बकाया नहीं है, तो उसके जब्त पैसे व जेवर रोके रखना बेहद चौंकाने वाला मामला है।
मामला क्या था? (Case Background)
- 2010 की जब्ती और 2013 का असेसमेंट
- सितम्बर 2010 में आयकर विभाग ने याचिकाकर्ता के परिसरों से ₹32.50 लाख की नकदी और ₹23.16 लाख मूल्य के आभूषण जब्त किए थे।
- वर्ष 2013 के असेसमेंट आदेश के अनुसार, जब्त की गई रकम में से ₹22.53 लाख को कर मांग में समायोजित (Adjust) कर लिया गया था, लेकिन बकाया रिफंड राशि और जब्त जेवर याचिकाकर्ता को नहीं लौटाए गए।
- 13 साल तक चक्कर और अनदेखी
- याचिकाकर्ता पर कोई टैक्स देनदारी शेष न होने के बावजूद, विभाग को दी गई उसकी बार-बार की अर्जियों (Representations) को अनसुना कर दिया गया। मजबूरी में याचिकाकर्ता को दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करना पड़ा।
- अदालत का रुख और विभाग का जवाब
- हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद आयकर विभाग ने पीठ को सूचित किया कि जब्त जेवर अब जारी कर दिए गए हैं और बकाया रिफंड राशि भी ब्याज सहित 4 सप्ताह के भीतर चुका दी जाएगी।
- हालांकि, पीठ केवल जेवर लौटाने से संतुष्ट नहीं हुई। कोर्ट ने असेसिंग ऑफिसर (AO) से न केवल उनके पद संभालने (21.05.2025) के बाद की अवधि, बल्कि उससे पहले की पूरी 13 साल की अवधि में हुई देरी का विस्तृत कारण बताते हुए हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया।
⚖️ आगे क्या होगा?
- व्यापक हलफनामा (Comprehensive Affidavit): असेसिंग ऑफिसर को 13 साल तक जब्ती रोके रखने के कारणों का ब्योरा देना होगा।
- अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर (2026) को तय की गई है।

