Friday, October 2, 2026
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Compassionate Appointment: मृतक पति की जगह नौकरी पाकर पुनर्विवाह करने और ससुराल छोड़ने वाली बहू ध्यान दें ; सास को 25% वेतन देना होगा

हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियाँ और कानूनी तर्क (Key Observations)

  • अनुकंपा योजना का मूल उद्देश्य पूरे परिवार की मदद करना है:राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य किसी कमाऊ सदस्य की आकस्मिक मृत्यु के बाद पूरे परिवार को अचानक आए वित्तीय संकट से उबारना होता है। योजना के तहत ‘परिवार’ का दायरा केवल विधवा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मृतक के माता-पिता और अन्य आश्रित भी शामिल हैं।
  • शपथ पत्र से बंधी है बहु:अदालत ने कहा कि बहु ने जिस शपथ पत्र (Undertaking) के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति का लाभ उठाया, वह उस दायित्व से पूरी तरह अलग नहीं हो सकती जो इस नियुक्ति का मूल आधार था।
  • बुजुर्ग सास-ससुर को बेसहारा नहीं छोड़ा जा सकता:अदालत ने कड़े शब्दों में टिप्पणी की:“यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि पति की मृत्यु के बाद बहु, उसकी जगह अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त कर ले और उसके बाद अपने वृद्ध सास-ससुर को त्याग कर उन्हें किस्मत के भरोसे छोड़ दे।”

अदालत द्वारा दिए गए अंतिम आदेश

  1. 25% वेतन की कटौती: नियोक्ता संस्थान (अजमेर विद्युत वितरण निगम) को आदेश दिया गया कि वह बहु के नियमित मासिक वेतन में से 25% राशि काटकर सीधे सास के बैंक खाते में जमा करे।
  2. टर्मिनल लाभों का बंटवारा: मृतक कर्मचारी के बकाया फंड और टर्मिनल बेनिफिट्स की कुल राशि को 50% बहु और 50% मृतक की मां के बीच बराबर-बराबर बांटा जाए।

जयपुर/जोधपुर: अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) के मूल सामाजिक-कल्याणकारी उद्देश्य, नौकरी प्राप्त करते समय दिए गए शपथ-पत्र (Undertaking) के विधिक दायित्व और आश्रित बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण के अधिकार पर राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक अत्यंत मानवीय और नजीर योग्य फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि मृतक सरकारी/निगम कर्मचारी के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति पाने वाली बहू यदि बाद में अपने वृद्ध सास-ससुर को बेसहारा छोड़कर पुनर्विवाह कर लेती है, तो वह उस विधिक और नैतिक दायित्व से मुक्त नहीं हो सकती जिसके आधार पर उसे नियुक्ति मिली थी।

उच्च न्यायालय ने नियोक्ता अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह विधवा (अब पुनर्विवाहित बहू) के नियमित मासिक वेतन से 25% की अनिवार्य कटौती करे और यह राशि सीधे उसकी बुजुर्ग सास के बैंक खाते में प्रतिमाह हस्तांतरित करे। इसके अतिरिक्त, अदालत ने मृतक कर्मचारी के सभी अंतिम देयकों एवं परिलाभों (Terminal Benefits) को 50% विधवा और 50% मृतक की मां के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया है।

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उच्च न्यायालय के प्रमुख विधिक निष्कर्ष एवं न्यायिक टिप्पणियां

1. ‘शपथ-पत्र देकर लाभ लेने के बाद दायित्वों से पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता’ राजस्थान उच्च न्यायालय ने अनुकंपा नियुक्ति की शर्तों और बहू द्वारा दिए गए वचनपत्र (Affidavit/Undertaking) की विधिक बाध्यता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट कहा:*”पूर्वोक्त वचनपत्र (Undertaking) प्रस्तुत करके अनुकंपा नियुक्ति का लाभ प्राप्त करने के बाद, वह स्वयं को उस दायित्व से पूरी तरह अलग (Disassociate) नहीं कर सकती, जो अनुकंपा नियुक्ति का मूल आधार (Very Basis) बना था। यह कतई स्वीकार्य नहीं हो सकता (It cannot be countenanced) कि पति की मृत्यु के बाद, बहू उसके स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति हासिल कर ले और उसके बाद अपने वृद्ध सास-ससुर को बेसहारा छोड़कर उन्हें भाग्य के भरोसे (Mercy of Destiny) छोड़ दे।”*

