Wednesday, November 4, 2026
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Estranged wife: पत्नी के पहनावे और खाना बनाने पर टिप्पणी करना क्रूरता नहीं…पति और उसके परिवार पर दर्ज केस रद्द

Estranged wife: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी के पहनावे या खाना बनाने के तरीके पर की गई टिप्पणियां गंभीर क्रूरता या प्रताड़ना की श्रेणी में नहीं आतीं।

पति और उसके परिवार को ट्रायल का सामना कराना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग

जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस संजय ए. देशमुख की बेंच ने कहा, “यह कहना कि पत्नी ठीक कपड़े नहीं पहनती या खाना ठीक से नहीं बना पाती, गंभीर क्रूरता या प्रताड़ना नहीं मानी जा सकती।” कोर्ट ने माना कि जब रिश्ते बिगड़ते हैं तो आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। कोर्ट ने कहा कि जब शादी से पहले सारी बातें स्पष्ट कर दी गई थीं और आरोप सामान्य या अस्पष्ट हैं, तो ऐसे मामलों में पति और उसके परिवार को ट्रायल का सामना कराना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। औरंगाबाद बेंच ने एक व्यक्ति और उसके परिवार के खिलाफ उसकी पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर और उससे जुड़ी कानूनी कार्यवाही को रद्द कर दिया।

498A के तहत मामला दर्ज था

यह मामला आईपीसी की धारा 498A (अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 85) के तहत दर्ज किया गया था, जो पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा महिला पर की गई क्रूरता से जुड़ा है। यह संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौता योग्य अपराध है, यानी पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है, जमानत अधिकार नहीं है और मामला कोर्ट के बाहर सुलझाया नहीं जा सकता।

शादी के डेढ़ महीने बाद लगाए थे आरोप

महिला ने मार्च 2022 में शादी की थी। यह उसकी दूसरी शादी थी, पहली शादी 2013 में आपसी सहमति से तलाक के साथ खत्म हुई थी। महिला ने आरोप लगाया कि शादी के डेढ़ महीने बाद से उसे ठीक से नहीं रखा गया। उसने यह भी कहा कि पति के मानसिक और शारीरिक रोगों की जानकारी उससे छिपाई गई थी।

शादी से पहले ही बीमारी की जानकारी दी गई थी

कोर्ट ने चार्जशीट में शामिल दंपती के बीच शादी से पहले हुए चैट्स का हवाला दिया, जिनमें पति ने अपनी दवाओं के बारे में स्पष्ट रूप से बताया था। कोर्ट ने माना कि पत्नी को बीमारी की जानकारी पहले से थी और इलाज की बात भी उसे बताई गई थी।

15 लाख की डिमांड का आरोप भी साबित नहीं हुआ

पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि दिवाली के आसपास फ्लैट खरीदने के लिए 15 लाख रुपए की मांग की गई थी। लेकिन कोर्ट ने इस दावे पर सवाल उठाए, क्योंकि पति पहले से ही एक फ्लैट का मालिक था। कोर्ट ने कहा कि परिवार के खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य और बिना ठोस विवरण के हैं। चार्जशीट में पत्नी के बयान के अलावा कोई सबूत नहीं था और जांच अधिकारी ने पड़ोसियों से भी पूछताछ नहीं की थी।

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