Education over Allegation: दिल्ली हाई कोर्ट जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने मानवीय आधार पर यह फैसला सुनाया ताकि बच्चों के शैक्षणिक करियर पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े।
दिल्ली हाई कोर्ट ने ₹100 करोड़ के कथित निवेश घोटाले के आरोपी एक वकील को बड़ी राहत दी है। अदालत ने आरोपी को उसके बच्चों के स्कूल में दाखिले (Admission) के लिए फंड की व्यवस्था करने हेतु दो सप्ताह की अंतरिम जमानत प्रदान की है। याचिकाकर्ता कड़कड़डूमा कोर्ट का एक प्रैक्टिसिंग एडवोकेट है और शाहदरा बार एसोसिएशन का सदस्य है। उस पर ‘एल्गोरिथम-आधारित ट्रेडिंग’ के नाम पर हजारों लोगों से ठगी करने का आरोप है।
कोर्ट का मानवीय दृष्टिकोण (The Humanitarian Ground)
- अदालत ने आरोपी की पत्नी (जो खुद मामले में सह-आरोपी है और फिलहाल जमानत पर है) की मौजूदगी के बावजूद पिता को जमानत देने का फैसला किया।
- फंड की व्यवस्था: कोर्ट ने माना कि हालांकि मां एडमिशन की औपचारिकताएं पूरी कर सकती है, लेकिन स्कूल की फीस और अन्य खर्चों के लिए फंड का इंतजाम करने हेतु पिता की उपस्थिति आवश्यक है।
- शैक्षणिक करियर: जस्टिस जैन ने आदेश में कहा, “यदि अंतरिम जमानत नहीं दी गई, तो बच्चों के एडमिशन का मौका हाथ से निकल सकता है, जिससे उनका करियर गंभीर रूप से प्रभावित होगा।”
- शर्तें: कोर्ट ने ₹25,000 के निजी मुचलके (Personal Bond) और इतनी ही राशि के स्थानीय जमानतदार (Surety) पर दो हफ्ते की जमानत दी।
क्या है ₹100 करोड़ का ‘ट्रेड कॉप्स’ घोटाला? (The Investment Fraud)
- यह मामला आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज किया गया था। आरोपी पर निवेश के नाम पर जालसाजी के गंभीर आरोप हैं।
- लुभावने वादे: निवेशकों को ‘ट्रेड कॉप्स’ (Trade Cops) जैसी कंपनियों के माध्यम से हर महीने 8% फिक्स्ड रिटर्न और 25 महीनों में पैसा दोगुना करने का लालच दिया गया।
- फर्जी दावा: आरोपियों ने दावा किया कि उन्होंने बाजार के लिए विशेष ‘इन-हाउस एल्गोरिथम’ विकसित किया है, जो 20% से अधिक मासिक रिटर्न दे सकता है।
- पोंजी स्कीम का तरीका: शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए कुछ रिटर्न दिया गया, लेकिन बाद में भुगतान रोक दिया गया और आरोपी गायब हो गए।
- पीड़ितों की संख्या: अब तक 74 पीड़ितों से ₹3 करोड़ की ठगी की शिकायत मिली है, लेकिन अंदेशा है कि पीड़ितों की संख्या 2000 से अधिक और घोटाला ₹100 करोड़ तक हो सकता है।
SEBI की गाइडलाइंस का उल्लंघन
- सुनवाई के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 2 सितंबर, 2022 को एक सर्कुलर जारी किया था।
- इस सर्कुलर के तहत, किसी भी व्यक्ति या संस्था को एल्गोरिथम-आधारित ट्रेडिंग रणनीतियों से जुड़े रिटर्न का वादा करने या विज्ञापन देने की सख्त मनाही है।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| अदालत | दिल्ली हाई कोर्ट (जस्टिस मनोज जैन)। |
| आरोपी | एक वकील (शाहदरा बार एसोसिएशन का सदस्य)। |
| जमानत की अवधि | 2 सप्ताह (अंतरिम)। |
| कारण | बच्चों के स्कूल एडमिशन के लिए फंड का इंतजाम करना। |
| आरोप | ₹100 करोड़ का पोंजी/एल्गोरिथम ट्रेडिंग घोटाला। |
| कानूनी स्थिति | आरोपी को पहले ही कुछ अन्य मामलों में ‘डिफ़ॉल्ट बेल’ मिल चुकी है। |
अपराध और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के बीच संतुलन
दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला दर्शाता है कि कानून की नजर में अपराध की गंभीरता अपनी जगह है, लेकिन आरोपी के परिवार और विशेष रूप से बच्चों के भविष्य जैसे मौलिक अधिकारों को पूरी तरह अनदेखा नहीं किया जा सकता। हालांकि, अंतरिम जमानत की यह अल्पकालिक अवधि केवल एक विशिष्ट उद्देश्य (दाखिला और फंड) के लिए दी गई है, न कि केस के गुणों (Merits) के आधार पर।

