Saturday, July 25, 2026
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Child Custody: बच्चे को मानसिक तनाव देना वकालत के सिद्धांतों के खिलाफ…बिना इजाजत मासूम से बात करने वाले वकील पर यूं हुई सख्ती

Child Custody: बच्चे की कस्टडी (Child Custody) से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में केरल हाई कोर्ट ने एक अज्ञात वकील की गैर-जिम्मेदाराना हरकत पर भारी नाराजगी जताई है।

केरल हाईकोर्ट के जस्तिस जे. निशा बानू और जस्टिस शोभा अन्नम्मा ईपन की खंडपीठ ने इस घटना को न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप मानते हुए हाई कोर्ट रजिस्ट्री को आदेश दिया है कि संबंधित वकील की पहचान की जाए और घटना के समय की सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने पाया कि अदालती कार्यवाही के दौरान एक वकील ने बिना इजाजत (Unauthorised Interaction) 6 साल के एक बच्चे से बात की, जिससे वह मासूम बुरी तरह सहम गया और मानसिक तनाव (Emotional Distress) में आ गया।

अदालत ने वकीलों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाते हुए एक बेहद मार्मिक टिप्पणी की। कहा, वकील केवल अपने मुवक्किल (Client) के प्रतिनिधि नहीं होते, बल्कि वे अदालत के अधिकारी (Officers of the Court) भी होते हैं। उनका कर्तव्य न्याय व्यवस्था की रक्षा करना और कानूनी प्रक्रियाओं में शामिल संवेदनशील लोगों, विशेषकर बच्चों के हितों का ख्याल रखना है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से पहले बच्चा पूरी तरह सहज और खुश था। अगर ऐसा न हुआ होता, तो हम बच्चे से खुलकर बात कर पाते और किसी सही निष्कर्ष पर पहुंच पाते।

क्या थी पूरी घटना? (बदल गया हंसते-खेलते बच्चे का व्यवहार)

यह पूरा विवाद एक 6 साल के बच्चे की कस्टडी को लेकर है, जहां मां ने फैमिली कोर्ट के अंतरिम कस्टडी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट स्वतंत्र रूप से यह आंकना चाहता था कि बच्चे की भलाई (Welfare) किस माता-पिता के साथ रहने में है।

पिता की उपस्थिति पर रोक: 5 जून (शुक्रवार) को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जानबूझकर पिता को व्यक्तिगत रूप से अदालत में आने से छूट दी थी ताकि दोनों में से किसी भी माता-पिता के प्रभाव के बिना बच्चे से न्यायाधीशों के चैंबर में स्वतंत्र रूप से बात की जा सके।

सुबह बच्चा खुश था: मां सुबह बच्चे को लेकर कोर्ट पहुंची थी। सुबह के वक्त बच्चा बेहद ऊर्जावान, सहज और खुश दिखाई दे रहा था।

वकील की बिना सोचे-समझे की गई हरकत: जब बच्चा कोर्ट रूम में अपनी मां के साथ इंतजार कर रहा था, तब एक अज्ञात पुरुष वकील उसके पास गया और चुपके से कह दिया कि तुम्हारे पापा नीचे (सीढ़ियों के पास) तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं।

सहम गया मासूम: वकील की इस बात का 6 साल के बच्चे पर ऐसा मनोवैज्ञानिक असर पड़ा कि उसका व्यवहार पूरी तरह बदल गया। जब उसे जजों के चैंबर में ले जाया गया, तो वह अपनी मां का हाथ कसकर पकड़े रहा, बुरी तरह डरा हुआ और बेचैन था, और उसने मां का साथ छोड़ने से साफ मना कर दिया।

कोर्ट ने सीसीटीवी की जांच की, पिता भी परिसर में मौजूद थे

हाई कोर्ट ने जब अदालती कार्यवाही के वीडियो रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो पाया कि एक वकील ने वाकई कोर्ट रूम में प्रवेश कर बच्चे से बात की थी। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी नोट किया कि हालांकि पिता को कोर्ट बिल्डिंग के भीतर आने की अनुमति नहीं थी, लेकिन वे भी उस समय अदालत परिसर (Premises) में ही मौजूद थे।

विश्लेषण: हाई कोर्ट द्वारा उठाए गए कड़े कदम और अंतरिम आदेश

अदालत ने बच्चे के मानसिक आघात (Trauma) को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से निर्देश जारी किए हैं।

जारी किए गए निर्देशउद्देश्य और अनुपालन
वकील की पहचान का आदेशहाई कोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह केरल हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और बार काउंसिल ऑफ केरल की मदद से उस अज्ञात वकील की पहचान करे।
चाइल्ड सपोर्ट लॉयर (CSL) की नियुक्तिकोर्ट ने केरल कानूनी सेवा प्राधिकरण (KeLSA) के तहत ‘चाइल्ड लीगल असिस्टेंस प्रोग्राम’ (CLAP) की एडवोकेट तनुजा रोशन को चाइल्ड सपोर्ट लॉयर नियुक्त किया है। वह बच्चे और माता-पिता से बात कर एक स्वतंत्र रिपोर्ट सौंपेंगी।
कस्टडी मां के पास रहेगीवकील द्वारा दी गई जानकारी से बच्चे में पैदा हुए तनाव और बेचैनी को देखते हुए कोर्ट ने फिलहाल बच्चे की अंतरिम कस्टडी मां के पास ही बनाए रखने का फैसला किया है।
मध्यस्थता (Mediation) को मंजूरीचूंकि दोनों पक्ष आपसी समझौते के लिए तैयार हैं, इसलिए मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया गया है।
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