Wednesday, November 4, 2026
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Forged Signatures: हस्ताक्षर अंग्रेजी में, खुद को बताया अनपढ़…फिर क्या था, हाईकोर्ट को हुआ शक, क्यों सीबीआई के पास भेजा मामला

Forged Signatures: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के कोर्ट रूम में खुद को अनपढ़ बताने वाले याचिकाकर्ता के कोर्ट रिकॉर्ड में अंग्रेजी में हस्ताक्षर मिले।

मामले को सीबीआई से जांच कराने का निर्देश

हाईकोर्ट के जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि भले ही यह याचिका खुद ‘संदिग्ध’ है, लेकिन इसके पीछे छिपे चेहरे और इलाके में हो रहे अवैध खनन के आरोप दोनों ही बेहद गंभीर हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच जरूरी है। इस तरह कोर्ट रूम में अवैध खनन से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) के सनसनीखेज आपराधिक मोड़ पर पहुंच गई। अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग और ब्लैकमेलिंग का खेल मानते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है।

यह रही अदालत की टिप्पणी

अदालत ने न्यायिक प्रणाली से खिलवाड़ करने वालों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, याचिकाकर्ता को इस बात का रत्ती भर भी अंदाजा नहीं है कि उसकी याचिका में क्या मुद्दे उठाए गए हैं, न ही उसे यह पता है कि यह याचिका किसने और कैसे ड्राफ्ट (तैयार) की है। हम अज्ञात लोगों द्वारा दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों के लिए किसी अजनबी के नाम पर फर्जी रिट याचिकाएं दायर करने और फिर मतलब निकल जाने पर उन्हें वापस लेने की इस प्रवृत्ति को कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते। इस अदालत की कार्यवाही को मजाक नहीं बनाया जा सकता।

मामला क्या था? (महेंद्रगढ़ में अवैध खनन और याचिका वापसी का खेल)

यह पूरा घटनाक्रम हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के बाखरिया (Bakhrija) गांव से जुड़ा हुआ है।

अशोक के नाम पर PIL: हाईकोर्ट में ‘अशोक’ नामक व्यक्ति के नाम से एक रिट याचिका दायर की गई थी, जिसमें महेंद्रगढ़ के बाखरिया गांव में बड़े पैमाने पर अवैध खनन (Illegal Mining) होने का आरोप लगाया गया था।

अचानक याचिका वापसी की गुहार: जब हाईकोर्ट ने इन गंभीर आरोपों पर संज्ञान लेते हुए संबंधित प्राधिकारियों और खनन विभाग से जवाब तलब किया, तो अचानक एक वकील कोर्ट में पेश हुए और याचिका को ‘वापस लेने’ (Withdraw) की अनुमति मांगी।

हाईकोर्ट को हुआ शक: जब अवैध खनन जैसे जनहित के बड़े मुद्दे पर अचानक केस वापस लेने की मांग उठी, तो पीठ को दाल में कुछ काला नजर आया। अदालत ने याचिकाकर्ता अशोक को 24 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश जारी कर दिया।

कोर्ट रूम ड्रामा: जज के सामने खुली पोल; अंगूठा नहीं, अंग्रेजी में साइन!

जब याचिकाकर्ता अशोक अदालत के सामने हाजिर हुआ, तो उसने जो बयान दिए उसने जजों को हैरान कर दिया।

यूं खुली कोर्ट रूम में पोल

केस की कोई जानकारी नहीं: कोर्ट द्वारा सीधे सवाल पूछे जाने पर अशोक बिल्कुल ‘क्लूलेस’ (अज्ञान) था। उसे यह तक नहीं पता था कि कोर्ट में उसके नाम से किस कंपनी या व्यक्ति के खिलाफ केस चल रहा है।

हस्ताक्षरों का अजीब झोल: अशोक ने अदालत को बताया कि वह ‘बिल्कुल अनपढ़’ है। लेकिन जब जजों ने मूल याचिका की फाइल देखी, तो उस पर अशोक के हस्ताक्षर अंग्रेजी (English) में बकायदा कर्सिव राइटिंग में थे। हद तो तब हो गई जब बाद में कोर्ट में जमा किए गए एक नए वकालतनामे/अथॉरिटी लेटर पर उसके हस्ताक्षर हिंदी (Hindi) में पाए गए।

सिग्नेचर फोर्जरी की आशंका: अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि इस मामले में याचिकाकर्ता अशोक केवल एक मुखौटा (Front) है। असली खेल पर्दे के पीछे से कोई और खेल रहा है, जिसने कोर्ट को गुमराह करने के लिए याचिका पर अशोक के फर्जी साइन (Forged Signatures) किए थे।

विश्लेषण: हाईकोर्ट का कड़ा रुख और CBI की एंट्री

हाईकोर्ट ने माना कि भूमाफिया या कॉर्पोरेट प्रतिद्वंद्विता (Corporate Rivalry) के तहत कुछ अज्ञात लोग कोर्ट का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए कर रहे थे यानी पहले केस कर के दबाव बनाओ और फिर सौदा हो जाने पर केस वापस ले लो। इस नेक्सस को तोड़ने के लिए कोर्ट ने आदेश जारी किए।

मुख्य बिंदु / केस फैक्ट्सहाईकोर्ट का विधिक निर्देश और वर्तमान स्थिति
याचिकाकर्ता (ऑन रिकॉर्ड)अशोक (निवासी: महेंद्रगढ़, हरियाणा)
मामले का विषयअरावली क्षेत्र के बाखरिया गांव में कथित अवैध खनन।
जांच का जिम्माCBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) के डिप्टी डायरेक्टर को सीधी जांच के आदेश।
CBI का कोर्ट में जवाब25 मई 2026 को हुई सुनवाई में सीबीआई के अधिवक्ता आकाशदीप सिंह ने कोर्ट को बताया कि मामले में प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) शुरू कर दी गई है।
कोर्ट का सख्त निर्देशमुख्य याचिका के सभी मूल विधिक रिकॉर्ड को रजिस्ट्रार जनरल की सुरक्षित कस्टडी (Safe Custody) में सील रखने का आदेश, ताकि कोई सबूत नष्ट न हो।
अगली सुनवाई की तिथि11 अगस्त 2026, जब सीबीआई को अपनी 3 महीने की जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी।

अवैध खनन पर भी रहेगी नजर

अदालत ने स्पष्ट किया कि भले ही इस याचिका को दायर करने का तरीका फर्जी और संदेहास्पद था, लेकिन महेंद्रगढ़ और अरावली (Aravalli Region) के संवेदनशील इलाकों में अवैध खनन की शिकायत को बंद नहीं किया जा सकता। सीबीआई जहां इस कानूनी जालसाजी की जांच करेगी, वहीं कोर्ट अरावली में पर्यावरण को हो रहे नुकसान और अवैध माइनिंग के मुख्य मुद्दे की स्वतंत्र रूप से समीक्षा करता रहेगा।

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