याचिका में हाईकोर्ट से मांगी गई 4 प्रमुख राहतें (Prayers)
- CIC आदेश को रद्द करना (Writ of Certiorari): CIC के अप्रैल 2026 के आदेश को रद्द किया जाए।
- RTI ट्रांसफर करने का निर्देश (Writ of Mandamus): ECI को निर्देश दिया जाए कि वह इस RTI आवेदन को RTI एक्ट की धारा 6(3) के तहत सभी राज्यों/UTs के CEOs को हस्तांतरित करे।
- धारा 6(3) पर कानूनी स्पष्टता: यह घोषित किया जाए कि RTI अधिनियम की धारा 6(3) विकेंद्रीकृत डेटा की स्थिति में एक साथ कई लोक प्राधिकरणों को आवेदन ट्रांसफर करने की अनुमति देती है।
- डेटा का स्वतः प्रकाशन (Section 4): ECI को निर्देश दिया जाए कि वह चुनाव ड्यूटी के दौरान होने वाली मौतों के आंकड़ों का एक केंद्रीकृत रिकॉर्ड बनाए और RTI एक्ट की धारा 4 के तहत इसे स्वतः (Proactively) अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करे।
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने 2024 के आम संसदीय चुनावों के दौरान चुनाव ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारियों और अर्धसैनिक बलों/सुरक्षा कर्मियों की मौतों (Fatalities) के केंद्रीकृत आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग को लेकर दायर एक अत्यंत महत्वपूर्ण रिट याचिका पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि निर्वाचन आयोग यह कहकर मौतों का राष्ट्रीय डेटा देने से बच रहा है कि यह रिकॉर्ड विकेंद्रीकृत (Decentralised) है और केवल राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) के पास है।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सेवारत अधिकारी और जी/87 बटालियन (इंफाल, मणिपुर) में तैनात असिस्टेंट कमांडेंट राहुल सोलंकी द्वारा दायर इस याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए संबंधित प्राधिकारियों से जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता ने सीआईसी के 30 अप्रैल 2026 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें निर्वाचन आयोग को आरटीआई आवेदन सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को स्थानांतरित (Transfer) करने से छूट दे दी गई थी।
याचिकाकर्ता की मुख्य विधिक दलीलें एवं संवैधानिक आधार
1. ‘संवैधानिक नियंत्रण ECI का, तो डेटा देने की जिम्मेदारी से कैसे बच सकते हैं?’
- याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता अंशुल कुमार और मनीष मिश्रा ने दलील दी कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA, 1951) की धारा 28A एवं 159 के तहत चुनाव अवधि के दौरान तैनात सभी प्रशासनिक, सरकारी और सुरक्षा बल सीधे तौर पर भारत निर्वाचन आयोग के अधीक्षण, निर्देशन, नियंत्रण और अनुशासनात्मक अधिकार क्षेत्र में (Deemed Deputation पर) कार्य करते हैं।
- जब संपूर्ण चुनावी मशीनरी का सर्वोच्च नियंत्रण आयोग के पास है, तो ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मियों के डेटा से हाथ खींचना और नागरिकों को देश के सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में दर्जनों अलग-अलग आरटीआई लगाने के लिए विवश करना सूचना के अधिकार की मूल भावना को ही नष्ट कर देता है।
2. आरटीआई कानून की धारा 6(3) का उल्लंघन
- याचिका में कहा गया है कि जब निर्वाचन आयोग के जन सूचना अधिकारी (CPIO) ने स्वयं यह स्वीकार कर लिया कि जानकारी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) के पास उपलब्ध हो सकती है, तो आरटीआई अधिनियम की धारा 6(3) के तहत आवेदन को 5 दिनों के भीतर उन सभी संबंधित अधिकारियों को स्वतः स्थानांतरित करना आयोग का कानूनी कर्तव्य था।
3. अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत जानने का मौलिक अधिकार
- याचिकाकर्ता, जिन्होंने स्वयं संवेदनशील क्षेत्रों में चुनावी ड्यूटी की है, ने रेखांकित किया कि अप्रैल से जून 2024 के भीषण हीटवेव (लू) के दौरान देश भर में कई मतदान कर्मियों और सुरक्षा बलों की असमय मौत हुई।
- देश के नागरिकों और सुरक्षा बलों के कर्मियों को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत यह जानने का मौलिक अधिकार है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान कुल कितने कर्मियों की जान गई और उनकी मृत्यु का विशिष्ट चिकित्सीय/तथ्यात्मक कारण क्या था।
याचिका में की गई 4 प्रमुख विधिक प्रार्थनाएं (Prayers)
- उत्प्रेषण रिट (Writ of Certiorari): केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) द्वारा 30 अप्रैल 2026 को पारित आदेश को मनमाना, गैर-कानूनी और आरटीआई कानून की योजना के विपरीत घोषित करते हुए पूरी तरह निरस्त (Quash) किया जाए।