2. योजना का उद्देश्य पूरे परिवार का भरण-पोषण, केवल विधवा का नहीं:

  • अदालत ने अनुकंपा नीति के न्यायशास्त्र को स्पष्ट करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति किसी कर्मचारी की सेवाकाल में असामयिक मृत्यु के बाद परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य के चले जाने से उत्पन्न तात्कालिक वित्तीय संकट को दूर करने के लिए दी जाती है।
  • नियमों के तहत ‘परिवार’ केवल विधवा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मृतक के वृद्ध माता-पिता और अन्य आश्रित भी समान रूप से शामिल हैं।
  • सास-ससुर ने इस समझ और सहमति के आधार पर अपनी सहमति दी थी कि बहू नौकरी पाने के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालेगी। ऐसे में ससुराल छोड़ना, भरण-पोषण बंद करना और पुनर्विवाह कर लेना योजना के मूल उद्देश्य से खुला विचलन है।

मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि: 2017 से शुरू हुआ पारिवारिक व वित्तीय विवाद

  • कर्मचारी की मृत्यु और पारिवारिक सहमति (2017):
    • अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) में कार्यरत एक कर्मचारी की वर्ष 2017 में सेवाकाल के दौरान असामयिक मृत्यु हो गई थी।
    • निगम के सेवा नियमों के तहत परिवार के किसी एक पात्र सदस्य को अनुकंपा के आधार पर रोजगार दिए जाने का प्रावधान था।
    • परिवार में विचार-विमर्श के बाद, बुजुर्ग सास और ससुर ने इस शर्त और सहमति पर अपनी एनओसी (NOC) दी कि मृतक की पत्नी (उनकी बहू) को नौकरी दी जाए, ताकि वह आगे चलकर परिवार और बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल कर सके।
  • शपथ-पत्र (Undertaking) और नौकरी प्राप्ति:
    • बहू ने निगम में बाकायदा एक औपचारिक शपथ-पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें उसने वचन दिया कि वह अनुकंपा नियुक्ति मिलने के बाद परिवार के अन्य सभी सदस्यों का भरण-पोषण और देखभाल करेगी। इसके आधार पर उसे निगम में नियमित नियुक्ति मिल गई।
  • विवाद और निष्कासन:
    • नौकरी मिलने के कुछ समय बाद, बहू ने ससुराल छोड़ दिया, अपने बुजुर्ग सास-ससुर को बिना किसी आर्थिक सहारे के छोड़ दिया और किसी अन्य व्यक्ति से पुनर्विवाह कर लिया।
  • अदालत की शरण:
    • अत्यधिक वित्तीय कठिनाइयों और लाचारी का सामना कर रही बुजुर्ग सास ने अंततः अपने भरण-पोषण और अधिकारों के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

उच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देश

अदालत ने पीड़ित सास को तत्काल सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए निम्नलिखित आदेश पारित किए:

  1. वेतन से 25% की मासिक कटौती: अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) को निर्देश दिया गया कि वह बहू के हर महीने के वेतन से सीधे 25% की राशि काटे और उसे बिना किसी देरी के सास के बैंक खाते में जमा करे।
  2. टर्मिनल बेनिफिट्स का 50-50% विभाजन: मृतक कर्मचारी के भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी और अन्य सभी सेवा परिलाभों (Terminal Benefits) का 50% हिस्सा विधवा को और शेष 50% हिस्सा मृतक की मां को वितरित किया जाए।
  3. निगम की प्रशासनिक जवाबदेही: नियोक्ता प्राधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार का व्यवधान न आए।

विधिक एवं विधायी विश्लेषण: क्या कहता है कानून?

