Sunday, August 16, 2026
HomeLaworder HindiCompulsory Retirement: पदोन्नति से पुराने खराब रिकॉर्ड नहीं धुलते; अनिवार्य सेवानिवृत्ति के...

Compulsory Retirement: पदोन्नति से पुराने खराब रिकॉर्ड नहीं धुलते; अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए पूरा सेवा रिकॉर्ड देखा जाना अनिवार्य, जानिए केस

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय न्यायाधीशन्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता (Justice Anish Kumar Gupta)
संबंधित नियमवित्तीय हस्तपुस्तिका (Financial Handbook) भाग II का नियम 56-सी
मुख्य सिद्धांतपदोन्नति से पुरानी प्रतिकूल प्रविष्टियां (Adverse Entries) खत्म नहीं होतीं; अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए पूरा सेवा रिकॉर्ड मान्य है।
निष्ठा (Integrity)ईमानदारी/निष्ठा पर एक भी विपरीत प्रविष्टि अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए पर्याप्त आधार है।

Compulsory Retirement: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा है कि किसी सरकारी कर्मचारी की पदोन्नति (Promotion) होने मात्र से उसकी पुरानी प्रतिकूल प्रविष्टियां (Adverse Entries) समाप्त नहीं होतीं।

न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता (Justice Anish Kumar Gupta) की एकल पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा: सरकारी कर्मचारी को अनिवार्य सेवानिवृत्त करने पर विचार करने के लिए उसका संपूर्ण रिकॉर्ड देखा जाना आवश्यक है। अदालतें पूर्व में भी यह तय कर चुकी हैं कि ईमानदारी (Integrity) पर संदिग्धता दर्शाने वाली एक एकल प्रतिकूल प्रविष्टि भी किसी व्यक्ति को अनिवार्य सेवानिवृत्त करने के लिए पर्याप्त है। जब किसी कर्मचारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) देने के मामले का मूल्यांकन किया जाता है, तो उसका संपूर्ण सेवा रिकॉर्ड (Entire Service Record) देखा जाना आवश्यक है।

Also Read;Hospitality Industry: होटल की रसोई ग्राहक की नजरों से दूर हो सकती है, लेकिन कानून की पहुंच से बाहर नहीं…यह शब्द सुनवाई में क्यों दिए, जान लें

हाई कोर्ट के मुख्य कानूनी निष्कर्ष

  1. ‘वॉश-आउट थ्योरी’ (Washing-out Theory) खारिज
    • अदालत ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि वर्ष 2000 में पदोन्नति मिलने से उसके पिछले सभी खराब रिकॉर्ड और प्रतिकूल प्रविष्टियां मिट/धुल (Washed out) गई थीं।
  2. सुप्रीम कोर्ट के नजीर/फैसलों का हवाला
    • पीठ ने सर्वोच्च न्यायालय की तीन-न्यायाधीशों की पीठ के निर्णय State of Orissa v. Ram Chandra का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि पदोन्नति के बाद भी पुरानी प्रतिकूल सामग्री सरकार के पास यह तय करने के लिए उपलब्ध रहती है कि कर्मचारी को सेवा में बनाए रखना उचित है या नहीं।
    • इसके अलावा State of Gujarat v. Umed Bhai M. Patel, State of UP v. Vijay Kumar Jain, और Piyare Mohanlal v. State of Jharkhand का संदर्भ दिया गया, जिनमें माना गया था कि पदोन्नति के लिए पुरानी प्रविष्टियों का प्रभाव भले सीमित हो, लेकिन अग्रिम सेवा में बनाए रखने या सेवानिवृत्त करने के मूल्यांकन के लिए पूरा सेवा रिकॉर्ड देखा जाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)

  • नियुक्ति एवं पदोन्नति: याचिकाकर्ता को 1977 में फर्रुखाबाद जिले में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में नियुक्त किया गया था। 1999 में कन्नौज जिला बनने पर स्थानांतरण हुआ और 2000 में उसे ‘दफ्तरी’ के पद पर स्थायी/पदोन्नत किया गया।
  • अधिनियम/नियम 56-सी के तहत कार्रवाई: 50 वर्ष की आयु पूरी करने पर एक स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर वित्तीय हस्तपुस्तिका (Financial Handbook) के मूल नियम 56-सी (Rule 56-C of Fundamental Rules) के तहत 26 अप्रैल 2005 को उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई।
  • प्रतिकूल रिकॉर्ड: जिला न्यायाधीश के रिकॉर्ड से स्पष्ट हुआ कि पिछले 10 वर्षों में कर्मचारी का सेवा रिकॉर्ड असंतोषजनक था, उस पर जुर्माने लगाए गए थे और उसकी निष्ठा (Integrity) भी संदिग्ध पाई गई थी।
  • अदालत का फैसला: हाई कोर्ट ने माना कि स्क्रीनिंग कमेटी ने संपूर्ण रिकॉर्ड का उचित अवलोकन किया था और सेवानिवृत्ति आदेश में कोई अवैधता नहीं थी।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
light rain
30 ° C
30 °
30 °
84 %
3.6kmh
100 %
Sat
30 °
Sun
35 °
Mon
34 °
Tue
34 °
Wed
34 °