Saturday, September 19, 2026
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Court News: कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट के प्रश्न पत्र की भाषा पर कुछ यूं हुई हाईकोर्ट में बहस…

Court News: हाईकोर्ट ने कहा कि जिस अंग्रेजी भाषा में कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट आयोजित किया गया था, वह क्षेत्रीय भाषाओं में प्रशिक्षित इच्छुक छात्रों के लिए बाधा नहीं बन सकती।

नीति निर्माण के क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकती अदालत

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विभू बाखरू और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि वह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (एनएलयू) के संघ को क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा आयोजित करने का निर्देश देकर नीति निर्माण के क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकती है। अदालत ने कहा, हम इस बात पर जोर देना जरूरी समझते हैं कि जिन भाषाओं में राष्ट्रीय कानून विश्वविद्यालयों में प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है, वे उन छात्रों के लिए बाधा नहीं बन सकतीं, जिन्हें अन्यथा अन्य भाषाओं में शिक्षा दी जा रही है।
हालांकि, पीठ ने निकाय से यह दिखाने के लिए एक रोडमैप मांगा कि वह इस मुद्दे पर जीवित है।

जनहित याचिका पर चल रही सुनवाई

हाईकाेर्ट कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) 2024 को अंग्रेजी के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित करने के लिए एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। अदालत को उम्मीद थी कि नीति निर्माता इस मुद्दे पर जागरूक होंगे और राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को भी अपनाया जाएगा। अदालत ने कहा, कुछ हद तक, यह नीति का मामला है, कुछ ऐसा जिसे आपको खुद को विकसित करना होगा लेकिन एकमात्र आवश्यकता यह है कि आपको उस बदलाव के बारे में पता होना चाहिए जो स्थानीय भाषा, विशेष रूप से हिंदी को पेश करने के लिए हो रहा है। इसके लिए यह राष्ट्रीय भाषा है देश और आपके पास अब उच्चतम न्यायालय के फैसले हैं जिनका अनुवाद किया जा रहा है।

क्षेत्रीय भाषा वाले के लिए परीक्षा भेदभावपूर्ण: याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता ने अपनी जनहित याचिका में कहा कि क्लैट(यूजी) परीक्षा भेदभावपूर्ण थी और उन छात्रों को समान अवसर प्रदान करने में विफल रही, जिनकी शैक्षिक पृष्ठभूमि क्षेत्रीय भाषाओं में निहित थी। बीसीआई ने याचिकाकर्ता सुधांशु पाठक द्वारा उठाए गए मुद्दे का समर्थन किया था। पाठक ने कहा, एक अति-प्रतिस्पर्धी पेपर में, वे (गैर-अंग्रेजी भाषा पृष्ठभूमि वाले छात्र) भाषाई रूप से अक्षम हैं, क्योंकि उन्हें सीखने और एक नई भाषा में महारत हासिल करने की अतिरिक्त बाधा को पार करना होता है।

याचिकाकर्ता के रुख से अदालत हुई सहमत

पीठ याचिकाकर्ता के इस रुख से सहमत हुई कि क्षेत्रीय भाषा में परीक्षा आयोजित करना बड़े समावेशन के लिए आवश्यक हो सकता है। अदालत ने कहा, यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस मामले पर विचार करना उचित होगा कि यह कोई बाधा नहीं है।

विशेषज्ञ समिति मामले को लेकर कर रही विचार

कंसोर्टियम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि जनहित याचिका प्रतिकूल नहीं है और एक विशेषज्ञ समिति इस मुद्दे पर विचार कर रही है। हालांकि वकील ने इस बात पर जोर दिया कि अनुवाद के मुद्दों के कारण अन्य भाषाओं में परीक्षा आयोजित करने में चिंताएं थीं।

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