Tuesday, October 27, 2026
HomeConsumer NewsCopyright Matter: नुकसान की सटीक मात्रा साबित न होना मुआवजा देने में...

Copyright Matter: नुकसान की सटीक मात्रा साबित न होना मुआवजा देने में बाधा नहीं; धारीवाल फिल्म्स के नहले-पे-दहले फिल्म का केस यहां जानिए

हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी सिद्धांत

  1. नुकसान के आकलन का सिद्धांत (Assessment of Damages): अदालत ने सिद्धांत तय करते हुए कहा:“यदि वादी किसी मामले में नुकसान की सटीक राशि को पूरी सटीकता के साथ साबित करने में असमर्थ रहता है, तो भी इसका मतलब यह नहीं है कि उसे हर्जाना नहीं दिया जा सकता, बशर्ते नुकसान का होना स्थापित हो चुका हो और उपलब्ध साक्ष्य क्षतिपूर्ति का एक तर्कसंगत आधार प्रदान करते हों।”
  2. अप्रत्यक्ष साक्ष्यों पर भरोसा (Expectation Damages): अदालत ने क्षतिपूर्ति के आकलन के लिए एक बिना दाखिल की गई ‘सहमति शर्तों’ (Unfiled Consent Terms) का सहारा लिया, जहां अधिकारों का मूल्य ₹82.51 लाख आंका गया था। इसमें से बकाया राशि घटाकर अदालत ने ‘प्रत्याशा क्षतिपूर्ति’ (Expectation Loss) और पब्लिसिटी के सिद्ध खर्चों को मिलाकर ₹1.66 करोड़ का compensatory damages मंजूर किया।
  3. व्यावसायिक बेईमानी और दंडात्मक हर्जाना (Punitive Damages): न्यायालय ने माना कि धारीवाल फिल्म्स ने एक ही फिल्म के अधिकारों को कई पक्षों को बेचकर धोखाधड़ी और व्यावसायिक बेईमानी (Commercial Dishonesty) की है। ऐसे आचरण को हतोत्साहित करने के लिए कोर्ट ने ₹25 लाख का दंडात्मक हर्जाना (Punitive Damages) और ₹15 लाख कानूनी लागत का भुगतान करने का आदेश दिया।

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने संविदा और कॉपीराइट उल्लंघन (Copyright Infringement) के एक 19 साल पुराने मुकदमे में महत्वपूर्ण विधिक व्यवस्था दी है।

न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर की एकल पीठ ने ‘नेहले पे देहला’ फिल्म के वीडियो राइट्स विवाद में धारीवाल फिल्म्स को अल्ट्रा डिस्ट्रीब्यूटर्स को लगभग ₹1.91 करोड़ का हर्जाना और कानूनी खर्च चुकाने का आदेश दिया। अदालत ने फैसला सुनाया है कि यदि नुकसान होने का तथ्य (Fact of Loss) साबित हो जाता है और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री आकलन के लिए एक उचित आधार प्रदान करती है, तो केवल नुकसान की सटीक मात्रा (Precise Quantum of Loss) साबित न कर पाना पीड़ित पक्ष को मुआवजा (Damages) पाने से वंचित नहीं कर सकता [अल्ट्रा डिस्ट्रीब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम धारीवाल फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य]।

उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां

1. नुकसान की सटीक मात्रा और मुआवजे का आकलन अदालत ने नुकसान के मूल्यांकन के सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए कहा: “सिर्फ इसलिए कि किसी मामले में वादी नुकसान या क्षति की सटीक मात्रा को पूर्ण सटीकता के साथ साबित करने में असमर्थ है, यह उचित मामले में हर्जाना देने से नहीं रोकता—बशर्ते नुकसान होने का तथ्य स्थापित हो और उपलब्ध साक्ष्य क्षति के आकलन के लिए एक तार्किक और उचित आधार (Reasonable Basis) प्रदान करते हों।”

2. व्यावसायिक बेईमानी और दंडात्मक हर्जाना (Punitive Damages) प्रतिवादी कंपनी के आचरण पर गंभीर टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा: “रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि प्रतिवादी संख्या 1 (धारीवाल फिल्म्स) ने एक ही फिल्म के अधिकारों को लेकर अलग-अलग समय पर पूरी तरह परस्पर विरोधी रुख अपनाया है। यह उनकी विश्वसनीयता की कमी और घोर व्यावसायिक बेईमानी (Commercial Dishonesty) को दर्शाता है। झूठे आश्वासनों पर अनुबंध करना और अधिकारों का दोहरा असाइनमेंट (Double Assignment) करना धोखाधड़ी है, जिसे रोकने के लिए दंडात्मक हर्जाना लगाना आवश्यक है।”

