Judge Faces Threat: भारत के न्यायिक इतिहास में जजों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक मामला सामने आया है।
बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस गौतम एस. पटेल (Justice GS Patel) और उनके परिवार को निशाना बनाकर भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) में एक सुनियोजित और डरावना हिंसक अभियान (Sustained Campaign of Threats) चलाया जा रहा है। यह पूरा विवाद दाऊदी बोहरा (Dawoodi Bohra) समुदाय के धार्मिक प्रमुख के पद को लेकर वर्ष 2024 में जस्टिस पटेल द्वारा सुनाए गए एक ऐतिहासिक फैसले से जुड़ा है। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि धमकी देने वाले तत्वों ने लंदन में रह रही जस्टिस पटेल की बेटी को सड़क पर रोककर उन पर जानलेवा हमला किया, जिससे उनकी नाक में फ्रैक्चर (नाक की हड्डी टूट गई) हो गया।
2024 का वो ऐतिहासिक फैसला, जिससे शुरू हुआ विवाद
जस्टिस जी. एस. पटेल ने अपनी सेवानिवृत्ति से ठीक पहले, 23 अप्रैल 2024 को दाऊदी बोहरा समुदाय के 53वें ‘दाई-अल-मुतलक’ (Syedna – आध्यात्मिक गुरु) के पद को लेकर चल रहे 9 साल पुराने बेहद हाई-प्रोफाइल उत्तराधिकार विवाद पर अपना अंतिम फैसला सुनाया था।
मुफद्दल सैफुद्दीन को माना असली नेता: जस्टिस पटेल ने अपने फैसले में व्यवस्था दी थी कि दिवंगत 52 वें सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के बेटे मुफद्दल सैफुद्दीन (Mufaddal Saifuddin) ही समुदाय के वैध 53 वें प्रमुख हैं।
चैलेंजर की याचिका खारिज: कोर्ट ने प्रतिद्वंद्वी दावेदार ताहेर फखरुद्दीन (Taher Fakhruddin) के मुकदमे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वे दिवंगत धर्मगुरु द्वारा गुप्त रूप से खुद को उत्तराधिकारी नियुक्त (नस्स – Nass) किए जाने के दावे को साबित करने में पूरी तरह विफल रहे। वर्तमान में यह फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने चुनौती के रूप में लंबित है।
पिछले 10 महीनों से प्रताड़ना और हमले का खौफनाक सिलसिला
अदालती फैसले से नाराज अज्ञात तत्वों ने जस्टिस पटेल के परिवार को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाल बिछाया।
अगस्त 2025 (पहली धमकी): जस्टिस पटेल के मुंबई स्थित आवास और लंदन में उनकी बेटी के घर पर धमकी भरे पत्र भेजे गए। एक पत्र में तो उनकी बेटी के लंदन वाले घर में हुई चोरी (Break-in) की जिम्मेदारी भी ली गई थी।
22 अप्रैल 2026 (सड़क पर हमला): लंदन की सड़क पर एक अज्ञात नकाबपोश हमलावर ने जस्टिस पटेल की बेटी को बीच रास्ते में रोका और उन पर बर्बरता से हमला कर दिया। इस हमले में वे लहूलुहान हो गईं और उनकी नाक की हड्डी टूट गई।
5 जून 2026 (ताजा डिजिटल धमकी): लंदन पुलिस (हर्टफोर्डशायर पुलिस) को एक नया गुमनाम पत्र मिला है, जिस पर जर्मनी का डाक टिकट (German Postal Mark) लगा है। इसमें एक डिजिटल स्टोरेज डिवाइस (पेनड्राइव/चिप) भेजी गई है। सुरक्षा कारणों से परिवार ने इसे खुद एक्सेस नहीं किया और पुलिस को सौंप दिया। इस पत्र में साफ लिखा है कि परिवार पर हमला करने के लिए एक ‘कॉन्ट्रैक्ट’ (सुपारी) दी जा चुकी है।
अजीबोगरीब मांग: “यूट्यूब पर वीडियो बनाकर जज अपना फैसला वापस लें”
धमकी देने वाले अपराधियों की मांग कानून और न्यायिक व्यवस्था का मजाक उड़ाने वाली है। भेजे गए पत्रों में जस्टिस पटेल पर दबाव डाला गया है कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब (YouTube) पर एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से अपने दाऊदी बोहरा फैसले को वापस लें (Retract)। इस माफीनामे और बयान को देश की प्रमुख कानूनी संस्थाओं और मीडिया घरानों को प्रसारित (Disseminate) करने के कड़े निर्देश भी पत्रों में लिखे गए हैं।
विश्लेषण: मामले की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय जांच
| जांच एजेंसी / प्राधिकारी | की गई कार्रवाई और स्थिति |
| यूके काउंटर-टेररिज्म अथॉरिटी (UK Counter-Terrorism) | ब्रिटिश आतंकवाद विरोधी दस्ता इस हमले और पत्रों की जांच कर रहा है, क्योंकि इसमें विदेशी धरती (जर्मनी/लंदन) का इस्तेमाल कर एक पूर्व भारतीय जज के परिवार को निशाना बनाया गया है। |
| मुंबई पुलिस (Mumbai Police) | मुंबई में इस संबंध में एक नॉन-कॉग्निजेबल (NC) शिकायत दर्ज की गई है और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा की समीक्षा की जा रही है। |
| सर्वोच्च न्यायिक तंत्र | जस्टिस जी. एस. पटेल ने इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जानकारी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI), बॉम्बे हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और लंदन में स्थित भारतीय उच्चायोग (Indian High Commission) को दे दी है। |
दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद की पृष्ठभूमि (2014-2024): विवाद की शुरुआत: 2014 में 52 वें सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के निधन के बाद उनके बेटे मुफद्दल सैफुद्दीन ने बागडोर संभाली।
चाचा का दावा: दिवंगत सैयदना के सौतेले भाई खुजैमा कुतुबुद्दीन ने दावा किया कि वे असली ५३वें दाई हैं क्योंकि दिवंगत सैयदना ने उन्हें चुपके से उत्तराधिकारी चुना था।
9 साल का ट्रायल: विवाद जब नहीं सुलझा, तो 2014 में कुतुबुद्दीन हाई कोर्ट गए। 2016 में मुकदमे के दौरान उनका निधन हो गया, जिसके बाद उनके बेटे ताहेर फखरुद्दीन ने इस कानूनी जंग को आगे बढ़ाया, जिसे जस्टिस पटेल ने 2024 में खारिज कर दिया था।

