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Law panel: संपत्ति रजिस्ट्रेशन में सुधार की जरूरत…ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर रिपोर्ट मांगी

Law panel: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, देश में संपत्ति रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पारदर्शी और आधुनिक बनाने की जरूरत है।

संपत्ति पंजीकरण प्रणाली को नया ढांचा तैयार करें

उपनिवेशकालीन संपत्ति कानूनों की खामियों को रेखांकित करते हुए अदालत ने लॉ कमीशन से ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के उपयोग पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है, ताकि संपत्ति पंजीकरण प्रणाली को नया ढांचा दिया जा सके। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बिहार सरकार के 2019 के उस संशोधन को रद्द कर दिया, जिसमें जमाबंदी या म्यूटेशन प्रमाण के बिना संपत्ति की रजिस्ट्री करने से इनकार करने का अधिकार रजिस्ट्रारों को दिया गया था।

“ब्लॉकचेन से धोखाधड़ी और विवाद खत्म होंगे”

अदालत ने कहा कि ब्लॉकचेन तकनीक संपत्ति लेनदेन का सुरक्षित, पारदर्शी और अपरिवर्तनीय डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करती है, जिससे जालसाजी और दोहरी रजिस्ट्री की संभावना समाप्त हो जाती है। इससे खरीदारों को संपत्ति का स्वामित्व इतिहास आसानी से सत्यापित करने में मदद मिलती है और लेनदेन प्रक्रिया तेज होती है।

“संपत्ति खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता, देश की परिपक्वता का प्रतीक”

अदालत ने कहा कि मौजूदा कानून — ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, स्टांप एक्ट और रजिस्ट्रेशन एक्ट — अब भी औपनिवेशिक सोच पर आधारित हैं और भारत अब भी “प्रेसम्प्टिव टाइटलिंग सिस्टम” पर चलता है, जिसमें रजिस्ट्रेशन केवल लेनदेन का प्रमाण होता है, स्वामित्व का नहीं। अदालत ने कहा, “ब्लॉकचेन तकनीक भारत की रिकॉर्ड-कीपिंग प्रणाली की संरचनात्मक कमजोरियों को दूर कर सकती है और स्वामित्व ढांचे में सार्वजनिक विश्वास को मजबूत कर सकती है।”

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने 32 पन्नों के फैसले में लिखा,

“अचल संपत्ति पर स्वामित्व का संवैधानिक अधिकार अपने भीतर स्वतंत्र रूप से अर्जित करने, रखने और हस्तांतरित करने की स्वतंत्रता भी शामिल करता है। संपत्ति लेनदेन की दक्षता और पारदर्शिता किसी देश की संस्थागत परिपक्वता का दर्पण होती है।”

“66% सिविल मुकदमे संपत्ति विवाद से जुड़े”

कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्रेशन और स्वामित्व के बीच का यह अंतर नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी का कारण है और इसी वजह से देश में करीब 66% सिविल मुकदमे संपत्ति विवादों से जुड़े हैं। अदालत ने सुझाव दिया कि देश को अब “राज्य द्वारा गारंटीकृत निष्कर्षात्मक स्वामित्व प्रणाली (Conclusive Titling System)” की ओर बढ़ना चाहिए।

ब्लॉकचेन से एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सलाह दी कि ब्लॉकचेन आधारित एकीकृत डिजिटल भूमि रिकॉर्ड प्रणाली बनाई जाए, जिसमें कैडस्ट्रल मैप, सर्वे डेटा और राजस्व रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हों। इससे धोखाधड़ी, दोहरी रजिस्ट्री और जालसाजी पर रोक लगेगी।

बिहार के नियम असंवैधानिक घोषित

अदालत ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा बनाया गया नियम मनमाना और अव्यावहारिक है, क्योंकि राज्य में 80 फीसदी जमाबंदियां अब भी पूर्वजों के नाम पर हैं और म्यूटेशन प्रक्रिया अधूरी है। ऐसे में जमाबंदी या म्यूटेशन का प्रमाण देना अधिकांश लोगों के लिए असंभव है। अदालत ने कहा कि म्यूटेशन स्वामित्व का प्रमाण नहीं होता, यह सिर्फ राजस्व प्रविष्टि होती है। रजिस्ट्रेशन को म्यूटेशन से जोड़ना रजिस्ट्रारों को “टाइटल ट्रिब्यूनल” बना देता है, जो कि कानून के विपरीत है।

सुप्रीम कोर्ट का निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा, “जमाबंदी या होल्डिंग अलॉटमेंट को रजिस्ट्री की पूर्व शर्त बनाना मनमाना और असंवैधानिक है। इसलिए 10 अक्टूबर 2019 की अधिसूचना को निरस्त किया जाता है।”

संक्षेप में

  • सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के 2019 के नियम को रद्द किया
  • लॉ कमीशन से ब्लॉकचेन आधारित संपत्ति रजिस्ट्रेशन पर रिपोर्ट मांगी
  • कोर्ट ने कहा — देश को “Conclusive Titling System” की ओर बढ़ना होगा
  • 66% सिविल केस संपत्ति विवादों से जुड़े हैं, सुधार जरूरी
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