Saturday, August 15, 2026
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Land Encroachment: जाओ जमीन का स्वामित्व ले आएं, तब देंगे अधिकार… इस तरह ग्राम सभा की जमीन से मस्जिद हटाने का दिया आदेश, यहां का है मामला

Land Encroachment: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लखनऊ के बख्शी-का-तालाब इलाके में ग्राम सभा की भूमि पर बनी एक मस्जिद को हटाने (Eviction) के आदेश को बरकरार रखा है।

जस्टिस आलोक माथुर की बेंच ने शाहबान और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं पर लगाए गए आर्थिक जुर्माने को रद्द करते हुए उन्हें आंशिक राहत दी है। कोर्ट ने मामले के तथ्यों को गहराई से देखने के बाद कई बिंदु भी रखे।यह फैसला एक बार फिर स्थापित करता है कि सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित भूमि (जैसे खलिहान, चारागाह या तालाब) पर किया गया कोई भी निर्माण, चाहे वह कितना भी पुराना क्यों न हो, कानूनी रूप से वैध नहीं माना जाएगा यदि वह ग्राम सभा की संपत्ति है।

मामला क्या था? (The Dispute)

  • स्थान: बख्शी-का-तालाब, लखनऊ।
  • विवाद: राजस्व अधिकारियों की जांच में पाया गया कि ग्राम सभा की सुरक्षित भूमि, जो सरकारी रिकॉर्ड में ‘खलिहान’ के रूप में दर्ज है, उस पर मस्जिद का निर्माण कर अतिक्रमण किया गया है।
  • अधिकारियों का एक्शन: तहसीलदार और असिस्टेंट कलेक्टर ने जांच के बाद बेदखली (Eviction) का आदेश दिया और ₹36,000 का जुर्माना लगाया था।

हाई कोर्ट का मुख्य फैसला और तर्क

  • स्वामित्व का अभाव (No Right or Title): याचिकाकर्ता यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहे कि उस जमीन पर उनका कोई कानूनी हक, मालिकाना हक या हित (Right, Title, or Interest) है।
  • नियमों का पालन: कोर्ट ने पाया कि प्रशासन ने U.P. Revenue Code Rules के नियम 66 और 67 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया है। याचिकाकर्ताओं को नोटिस दिया गया था और उनकी आपत्तियां भी सुनी गई थीं।
  • खलिहान की भूमि: चूंकि जमीन रिकॉर्ड में ‘खलिहान’ दर्ज है, इसलिए यह ग्राम सभा की संपत्ति है और इस पर किसी भी प्रकार का निजी या धार्मिक निर्माण अवैध है।

जुर्माने पर मिली राहत (Relief on Penalty)

जुर्माना रद्द: कोर्ट ने ₹36,000 के जुर्माने को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जो सीधे तौर पर याचिकाकर्ताओं को उस मस्जिद के निर्माण या व्यक्तिगत कब्जे से जोड़ता हो।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें और कोर्ट का जवाब

  • दलील: याचिकाकर्ताओं का कहना था कि मस्जिद 60 साल पुरानी है और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया। साथ ही लेखपाल का बयान दर्ज नहीं किया गया।
  • जवाब: कोर्ट ने कहा कि राजस्व रिपोर्ट और उपलब्ध सामग्री से स्पष्ट है कि यह अतिक्रमण है। जब जमीन पर कोई कानूनी अधिकार ही नहीं है, तो बेदखली का आदेश पूरी तरह वैध है।
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