- परमादेश रिट (Writ of Mandamus): निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया जाए कि वह याचिकाकर्ता के मूल आरटीआई आवेदन को धारा 6(3) के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को तुरंत स्थानांतरित करे और समयबद्ध तरीके से सूचना प्रकटीकरण सुनिश्चित कराए।
- धारा 6(3) पर न्यायिक घोषणा: न्यायालय विधिक रूप से घोषित करे कि साधारण खंड अधिनियम, 1897 (General Clauses Act, 1897) की धारा 13 (जिसके अनुसार एकवचन में बहुवचन शामिल होता है) के आलोक में, जब जानकारी विकेंद्रीकृत हो तो आरटीआई की धारा 6(3) एक ही आवेदन को कई संबंधित लोक प्राधिकारियों (Multiple Public Authorities) को स्थानांतरित करने की अनुमति देती है।
- स्वतः प्रकटीकरण का वैधानिक दायित्व: निर्वाचन आयोग को आरटीआई अधिनियम की धारा 4 के तहत अपने सांविधिक दायित्वों का पालन करते हुए भविष्य में चुनाव ड्यूटी के दौरान होने वाली सभी मौतों/हताहतों के रिकॉर्ड को व्यवस्थित रूप से संकलित, संधारित और सार्वजनिक डोमेन में स्वतः प्रकाशित (Proactively Publish) करने का निर्देश दिया जाए।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि: 2 साल का विधिक संघर्ष
- 27 जुलाई 2024 (मूल आरटीआई): राहुल सोलंकी ने निर्वाचन आयोग में आरटीआई दाखिल कर 2024 के लोकसभा चुनावों में ड्यूटी के दौरान मृत सरकारी कर्मियों की कुल संख्या और उनकी मौत का कारण मांगा।
- 2 अगस्त 2024 (ECI CPIO का जवाब): निर्वाचन आयोग के सीपीआईओ ने कहा कि यह जानकारी नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में केंद्रीय स्तर पर संधारित नहीं की जाती और यह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सीईओ के पास हो सकती है; आयोग ने आवेदन को ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया।
- प्रथम अपील: प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने भी याचिकाकर्ता को हर राज्य के सीईओ के समक्ष अलग-अलग आरटीआई दायर करने की सलाह दी।
- 30 अप्रैल 2026 (CIC का आदेश): मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) राज कुमार गोयल ने दूसरी अपील खारिज करते हुए माना कि निर्वाचन आयोग पर सभी राज्यों से डेटा एकत्र करने या ट्रांसफर करने का दबाव डालना प्रशासनिक बोझ और अनुचित मांग है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: राहुल सोलंकी (असिस्टेंट कमांडेंट, CRPF) बनाम भारत निर्वाचन आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग व अन्य [W.P.(C) – दिल्ली उच्च न्यायालय]
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता की ओर से: अधिवक्ता अंशुल कुमार एवं मनीष मिश्रा
- प्रासंगिक कानून एवं संवैधानिक प्रावधान:
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 19(1)(a) (सूचना का अधिकार) एवं अनुच्छेद 324 (चुनाव आयोग का अधीक्षण)
- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 28A एवं 159 (चुनावी ड्यूटी कर्मियों का ईसीआई के अधीन होना)
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(3) (आवेदन का स्थानांतरण) एवं धारा 4(1)(b) (स्वतः प्रकटीकरण)
- साधारण खंड अधिनियम, 1897 की धारा 13
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
- एस.पी. गुप्ता बनाम भारत संघ (1981, सुप्रीम कोर्ट) एवं एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) बनाम भारत संघ (2002) — ‘पारदर्शिता और शासन के मामलों में नागरिकों का जानने का अधिकार लोकतांत्रिक जवाबदेही का मूल आधार है।’
- सीबीएसई बनाम आदित्य बंदोपाध्याय (2011, सुप्रीम कोर्ट) — ‘आरटीआई अधिनियम के तहत जनहित और प्रशासनिक दक्षता के बीच उचित संतुलन।’
- अदालत: दिल्ली उच्च न्यायालय
- अगली सुनवाई: दिसंबर 2026
Election Duty: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| याचिकाकर्ता | राहुल सोलंकी (असिस्टेंट कमांडेंट, 87वीं बटालियन CRPF, इंफाल, मणिपुर) |
| विवाद का विषय | 2024 के आम चुनावों में ड्यूटी पर मारे गए/मृत सरकारी कर्मियों का देशव्यापी डेटा |
| चुनौती | CIC के अप्रैल 2026 के उस आदेश को, जिसमें ECI द्वारा RTI आवेदनों को स्थानांतरित करने की मांग खारिज की गई थी |
| संविधान/कानून के तहत आधार | संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) (सूचना का अधिकार), अनुच्छेद 324 और RTI अधिनियम की धारा 6(3) व 4 |

