Sunday, November 1, 2026
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Election News: SIR में मतदाता सूची से नाम हटाने हेतु बल्क फॉर्म-7 जमा करने का मामला; ECI को दिए सुधारात्मक कदम उठाने करने के निर्देश

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मामले की पृष्ठभूमि: फॉर्म 7 का दुरुपयोग और पक्षों की दलीलें

  1. विशेष समुदाय को निशाना बनाने का आरोप:याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि छत्तीसगढ़ और केरल से जुड़े एसआईआर मामले सुलझ चुके हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में फर्जी तरीके से ‘फॉर्म 7’ जमा कर नाम हटाने का प्रयास एक सुनियोजित साजिश (Orchestrated Effort) है। उदाहरण देते हुए वकील ने बताया कि एक निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक विशेष समुदाय के सदस्यों को लक्षित करने के लिए 32 फॉर्म जमा किए गए थे। इनमें से दो फॉर्म पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के हस्ताक्षर भी दर्ज थे, जो गंभीर विसंगतियों को दर्शाते हैं।
  2. तेलंगाना और कर्नाटक का हवाला:याचिकाकर्ता पक्ष ने तर्क दिया कि तेलंगाना और कर्नाटक में ऐसी ही फर्जी गतिविधियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन उत्तर प्रदेश में अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने से फर्जीवाड़ा करने वालों के हौसले बुलंद हो गए।
  3. चुनाव आयोग (ECI) का पक्ष:ECI की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने स्वीकार किया कि थोक में फॉर्म 7 आवेदन प्राप्त हुए थे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग के अधिकारियों ने उनकी जांच और क्रॉस-वेरिफिकेशन किया, और फर्जी पाए जाने पर किसी भी आवेदन पर कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि औपचारिक शिकायत या नोट मिलने पर आयोग आगे की तथ्यात्मक जांच करने को तैयार है।

केरल एसआईआर (Kerala SIR) पर निर्देश:

केरल में सत्यापन की समय-सीमा बढ़ाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सीमा बढ़ाने से इंकार कर दिया। CJI सूर्यकांत ने कहा कि मतदाता सूची में सुधार या नाम जोड़ना एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है। यदि कोई योग्य नागरिक छूट गया है, तो उसकी जानकारी याचिकाकर्ता ECI को सौंपे और कोर्ट मामले को लंबित रखकर ECI को सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आदेश देगा।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने के उद्देश्य से थोक/बल्क (Bulk Submission) में जमा किए गए ‘फॉर्म-7’ (Form 7 – Objection to inclusion/deletion of name in electoral roll) के मामलों में सामने आई गंभीर विसंगतियों की जांच करने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) को दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन-न्यायाधीशों की विशेष पीठ ने कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किया।

शीर्ष अदालत का मुख्य आदेश एवं विधिक निर्देश

सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे लंबित एवं अनसुलझी विसंगतियों का पूरा विवरण एक औपचारिक नोट (Note) के माध्यम से निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिवक्ता को सौंपें।

पीठ ने अपने आदेश में दर्ज किया: “जो विसंगतियां न्यायालय के संज्ञान में लाई गई हैं, उन्हें याचिकाकर्ता के विद्वान वकील एक नोट के माध्यम से भारत निर्वाचन आयोग के विद्वान वरिष्ठ वकील को सौंपेंगे। इसकी प्राप्ति पर, निर्वाचन आयोग तथ्यात्मक पहलुओं की निष्पक्ष जांच करेगा, तत्पश्चात आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएगा और न्यायालय के समक्ष एक अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) प्रस्तुत करेगा।”

शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग को याचिकाकर्ता के नोट का जवाब देने और जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय प्रदान किया है।

अदालत में प्रस्तुत मुख्य दलीलें एवं विधिक बिंदु

1. निर्वाचन आयोग का पक्ष: ‘बल्क फॉर्म फर्जी पाए गए, कोई कार्रवाई नहीं की गई’

