पूरा मामला और CIC की मुख्य टिप्पणियां
- 2018 से बंद की गई थी व्यवस्था: अपीलकर्ता अनिकेत कुमार गुप्ता ने आरटीआई के तहत पिछले 10 वर्षों में चयनित उम्मीदवारों के जनरल स्टडीज (GS), ऑप्शनल विषयों और पर्सनैलिटी टेस्ट के अलग-अलग अंकों की जानकारी मांगी थी। उन्होंने बताया कि CSE 2017 तक यूपीएससी पेपर-वार अंक जारी करता था, लेकिन 2018 के बाद से केवल कुल अंक (Aggregate Marks) ही बताए जा रहे हैं।
- बिना किसी आदेश के बंद हुआ विस्तृत डेटा: सुनवाई के दौरान कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने माना कि विस्तृत अंकों का प्रकाशन बंद करने का कोई आधिकारिक आदेश, फाइल नोटिंग या ऑफिस मेमोरेंडम (OM) रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं है।
- UPSC और DoPT के तर्कों को नकारा:
- DoPT का तर्क: कोचिंग संस्थान किसी खास ऑप्शनल विषय को “हाई स्कोरिंग” बताकर छात्रों का व्यावसायिक शोषण कर सकते हैं।
- UPSC का तर्क: यह व्यक्तिगत जानकारी (Personal Information) है।
- CIC का रुख: आयोग ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि एक संवैधानिक संस्था (UPSC) में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के विश्वास को बनाए रखने के लिए यह डेटा सार्वजनिक होना बेहद जरूरी है।
- धारा 25(5) के तहत DoPT को एडवाइजरी: सीआईसी ने आरटीआई अधिनियम की धारा 25(5) के तहत DoPT को औपचारिक सलाह जारी की। यह धारा आयोग को किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण (Public Authority) को आरटीआई की भावना के अनुरूप काम करने की सिफारिश करने का अधिकार देती है।
CIC का अंतिम आदेश
- अपीलकर्ता को राहत: आयोग ने DoPT को निर्देश दिया कि वह आदेश मिलने के 3 हफ्तों के भीतर अपीलकर्ता को CSE 2018 से CSE 2023 तक के सफल उम्मीदवारों के विषय-वार अंकों का पूरा डेटा प्रदान करे।
- भविष्य के लिए सिफारिश: DoPT को विस्तृत अंक प्रकाशित करने की पुरानी व्यवस्था तुरंत बहाल करने की सलाह दी गई है।
नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा (Civil Services Examination – CSE) में अंतिम रूप से चयनित और अनुशंसित (Recommended) अभ्यर्थियों के पेपर-वार/विषय-वार अंकों (Detailed Paper-wise Marks Break-up) को सार्वजनिक करने की पारदर्शी व्यवस्था को फिर से बहाल करने के संबंध में केंद्र सरकार को एक महत्वपूर्ण विधिक सलाह (Advisory) जारी की है।
सूचना आयुक्त जया वर्मा सिन्हा ने 24 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में माना कि वर्ष 2018 से पूर्व सफल अभ्यर्थियों के सामान्य अध्ययन, वैकल्पिक विषयों और साक्षात्कार के अंक सार्वजनिक किए जाते थे, जिसे बाद में बिना किसी आधिकारिक नीतिगत निर्णय (Policy Decision) या फाइल नोटिंग के मनमाने ढंग से बंद कर दिया गया था। आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) की धारा 25(5) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को इस व्यवस्था को पुनः लागू करने की आधिकारिक सिफारिश की है। आयोग ने रेखांकित किया कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसी शीर्ष संवैधानिक संस्था की चयन प्रक्रिया में सार्वजनिक विश्वास और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विस्तृत अंकों का प्रकटीकरण आवश्यक है।
केंद्रीय सूचना आयोग के प्रमुख अवलोकन एवं विधिक निर्देश
1. आरटीआई अधिनियम की धारा 25(5) के तहत औपचारिक सलाह सूचना आयुक्त जया वर्मा सिन्हा ने अपने आदेश में दर्ज किया:
“आरटीआई अधिनियम की धारा 25(5) के तहत प्रतिवादी सार्वजनिक प्राधिकरण (DoPT) को यह विधिक सलाह जारी की जाती है कि वह सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा में अनुशंसित अभ्यर्थियों द्वारा प्राप्त विस्तृत अंकों के ब्रेक-अप (Paper-wise Marks) के प्रकाशन की प्रथा को पुनः बहाल करे। आयोग की यह सलाह इस तथ्य और रिकॉर्ड पर आधारित है कि वर्ष 2018 से पहले ऐसा नियमित रूप से किया जाता था और इसे बिना किसी नीतिगत निर्णय के रिकॉर्ड पर बंद कर दिया गया था।”
2. 2018 से 2023 तक का विस्तृत डेटा 3 सप्ताह में उपलब्ध कराने का आदेश
- आयोग ने आरटीआई अपीलकर्ता अनिकेत कुमार गुप्ता की अर्जी को स्वीकार करते हुए DoPT को निर्देश दिया कि वह आदेश प्राप्त होने के तीन सप्ताह के भीतर सिविल सेवा परीक्षा 2018 से 2023 तक के सभी अनुशंसित उम्मीदवारों के विस्तृत पेपर-वार अंक अपीलकर्ता को उपलब्ध कराए।
UPSC और DoPT के तर्कों की विधिक विफलता
सुनवाई के दौरान दोनों सार्वजनिक प्राधिकरणों द्वारा दिए गए तर्कों और उनके बीच के अंतर्विरोधों का आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया:
- ‘कोचिंग संस्थानों द्वारा दोहन’ का DoPT का तर्क खारिज:
- कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने दलील दी थी कि विस्तृत अंकों का खुलासा होने से निजी कोचिंग संस्थान कुछ वैकल्पिक विषयों को “अधिक अंक दिलाने वाले” (High Scoring) के रूप में पेश करके अभ्यर्थियों का व्यावसायिक शोषण कर सकते हैं।
- फाइल रिकॉर्ड का अभाव: जब आयोग ने पूछा कि 2018 में यह प्रथा किस नियम या आदेश के तहत बंद की गई, तो DoPT को स्वीकार करना पड़ा कि रिकॉर्ड में ऐसी कोई फाइल नोटिंग, कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) या नीतिगत फैसला मौजूद ही नहीं है जिसके तहत अंकों का प्रकाशन रोका गया था।
- UPSC का ‘व्यक्तिगत जानकारी’ का दावा अस्वीकार्य:
- यूपीएससी ने दलील दी कि विषय-वार अंक अभ्यर्थियों की “व्यक्तिगत जानकारी” (Personal Information) हैं और इसलिए इन्हें सार्वजनिक नहीं किया जाता, यद्यपि कुल लिखित अंक, साक्षात्कार के अंक और अंतिम कुल अंक वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाते हैं।
- आयोग ने इस तर्क को खारिज करते हुए माना कि जब अंतिम कुल अंक और रैंक पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में हैं, तो सार्वजनिक पद पर चयनित अभ्यर्थियों के विस्तृत अंकों को व्यक्तिगत जानकारी मानकर छिपाना आरटीआई कानून की मूल भावना के विपरीत है।
- रिकॉर्ड की कस्टडी पर विरोधाभासी रुख:
- आयोग ने पाया कि दोनों विभाग रिकॉर्ड के स्वामित्व पर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे थे। DoPT ने कहा कि विस्तृत अंक केवल UPSC द्वारा तैयार और संधारित किए जाते हैं, जबकि UPSC ने स्पष्ट किया कि परिणाम घोषित होने के बाद यह संपूर्ण डेटा DoPT और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) को हस्तांतरित कर दिया जाता है।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि
- आरटीआई आवेदन: अपीलकर्ता अनिकेत कुमार गुप्ता ने आरटीआई के तहत पिछले 10 वर्षों के दौरान चयनित सभी उम्मीदवारों के सामान्य अध्ययन (GS Papers), वैकल्पिक विषय (Optional Papers) और पर्सनालिटी टेस्ट (इंटरव्यू) में प्राप्त व्यक्तिगत अंकों का विवरण मांगा था।
- पारदर्शिता का अभाव: अपीलकर्ता ने बताया कि CSE 2017 तक यूपीएससी प्रत्येक सफल अभ्यर्थी के विषय-वार अंकों की पूरी सूची सार्वजनिक करती थी, जिससे अभ्यर्थियों को यह समझने में सहायता मिलती थी कि किस विषय में कैसा मूल्यांकन हुआ है। परंतु CSE 2018 से अचानक विस्तृत ब्रेक-अप देना बंद कर दिया गया और केवल कुल प्राप्तांक जारी किए जाने लगे।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: अनिकेत कुमार गुप्ता बनाम केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO), कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) सहपठित UPSC [द्वितीय अपील – केंद्रीय सूचना आयोग, नई दिल्ली]
- प्रासंगिक कानून एवं धाराएं:
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act, 2005) की धारा 25(5) (सार्वजनिक प्राधिकरणों को प्रथाओं व नियमों में सुधार हेतु आयोग की सिफारिशी शक्तियां)
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4(1)(b) (स्वतः संज्ञान प्रकटीकरण / Suo Motu Disclosure) एवं धारा 8(1)(j) (व्यक्तिगत सूचना के अपवाद का परीक्षण)
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 315 से 320 (संघ लोक सेवा आयोग के कार्य एवं सांविधिक कर्तव्य)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
- सीबीएसई बनाम आदित्य बंदोपाध्याय (2011, सुप्रीम कोर्ट) — ‘परीक्षाओं में मूल्यांकन प्रणाली और अंकों का प्रकटीकरण सार्वजनिक विश्वास को सुदृढ़ करता है; सार्वजनिक संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता भ्रष्टाचार और मनमानेपन पर सबसे बड़ा अंकुश है।’
- यूपीएससी बनाम अंगेश कुमार (2018, सुप्रीम कोर्ट) — ‘यद्यपि स्केलिंग/मॉडरेशन के जटिल फॉर्मूले को सार्वजनिक करने पर कुछ व्यावहारिक सीमाएं हैं, परंतु अभ्यर्थियों द्वारा प्राप्त वास्तविक प्राप्तांकों का प्रकटीकरण निष्पक्षता का हिस्सा है।’
- निर्णयकर्ता: सूचना आयुक्त जया वर्मा सिन्हा (केंद्रीय सूचना आयोग)
- निर्णय तिथि: 24 सितंबर 2026
Civil Services: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित संस्था | केंद्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission – CIC) |
| सूचना आयुक्त | जया वर्मा सिन्हा (Jaya Varma Sinha) |
| आरटीआई अपीलकर्ता | अनिकेत कुमार गुप्ता (Aniket Kumar Gupta) |
| प्रतिवादी विभाग | कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) एवं UPSC |
| मुख्य निर्देश | 1. RTI कानून की धारा 25(5) के तहत DoPT को सलाह पत्र। 2. अपीलकर्ता को CSE 2018 से 2023 के विस्तृत मार्क्स 3 हफ्तों में देने का आदेश। |