  • अनुकंपा नियुक्ति नियम एवं वचनपत्र का विधिक प्रभाव:
    • अनुकंपा नियुक्ति कोई सामान्य ‘विरासत में मिलने वाला अधिकार’ नहीं है। यह राज्य या सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा मानवीय आधार पर दी जाने वाली एक विशेष छूट है।
    • जब कोई अभ्यर्थी यह शपथ-पत्र देता है कि वह मृतक के अन्य आश्रितों का पालन-पोषण करेगा, तो वह शपथ-पत्र सेवा की एक अनिवार्य शर्त (Condition Precedent) बन जाता है। इस शर्त का उल्लंघन होने पर सेवा समाप्त की जा सकती है अथवा वेतन से कटौती कर आश्रितों को भरण-पोषण दिलाया जा सकता है।
  • माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 (Senior Citizens Act, 2007):
    • वरिष्ठ नागरिकों और माता-पिता को गरिमापूर्ण जीवन जीने और अपने परिजनों व संपत्ति के उत्तराधिकारियों से भरण-पोषण पाने का अक्षुण्ण अधिकार प्राप्त है।
  • संबद्ध न्यायिक नजीर:
    • अदालत ने भगवान सिंह बनाम अधीक्षण अभियंता पावस, अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड [2025 LiveLaw (Raj) 364] के सिद्धांत का संदर्भ लिया, जहां इसी प्रकार के मामलों में आश्रितों के अधिकारों की रक्षा हेतु अनुकंपा नियुक्ति के दायित्वों को बाध्यकारी ठहराया गया था।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: सास बनाम अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड व अन्य [रिट याचिका – राजस्थान उच्च न्यायालय]
  • निर्णय का समय: 2026
  • प्रतिवादी संस्था: अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL)
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
    • राजस्थान मृत सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति नियम (Rajasthan Compassionate Appointment Rules)
    • माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 की धारा 4 एवं 9
    • भारत का संविधान:
      • अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता)
      • अनुच्छेद 21 (वृद्ध माता-पिता के गरिमापूर्ण जीवन और आजीविका का अधिकार)
  • संबद्ध ऐतिहासिक न्यायिक नजीरें:
    • भगवान सिंह बनाम अधीक्षण अभियंता, AVVNL (2025 LiveLaw (Raj) 364) — ‘अनुकंपा नियुक्ति पाने वाला व्यक्ति मृतक के शेष आश्रितों के भरण-पोषण के वादे से मुकर नहीं सकता।’
    • उमेश कुमार नागपाल बनाम हरियाणा राज्य (1994, सुप्रीम कोर्ट) — ‘अनुकंपा नियुक्ति का एकमात्र उद्देश्य पूरे परिवार को अचानक आई आर्थिक तंगी से उबारना है, न कि किसी एक व्यक्ति को स्थायी विशेषाधिकार देना।’
  • अंतिम परिणाम: सास की याचिका स्वीकार; बहू के मासिक वेतन से 25% काटकर सास के खाते में भेजने और मृतक कर्मचारी के परिलाभों को 50-50% बांटने का सख्त निर्देश।

Compassionate Appointment:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतराजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court)
संबंधित संस्थानअजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL)
मूल विवाद2017 में पति की मृत्यु के बाद बहु को अनुकंपा नौकरी मिली, लेकिन बाद में उसने ससुराल छोड़ दिया और दूसरी शादी कर ली।
विधिक आधारअनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य पूरे परिवार को वित्तीय सहायता देना है, केवल विधवा को व्यक्तिगत लाभ पहुंचाना नहीं।
अदालत का फैसलाबहु के वेतन से 25% की कटौती कर सास को भुगतान; सेवानिवृत्ति लाभों का 50-50% बंटवारा।
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