  • ECI की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायडू (D.S. Naidu) ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश में थोक (Bulk) में फॉर्म-7 आवेदन जमा कराए गए थे: “हमने पाया कि थोक में फॉर्म-7 आवेदन जमा किए गए थे। हमारे अधिकारियों ने मौके पर जाकर उनकी गहन जांच और क्रॉस-वेरिफिकेशन किया। वे सभी आवेदन पूरी तरह फर्जी पाए गए और आयोग ने उनके आधार पर किसी भी मतदाता का नाम नहीं हटाया है (Not acted upon)।”
  • ECI के वकील ने कहा कि आयोग ऐसे दावों की आधिकारिक जांच तभी कर सकता है जब उसके समक्ष औपचारिक शिकायतें दर्ज कराई जाएं।

2. याचिकाकर्ताओं की ओर से गंभीर आरोप:

  • याचिकाकर्ताओं के वकील ने ECI के रुख का विरोध करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्य आयोग के दावों से मेल नहीं खाते:
    • विशिष्ट समुदाय को निशाना बनाने का आरोप: एक ही निर्वाचन क्षेत्र में एक विशेष समुदाय के सदस्यों को लक्षित करते हुए 32 फॉर्म जमा किए गए।
    • बीएलओ (BLO) की संलिप्तता: रिकॉर्ड में दो फॉर्म ऐसे पाए गए जिन पर बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के बाकायदा हस्ताक्षर मौजूद थे।
    • अन्य राज्यों की नजीर: वकील ने रेखांकित किया कि तेलंगाना और कर्नाटक में जब बल्क फॉर्म-7 के जरिए फर्जी आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, तो अदालतों व प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के निर्देश दिए थे। किंतु उत्तर प्रदेश में ऐसा न किए जाने से इसे एक ‘संगठित प्रयास’ (Orchestrated Effort) के रूप में बढ़ावा मिला।

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केरल में समयसीमा बढ़ाने से इनकार: निरंतर प्रक्रिया के तहत सुधार का विकल्प

उत्तर प्रदेश के साथ-साथ केरल और छत्तीसगढ़ के SIR मामलों की सुनवाई करते हुए पीठ ने केरल में सत्यापन प्रक्रिया की समयसीमा आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।

  • पीठ ने स्पष्ट किया कि केरल में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
  • CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि नाम जोड़ने या संशोधन की प्रक्रिया एक सतत चलने वाली वैधानिक प्रक्रिया है:“यदि आपको लगता है कि अभी भी ऐसे लोग हैं जिन्हें मौका मिलना चाहिए था, तो उनके विवरण जुटाकर ECI के समक्ष अभ्यावेदन (Representation) दीजिए। हम आयोग से कहेंगे कि वह उन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे, और हम इस मामले को लंबित रखेंगे।”

मामले का विधिक विवरण

  • न्यायालय: भारत का सर्वोच्च न्यायालय
  • केस संदर्भ: तनुज पुनिया बनाम भारत निर्वाचन आयोग व अन्य [W.P.(C) No. 1129/2025 व संबद्ध मामले]
  • पीठ: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना
  • आदेश की तिथि: 30 अक्टूबर 2026
  • संबद्ध नियम व प्रपत्र: जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 — फॉर्म-7 (मतदाता सूची में नाम सम्मिलित किए जाने पर आपत्ति अथवा नाम विलोपन हेतु आवेदन)
  • अनुपालन रिपोर्ट की समयसीमा: 4 सप्ताह

Election News: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतभारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
पीठमुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना
मामला/विषययूपी एसआईआर (UP SIR) – फॉर्म 7 के माध्यम से मतदाता सूची से नाम हटाने में फर्जीवाड़े का आरोप
याचिकाकर्ता पक्षतनुज पुनिया (कांग्रेस सांसद) व अन्य | प्रतिनिधित्व: वरिष्ठ अधिवक्ता व काउंसिल
चुनाव आयोग (ECI) पक्षप्रतिनिधित्व: वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू (Senior Advocate DS Naidu)
मुख्य मुद्दायूपी के एक निर्वाचन क्षेत्र में एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने के लिए 32 फर्जी फॉर्म 7 जमा करने का आरोप।
अदालत का फैसला1. ECI को जांच के निर्देश: याचिकाकर्ताओं के नोट पर चुनाव आयोग जांच करे और सुधारात्मक रिपोर्ट दाखिल करे।
2. केरल SIR सीमा बढ़ाने से इंकार: केरल में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है; छूटे हुए लोग प्रतिनिधित्व दे सकते हैं जिस पर ECI विचार करेगा।
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