केस एवं कानूनी सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| मामला | Nisha Jose v. State of Kerala & Ors. |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति हरिशंकर वी. मेनन (केरल उच्च न्यायालय) |
| संबंधित नियम | केरल सेवा नियम (KSR) का नियम 101A (Rule 101A – Hysterectomy Leave) |
| मुख्य निर्णय | संविदा (Contractual) महिला कर्मचारी भी गर्भाशय सर्जरी के बाद 45 दिनों के भुगतान सहित अवकाश (Leave Benefits) की पात्र हैं। |
| याचिकाकर्ताओं के वकील | वरिष्ठ अधिवक्ता धन्या पी. अशोकन, एम.आर. वेणुगोपाल व अन्य |
Hysterectomy Leave: केरल हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के अधिकारों और लैंगिक समानता के हित में एक बड़ा फैसला सुनाया है।
न्यायमूर्ति हरिशंकर वी. मेनन की एकल पीठ ने [निशा जोस बनाम केरल राज्य व अन्य] मामले में यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा है कि राज्य सरकार की संविदा/अनुबंध (Contractual) पर कार्यरत महिला कर्मचारी भी हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय निकालने का ऑपरेशन) के बाद नियमित कर्मचारियों की तरह 45 दिनों के विशेष अवकाश (Hysterectomy Leave) की हकदार हैं।
उच्च न्यायालय की मुख्य टिप्पणियां और विधिक तर्क
- मातृत्व और हिस्टेरेक्टॉमी अवकाश में अंतर अनुचित: अदालत ने कहा कि जब राज्य सरकार ने ‘केरल सेवा नियमों’ (Kerala Service Rules – KSR) के तहत संविदा कर्मचारियों को मातृत्व (Maternity – Rule 100) और गर्भपात (Miscarriage – Rule 101) के लिए छुट्टी का लाभ पहले ही दे रखा है, तो फिर नियम 101A के तहत हिस्टेरेक्टॉमी के लिए छुट्टी देने से इनकार करने का कोई ठोस या तर्कसंगत आधार नहीं है। हाई कोर्ट की टिप्पणी: “मेरी राय में, जब नियम 100 और 101 के तहत मिलने वाले लाभ संविदा के आधार पर नियुक्त महिला अधिकारियों को दिए जा रहे हैं, तो नियम 101A के तहत हिस्टेरेक्टॉमी के दावों के लिए वही लाभ न देने का कोई कारण नहीं है।”
- केवल अनुबंध (Contract) के आधार पर भेदभाव नहीं: कोर्ट ने अपने पूर्व के ऐतिहासिक निर्णयों का हवाला देते हुए दोहराया कि मातृत्व व महिला कल्याण से जुड़े अवकाश एक जन-कल्याणकारी उपाय हैं, जो सार्वजनिक रोजगार में महिलाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करते हैं। केवल संविदात्मक स्थिति (Contractual Status) के आधार पर महिलाओं को इन जैविक और स्वास्थ्य-संबंधी अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
मामला क्या था?
- याचिकाकर्ता: ‘समग्र शिक्षा केरल’ (Samagra Shiksha Kerala) के तहत संविदा पर तैनात महिला विशेष शिक्षक (Special Educators)।
- विवाद की वजह: गर्भाशय के ऑपरेशन के बाद दोनों महिला शिक्षकों ने चिकित्सीय प्रमाण पत्रों के साथ 45 दिन की मेडिकल छुट्टी का आवेदन किया था।
- सरकार का इनकार: राज्य सरकार ने उनके आवेदनों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि संविदा कर्मचारियों के लिए जारी सरकारी आदेश केवल KSR के नियम 100 और 101 (मातृत्व व गर्भपात) को कवर करता है, KSR के नियम 101A (हिस्टेरेक्टॉमी) को नहीं।
- अदालत का आदेश: हाई कोर्ट ने सरकार के इनकार को गलत ठहराया और सरकार को निर्देश दिया कि वह इस फैसले के आलोक में याचिकाकर्ताओं के अवकाश आवेदनों पर पुनर्विचार करे और उन्हें मंजूरी दे।

