Teacher Vacancy: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के नियमों और शैक्षणिक योग्यताओं की विधिक व्याख्या करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है।
किस शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवार चाहिए, यह नियोक्ता का अधिकार
हाईकोर्ट के जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस विनोद कुमार की खंडपीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के उस पुराने आदेश को पूरी तरह से रद्द (Set Aside) कर दिया है, जिसमें कुछ उम्मीदवारों को घरेलू विज्ञान शिक्षक (Domestic Science Teacher – TGT) के पद पर नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने कहा, किसी विषय में मास्टर डिग्री (Master’s Degree) होने मात्र से कोई उम्मीदवार स्वचालित रूप से उस पद के लिए पात्र नहीं हो जाता, जिसके लिए भर्ती नियमों में उसी विषय में विशेष स्नातक (Bachelor’s Degree) की डिग्री मांगी गई हो। नियोक्ता (Employer) को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि उसे अपने कार्य के लिए किस शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवार चाहिए, और अदालतें आमतौर पर इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं।”
मामला क्या है?: बीए (पास) कोर्स बनाम डोमेस्टिक साइंस में ग्रेजुएशन
यह विधिक विवाद दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) द्वारा दिसंबर 2017 में जारी एक विज्ञापन से शुरू हुआ था।
अनिवार्य योग्यता: भर्ती नियमों (Recruitment Rules) के अनुसार, डोमेस्टिक साइंस शिक्षक (TGT) पद के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से घरेलू विज्ञान/गृह विज्ञान (Domestic Science/Home Science) में बैचलर डिग्री और शिक्षण विषय के रूप में गृह विज्ञान के साथ बी.एड (B.Ed.) होना अनिवार्य था।
उम्मीदवारों की योग्यता: कुछ ऐसे उम्मीदवारों का चयन हो गया जिनके पास सामान्य बीए (पास) डिग्री थी (जिसमें उन्होंने एक विषय के रूप में होम साइंस पढ़ा था) और बाद में उन्होंने होम साइंस में एमएससी/मास्टर्स (Master’s in Home Science) कर लिया था।
नियुक्ति रद्द: मार्च 2020 में दिल्ली सरकार ने यह कहते हुए उनके नियुक्ति पत्र वापस ले लिए कि उनके पास निर्धारित स्नातक डिग्री नहीं है। इसके बाद उम्मीदवार कैट (CAT) गए, जिसने उम्मीदवारों के पक्ष में फैसला सुनाया था। दिल्ली सरकार ने कैट के इसी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
हाई कोर्ट का विधिक दृष्टिकोण: पास कोर्स और ऑनर्स जैसी विशेष डिग्री में गुणात्मक अंतर
उम्मीदवारों की मुख्य दलील यह थी कि मास्टर डिग्री एक ‘उच्च योग्यता’ (Higher Qualification) है, इसलिए इसमें निचली योग्यता (स्नातक) स्वतः ही समाहित (Subsumed) मानी जानी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने बीए के तीनों साल होम साइंस पढ़ा था।
हाई कोर्ट ने इन तर्कों को विधिक रूप से खारिज करते हुए निम्नलिखित महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित किए।
विशिष्टता और गहराई का अंतर: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गृह विज्ञान में एक समर्पित बैचलर डिग्री, एक मायने में उस विशेष विषय में ‘ऑनर्स डिग्री’ के समकक्ष होती है। एक विशिष्ट डिग्री प्रोग्राम (Specialised Degree) में जिस गहराई और तीव्रता के साथ विषय को पढ़ाया जाता है, वह बीए (पास) कोर्स में उसी विषय के ट्रीटमेंट से गुणात्मक रूप से बिल्कुल भिन्न होता है। भले ही होम साइंस को बीए के तीनों वर्षों में पढ़ा गया हो, फिर भी इसे डोमेस्टिक साइंस की समर्पित स्नातक डिग्री के बराबर नहीं माना जा सकता।
नियमों में उच्च योग्यता का विकल्प नहीं: अदालत ने पाया कि संबंधित भर्ती नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था जो निर्धारित योग्यता के स्थान पर उच्च योग्यता को स्वीकार करने की अनुमति देता हो।
सुप्रीम कोर्ट की नजीर: बेंच ने सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले ‘जहूर अहमद राथर बनाम शेख इम्तियाज अहमद’ का हवाला देते हुए कहा कि किसी उच्च योग्यता को तभी पर्याप्त माना जा सकता है जब शासी नियम (Governing Rules) स्पष्ट रूप से यह प्रदान करते हों कि उच्च डिग्री निचली डिग्री की आवश्यकताओं को पूरा करती है।
कैच देम यंग नीति और ईमानदार छात्रों के साथ न्याय
जस्टिस सी. हरि शंकर द्वारा लिखे गए इस फैसले में अदालत ने एक बहुत ही व्यावहारिक और सामाजिक पहलू को भी रेखांकित किया।
Exclusive छात्रों के साथ अन्याय: कोर्ट ने कहा कि यदि सामान्य पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को विशिष्ट डिग्री वाले पदों पर प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी गई, तो यह उन छात्रों के साथ सरासर अन्याय होगा जिन्होंने स्कूल के तुरंत बाद स्नातक स्तर से ही उस विशेष विषय को अपना विशेष करियर चुना था।
नियोक्ता की नीति का सम्मान: कोर्ट ने कहा कि नियोक्ता वैध रूप से “कैच देम यंग” (Catch them young) की नीति अपना सकता है, जिसके तहत वह शुरुआत से ही विशिष्ट योग्यता रखने वाले युवाओं को प्राथमिकता दे। अदालतों को कार्यपालिका के इस चयन का सम्मान करना चाहिए।
विधिक फैक्ट शीट: दिल्ली हाई कोर्ट बनाम टीजीटी शिक्षक योग्यता वाद (2026)
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और अंतिम निर्णय |
| संबंधित न्यायिक क्षेत्राधिकार | दिल्ली उच्च न्यायालय (खंडपीठ), नई दिल्ली |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस विनोद कुमार |
| विधिक साइटेशन | 2026 LiveLaw (Del) 660 |
| विवादित पद | डोमेस्टिक साइंस टीचर (TGT), दिल्ली सरकारी स्कूल |
| प्रासंगिक सुप्रीम कोर्ट नजीर | जहूर अहमद राथर बनाम शेख इम्तियाज अहमद |
| अदालत का अंतिम आदेश | CAT का आदेश रद्द; केवल मास्टर्स के आधार पर उम्मीदवार अपात्र घोषित |
अदालत ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासनिक और शिक्षक भर्तियों में ‘भर्ती नियम’ (Recruitment Rules) ही सर्वोच्च होते हैं। यदि नियम किसी विशेष विषय में तीन साल की समर्पित बैचलर डिग्री की मांग करते हैं, तो सामान्य स्नातक के बाद की गई मास्टर डिग्री उस कमी को पूरा नहीं कर सकती। यह फैसला भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और नियोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में एक सुदृढ़ कदम है।