Also Read;McVitie’s Marie Biscuit: मैदा 52% व गेहूं सिर्फ 19.5%’मिला; Wholewheat के भ्रामक दावे पर CCPA का सख्त निर्देश, यह पढ़ें

मामले की पृष्ठभूमि और विवाद (2005-2007)

  • 2005 का अनुबंध: अल्ट्रा डिस्ट्रीब्यूटर्स ने 2005 में धारीवाल फिल्म्स के साथ ₹42.51 लाख के कुल प्रतिफल में 8 वर्षों के लिए फिल्म ‘नेहले पे देहला’ के विशेष वीडियो, केबल टीवी और वीडियो-ऑन-डिमांड अधिकार प्राप्त करने का समझौता किया था।
  • अग्रिम भुगतान और धोखाधड़ी: अल्ट्रा ने ₹10.01 लाख का अग्रिम भुगतान किया, लेकिन धारीवाल फिल्म्स ने उपयोग योग्य गुणवत्ता के मास्टर टेप नहीं दिए। इसके बजाय, धारीवाल फिल्म्स ने वही वीडियो अधिकार किसी अन्य प्रतिद्वंद्वी वितरक को भी दे दिए।
  • 2007 का मुकदमा: अधिकारों के हनन और नुकसान के चलते अल्ट्रा डिस्ट्रीब्यूटर्स ने वर्ष 2007 में बॉम्बे हाईकोर्ट में दीवानी वाद (Suit) दायर किया।

अदालत द्वारा नुकसान का ‘रफ एंड रेडी’ मूल्यांकन

  • अनफाइल्ड सहमति शर्तों पर भरोसा: सटीक वित्तीय नुकसान के आकलन के लिए अदालत ने दोनों पक्षों के बीच पूर्व में बनी गैर-दाखिल सहमति शर्तों (Unfiled Consent Terms) का सहारा लिया, जिसमें फिल्म अधिकारों का मूल्य ₹82.51 लाख आंका गया था।
  • अपेक्षा क्षति (Expectation Damages): अदालत ने शेष देय राशि काटकर ₹50.01 लाख की ‘एक्सपेक्टेशन डैमेज’ निर्धारित की, ताकि वादी को उसी आर्थिक स्थिति में रखा जा सके जैसी स्थिति अनुबंध पूरा होने पर होती।
  • प्रचार व्यय और क्षतिपूर्ति: प्रचार के खर्चों और निर्विवाद गवाह बयानों को जोड़कर कुल क्षतिपूर्ति का निर्धारण किया गया।

हर्जाने का विवरण और अंतिम आदेश

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने वाद को डिक्री करते हुए धारीवाल फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड को 8 सप्ताह के भीतर निम्नलिखित भुगतान करने का निर्देश दिया:

  • ₹1.66 करोड़: प्रतिपूरक हर्जाना (Compensatory Damages)।
  • ₹25 लाख: दंडात्मक हर्जाना (Punitive Damages – व्यावसायिक बेईमानी रोकने हेतु)।
  • ₹15 लाख: कानूनी खर्च (Legal Costs)।
  • कुल देय राशि: ₹2.06 करोड़ (₹1.91 करोड़ हर्जाना + ₹15 लाख खर्च)।

विधिक प्रतिनिधित्व

  • वादी (अल्ट्रा डिस्ट्रीब्यूटर्स) की ओर से: दुआ एसोसिएट्स के माध्यम से अधिवक्ता रशमीन खांडेकर, प्रणव नायर, ज्योति घाग और शैलेश प्रजापति।
  • प्रतिवादी (धारीवाल फिल्म्स) की ओर से: अधिवक्ता अमित दुबे, अब्दुल्ला शेख और अशोक एम. सरावगी।

Copyright Matter:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर
केस का शीर्षकUltra Distributors Pvt Ltd v. Dhariwal Films Pvt Ltd & Ors
विवादित विषयफिल्म ‘नेहले पे देहला’ (Nehle Pe Dehla) के वीडियो/ओटीटी अधिकारों का दोहरी बिक्री (Double Assignment) विवाद
कुल मुआवजा राशि₹1.66 करोड़ (क्षतिपूर्ति) + ₹25 लाख (दंडात्मक क्षतिपूर्ति) + ₹15 लाख (कानूनी खर्च)
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
overcast clouds
26.5 ° C
26.5 °
26.5 °
49 %
2.6kmh
100 %
Tue
27 °
Wed
30 °
Thu
22 °
Fri
23 °
Sat
30 °

Recent Comments