Tuesday, August 4, 2026
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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के छिंदवाड़ा में शव दफनाने का कुछ यूं हुआ मामला…सुप्रीम कोर्ट पहुंचा फरीयादी

Chhattisgarh News: सुप्रीम कोर्ट ने ईसाई व्यक्ति की याचिका पर छत्तीसगढ़ सरकार को फटकार लगाई। सरकार को नोटिस देते हुए कहा, ग्राम पंचायत को छोड़िए, उच्च न्यायालय ने भी एक अजीब आदेश पारित किया है। अब राज्य सरकार क्या कर रही है।

7 जनवरी को जगदलपुर जिला अस्पताल में रखा रहा था शव

न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने आश्चर्य व्यक्त किया कि शव 7 जनवरी से जगदलपुर के जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के शवगृह में पड़ा हुआ था। उस व्यक्ति की मृत्यु हो गई और पुलिस ने तब से कोई कार्रवाई नहीं की है। शीर्ष अदालत महरा जाति से संबंधित रमेश बघेल द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा जारी एक प्रमाण पत्र पर भरोसा करते हुए कि ईसाइयों के लिए कोई अलग कब्रिस्तान नहीं है, उच्च न्यायालय ने उन्हें यह कहते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया कि इससे बड़े पैमाने पर जनता में अशांति और वैमनस्य पैदा हो सकता है।

छिंदवाड़ा गांव के हैं रमेश बघेल, यह है उनके पिता के शव दफनाने का मामला

रमेश बघेल के पिता पादरी थे। पादरी की लंबी उम्र की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई। बघेल के अनुसार, छिंदवाड़ा गांव में शवों को दफनाने और दाह संस्कार के लिए ग्राम पंचायत द्वारा मौखिक रूप से आवंटित एक कब्रिस्तान है। इस गांव के कब्रिस्तान में आदिवासियों को दफनाने के लिए, हिंदू धर्म के लोगों को दफनाने या दाह संस्कार के लिए और ईसाई समुदाय के लोगों को दफनाने के लिए अलग-अलग जगह निर्धारित की गई है। ईसाइयों के लिए निर्दिष्ट क्षेत्र में, याचिकाकर्ता की चाची और दादा को इस गांव के कब्रिस्तान में दफनाया गया है।

ग्रामीणों ने रमेश बघेल को शव दफनाने पर गंभीर परिणाम की धमकी

याचिका में कहा गया कि अपने पिता की मृत्यु के बाद, याचिकाकर्ता और उसका परिवार अपने पिता का अंतिम संस्कार करना चाहते थे और उनके पार्थिव शरीर को उपरोक्त गांव के कब्रिस्तान में ईसाई व्यक्तियों के लिए निर्दिष्ट क्षेत्र में दफनाना चाहते थे। इसके बारे में सुनकर कुछ ग्रामीणों ने इस पर आक्रामक रूप से आपत्ति जताई और उन्होंने याचिकाकर्ता और उसके परिवार को इस भूमि में याचिकाकर्ता के पिता को दफनाने पर गंभीर परिणाम की धमकी दी। वे याचिकाकर्ता के परिवार को निजी स्वामित्व वाले भूमि में याचिकाकर्ता के परिवार को शव को दफनाने की अनुमति भी नहीं दे रहे हैं।

शव को गांव से बाहर ले जाने का डाला दबाव

बघेल ने तर्क दिया कि ग्रामीणों के अनुसार, किसी ईसाई को उनके गांव में दफनाया नहीं जा सकता, चाहे वह गांव का कब्रिस्तान हो या उसकी अपनी निजी जमीन। जब ग्रामीण हिंसक हो गए, तो याचिकाकर्ता के परिवार ने पुलिस को रिपोर्ट दी, जिस पर 30-35 पुलिसकर्मी गांव पहुंचे। पुलिस ने परिवार पर शव को गांव से बाहर ले जाने के लिए भी दबाव डाला। याचिका में कहा गया है, उन्होंने यह भी धमकी दी है कि अगर शव को उनके गांव में ईसाई रीति-रिवाज के अनुसार दफनाया गया तो वे याचिकाकर्ता और उसके परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। अब सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई 20 जनवरी को होगी।

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