Essential Checks: उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण ने घर खरीदारों को धोखाधड़ी से बचाने और रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण एडवाइज़री (सलाह) जारी की है।
यूपी रेरा चेयरमैन का संदेश
यूपी रेरा उत्तर प्रदेश में एक पारदर्शी, जवाबदेह और खरीदार के अनुकूल माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। डिजिटल टूल्स और रेरा पोर्टल का उपयोग करके खरीदार खुद को सशक्त बना सकते हैं और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी का शिकार होने से बच सकते हैं। यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने स्पष्ट किया है कि खरीदारों को प्रमोटरों या एजेंटों के केवल विज्ञापनों, ब्रोशर या मौखिक आश्वासनों (Verbal Assurances) पर भरोसा नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले UPRERA के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर जांचनी चाहिए।
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले 6 अनिवार्य जांच (6 Key Checks)
भूमि का मालिकाना हक (Land Title & Ownership): सबसे पहला कदम खरीदारों को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि प्रमोटर/बिल्डर के पास उस जमीन का स्पष्ट और कानूनी रूप से वैध मालिकाना हक (Clear Title) है या नहीं। जमीन पूरी तरह से विवादों, मुकदमों या किसी भी प्रकार के कानूनी दावों (Encumbrances) से मुक्त होनी चाहिए।
स्वीकृत नक्शा और लेआउट प्लान (Sanctioned Map): निर्माण की वैधता.संबंधित विकास प्राधिकरण (जैसे- प्राधिकरण, नगर निगम आदि) द्वारा मंजूर किए गए आधिकारिक बिल्डिंग प्लान और लेआउट की जांच करें। यह सुनिश्चित करें कि जो फ्लैट या प्लॉट आपको बेचा जा रहा है, वह स्वीकृत नक्शे के बिल्कुल अनुरूप हो। नक्शे से अलग किया गया निर्माण भविष्य में अवैध घोषित हो सकता है।
इन्वेंट्री विवरण का मिलान (Inventory Details): धोखाधड़ी से बचाव.आपको जो यूनिट (फ्लैट, प्लॉट या कमर्शियल स्पेस) ऑफर की जा रही है, उसका रेरा पोर्टल पर उपलब्ध इन्वेंट्री डेटा से मिलान करें। इससे यह पुष्टि होती है कि वह यूनिट आधिकारिक तौर पर बिक्री के लिए उपलब्ध है और रजिस्टर्ड है। यह जांच एक ही फ्लैट को कई लोगों को बेचने (Duplication) की धोखाधड़ी को रोकती है।
प्रोजेक्ट का बैंक खाता (Project Bank Account): फंड की सुरक्षा.रेरा के नियमों के मुताबिक, बिल्डर को खरीदारों से जुटाए गए पैसे का कम से कम 70% हिस्सा एक विशेष ‘कलेक्शन अकाउंट’ (एस्क्रो अकाउंट) में जमा करना अनिवार्य है। खरीदारों को इस बैंक खाते की जानकारी सत्यापित करनी चाहिए ताकि उनका पैसा किसी दूसरे प्रोजेक्ट में डायवर्ट न हो और केवल उसी बिल्डिंग के निर्माण में लगे।
तिमाही प्रगति रिपोर्ट (Quarterly Progress Reports – QPR): काम की रफ्तार.यूपी रेरा के नियम के अनुसार, बिल्डरों को हर तीन महीने में अपने प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट (QPR) पोर्टल पर अपलोड करनी होती है। खरीदार को इन रिपोर्टों को देखना चाहिए ताकि पता चल सके कि कंस्ट्रक्शन समय पर चल रहा है या नहीं और बिल्डर नियमों का पालन कर रहा है या नहीं।
बिल्डर के खिलाफ शिकायतों का इतिहास (Complaint History): अंतिम निर्णय से पहले.निवेश करने से पहले यह ज़रूर चेक करें कि उस प्रमोटर/बिल्डर के खिलाफ रेरा में कितनी शिकायतें दर्ज हैं और उनका स्टेटस क्या है। यदि किसी बिल्डर के खिलाफ बहुत अधिक शिकायतें हैं या मामले अनसुलझे हैं, तो वहां निवेश करना आपके लिए जोखिम भरा (High Risk) हो सकता है।
चेकलिस्ट समरी (Quick Checklist)
| जांच का विषय | जांचने का उद्देश्य | कहां देखें? |
| 1. लैंड टाइटल | मालिकाना हक साफ है या विवादित, यह जानने के लिए। | UPRERA आधिकारिक पोर्टल |
| 2. स्वीकृत नक्शा | निर्माण वैध है या अवैध (Deviation), यह परखने के लिए। | UPRERA पोर्टल / लोकल अथॉरिटी |
| 3. इन्वेंट्री मैच | डबल बुकिंग या फर्जी बिक्री से बचने के लिए। | UPRERA आधिकारिक पोर्टल |
| 4. बैंक अकाउंट (70%) | आपके पैसे का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए। | UPRERA आधिकारिक पोर्टल |
| 5. QPR (तिमाही रिपोर्ट) | काम की गति और पजेशन की सही टाइमलाइन जानने के लिए। | UPRERA आधिकारिक पोर्टल |
| 6. शिकायतों की संख्या | बिल्डर का ट्रैक रिकॉर्ड और साख (Reputation) जानने के लिए। | UPRERA आधिकारिक पोर्टल |
निष्कर्ष (Takeaway)
यदि आप उत्तर प्रदेश (जैसे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ आदि) में कोई भी घर या प्लॉट खरीदने की सोच रहे हैं, तो रेरा की यह एडवाइज़री आपके लिए एक सुरक्षा कवच है। कभी भी ब्रोकर या बिल्डर की मीठी बातों में आकर तुरंत टोकन मनी न दें; पहले रेरा नंबर लें और ऊपर दिए गए 6 स्टेप्स को पोर्टल पर खुद वेरिफाई करें।

