Tuesday, October 27, 2026
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Movie Vs Food: टिकट सस्ता, पॉपकॉर्न महंगा! आम आदमी कहां जाए?…पॉपकॉर्न के दाम ने उड़ाई कोर्ट की नींद!, मनोरंजन के अधिकार पर टिप्पणी

Movie Vs Food: कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस के. एस. हेमलेखा की बेंच ने मल्टीप्लेक्सों में मूवी टिकट और खाने-पीने की चीजों (विशेषकर पॉपकॉर्न) की अत्यधिक कीमतों पर कड़ी नाराजगी जताई है।

हाई कोर्ट ‘होम्बले फिल्म्स’ और ‘मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। ये याचिकाएं राज्य सरकार के उस फैसले को चुनौती देती हैं, जिसमें मूवी टिकट की कीमत ₹200 (टैक्स को छोड़कर) तय करने का आदेश दिया गया था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि मनोरंजन आम आदमी की पहुंच में होना चाहिए और सुझाव दिया कि टिकट दरों को हवाई किराए (Airfares) की तरह विनियमित (Regulate) करने की आवश्यकता हो सकती है।

“मनोरंजन अमीरों के लिए ही क्यों?” (Access to Entertainment)

  • जस्टिस हेमलेखा ने मल्टीप्लेक्सों की बिजनेस पॉलिसी पर सवाल उठाए।
  • कीमतों का अंतर: “पॉपकॉर्न की कीमत अक्सर फिल्म के टिकट से भी ज्यादा होती है… एक आम इंसान के लिए यह खर्च उठाना संभव नहीं है।”
  • समान अवसर: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मनोरंजन एक ऐसी सेवा है जिसे कीमतों के आधार पर केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं किया जा सकता।

हवाई किराए जैसा रेगुलेशन? (The ‘Airfare’ Suggestion)

  • सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कीमतों को ‘स्टैंडर्ड’ बनाने का विचार रखा।
  • रेगुलरैजेशन: जस्टिस हेमलेखा ने कहा, कुछ-कुछ हवाई टिकट की तरह, सभी मूवी टिकटों का भी नियमितीकरण होना चाहिए।
  • रेवेन्यू का तर्क: जब याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि कीमतें बाजार के हिसाब से तय होनी चाहिए, तो कोर्ट और कर्नाटक फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स ने काउंटर किया कि यदि कीमतें कम होंगी, तो थिएटर हाउसफुल होंगे और रेवेन्यू (राजस्व) ज्यादा बढ़ेगा।

कानूनी पेंच: ₹200 की कैपिंग और ‘स्टे’ (Legal Battle)

यह विवाद पिछले साल से चल रहा है। 12 सितंबर, 2025 को कर्नाटक सरकार ने सिनेमा रेगुलेशन रूल्स में संशोधन कर ₹200 की अधिकतम सीमा (Cap) लगा दी थी। 23 सितंबर, 2025 को हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने इस नियम पर ‘स्टे’ लगा दिया था, जिसे बाद में डिवीजन बेंच ने भी बरकरार रखा। फिलहाल मल्टीप्लेक्स अपनी मर्जी से कीमतें वसूल रहे हैं। यह ₹200 का नियम उन ‘प्रीमियम’ स्क्रीन्स पर लागू नहीं होता जहाँ 75 से कम सीटें हैं।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
अदालतकर्नाटक हाई कोर्ट (जस्टिस के. एस. हेमलेखा)।
मुख्य मुद्दामल्टीप्लेक्स में टिकट और पॉपकॉर्न की अत्यधिक कीमतें।
सरकार का स्टैंडआम जनता के लिए टिकट की कीमत ₹200 तय करना।
मल्टीप्लेक्स का तर्ककीमतें ‘फ्री मार्केट’ और फिल्म की डिमांड पर आधारित होनी चाहिए।
अगली सुनवाईजून 2026 (सरकार को 2 हफ्ते में जवाब दाखिल करना होगा)।

उपभोक्ता अधिकारों की जीत की ओर?

कर्नाटक हाई कोर्ट की ये टिप्पणियां देश भर के सिनेमा प्रेमियों के लिए एक बड़ी उम्मीद हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि “मनोरंजन” कोई विलासिता (Luxury) नहीं है जिस पर केवल अमीर का अधिकार हो। यदि हवाई टिकटों की तरह मूवी टिकटों की भी ‘फ्लेक्सी-प्राइसिंग’ (Flexi-pricing) की सीमा तय होती है, तो यह आम दर्शकों के लिए बहुत बड़ी राहत होगी।

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